अल-अनआम · 62/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
ثُمَّ رُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۚ أَلَا لَهُ الْحُكْمُ وَهُوَ أَسْرَعُ الْحَاسِبِينَ ۝٦٢
Summa ruddooo ilallaahi mawlaahumul haqq; alaa lahul hukmu wa Huwa asra`ul haasibeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर ये लोग अपने सच्चे मालिक ख़ुदा के पास वापस बुलाए गए-आगाह रहो कि हुक़ूमत ख़ास उसी के लिए है और वह सबसे ज्यादा हिसाब लेने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رُدُّوا: लौटाए जाएँगे।
  • مَوْلَاهُمُ: उनका स्वामी, मालिक और कार्य-संचालक।
  • الْحَقِّ: सच्चा, जिसका अस्तित्व और प्रभुत्व वास्तविक हो।
  • الْحُكْمُ: फैसला, न्याय और आदेश।
  • أَسْرَعُ الْحَاسِبِينَ: हिसाब लेने वालों में सबसे तेज़।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला बताते हैं कि जब सभी प्राणियों की मृत्यु हो जाएगी और क़ियामत का दिन आएगा, तो सभी लोगों को — चाहे वे पहले मर चुके हों या बाद में — उनके सच्चे स्वामी अल्लाह की ओर लौटाया जाएगा। वही उनका वास्तविक मालिक है, जो सृष्टि का प्रबंधन करता है और जिसकी प्रभुता में कोई साझीदार नहीं। उस दिन सारा फैसला और न्याय केवल अल्लाह के हाथ में होगा; किसी और को कोई अधिकार नहीं होगा। वह अपने बंदों के कर्मों का हिसाब इतनी तेज़ी से लेगा कि उसकी गति की तुलना किसी से नहीं की जा सकती। वह सभी प्राणियों का हिसाब एक ही दिन में पूरा कर देगा, जबकि कोई भी प्राणी उसकी इस गति की बराबरी नहीं कर सकता। यह हिसाब अत्यंत न्यायपूर्ण होगा, जिसमें कोई ज़ुल्म या कमी नहीं होगी।


फ़ायदे (उपदेश और शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की ओर लौटना निश्चित है — यह आयत हमें याद दिलाती है कि मृत्यु के बाद हमें अल्लाह के सामने उपस्थित होना है, इसलिए हमें अपने जीवन को उसी के अनुसार ढालना चाहिए जो उसे पसंद है।
  2. अल्लाह ही सच्चा स्वामी है — दुनिया में हम जिन चीज़ों को अपना मालिक या सहारा मानते हैं, वे सब अस्थायी हैं। असली मालिक केवल अल्लाह है, इसलिए हमें उसी पर भरोसा करना चाहिए।
  3. न्याय का दिन अवश्य आएगा — यह आयत हमें विश्वास दिलाती है कि इस दुनिया में चाहे कुछ भी हो, अंतिम न्याय अल्लाह के यहाँ होगा। इससे इंसान में ज़िम्मेदारी का एहसास पैदा होता है और वह अच्छे कर्म करने की प्रेरणा पाता है।
  4. अल्लाह की गति और शक्ति की महानता — अल्लाह का हिसाब लेना इतना तेज़ है कि वह सभी प्राणियों का एक साथ हिसाब कर सकता है। यह हमें अल्लाह की क़ुदरत का एहसास कराता है और उसके प्रति विनम्रता सिखाता है।
  5. हिसाब से पहले आत्म-निरीक्षण — यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने कर्मों की समीक्षा स्वयं करनी चाहिए, ताकि उस दिन हम शर्मिंदा न हों जब सब कुछ खुला होगा।


📜 आयत 60-64 — अल-अनआम

60وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُم بِاللَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُم بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ فِيهِ لِيُقْضَىٰ أَجَلٌ مُّسَمًّى ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
वह वही (ख़ुदा) है जो तुम्हें रात को (नींद में एक तरह पर दुनिया से) उठा लेता हे और जो कुछ तूने दिन को किया है जानता है फिर तुम्हें दिन को उठा कर खड़ा करता है ताकि (ज़िन्दगी की) (वह) मियाद जो (उसके इल्म में) मुअय्युन है पूरी की जाए फिर (तो आख़िर) तुम सबको उसी की तरफ लौटना है फिर जो कुछ तुम (दुनिया में भला बुरा) करते हो तुम्हें बता देगा
61وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِهِ ۖ وَيُرْسِلُ عَلَيْكُمْ حَفَظَةً حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَحَدَكُمُ الْمَوْتُ تَوَفَّتْهُ رُسُلُنَا وَهُمْ لَا يُفَرِّطُونَ
वह अपने बन्दों पर ग़ालिब है वह तुम लोगों पर निगेहबान (फ़रिश्ततें तैनात करके) भेजता है-यहाँ तक कि जब तुम में से किसी की मौत आए तो हमारे भेजे हुये फ़रिश्ते उसको (दुनिया से) उठा लेते हैं और वह (हमारे तामीले हुक्म में ज़रा भी) कोताही नहीं करते
62ثُمَّ رُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۚ أَلَا لَهُ الْحُكْمُ وَهُوَ أَسْرَعُ الْحَاسِبِينَ
फिर ये लोग अपने सच्चे मालिक ख़ुदा के पास वापस बुलाए गए-आगाह रहो कि हुक़ूमत ख़ास उसी के लिए है और वह सबसे ज्यादा हिसाब लेने वाला है
63قُلْ مَن يُنَجِّيكُم مِّن ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ تَدْعُونَهُ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً لَّئِنْ أَنجَانَا مِنْ هَٰذِهِ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِرِينَ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि तुम ख़ुश्की और तरी के (घटाटोप) ऍधेरों से कौन छुटकारा देता है जिससे तुम गिड़ गिड़ाकर और (चुपके) दुआएं मॉगते हो कि अगर वह हमें (अब की दफ़ा) उस (बला) से छुटकारा दे तो हम ज़रुर उसके शुक्र गुज़ार (बन्दे होकर) रहेगें
64قُلِ اللَّهُ يُنَجِّيكُم مِّنْهَا وَمِن كُلِّ كَرْبٍ ثُمَّ أَنتُمْ تُشْرِكُونَ
तुम कहो उन (मुसीबतों) से और हर बला में ख़ुदा तुम्हें नजात देता है (मगर अफसोस) उस पर भी तुम शिर्क करते ही जाते हो
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अनुवाद — अल-अनआम 62

सूरा अल-अनआम आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर ये लोग अपने सच्चे मालिक ख़ुदा के पास वापस…

सूरा आयत 62/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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