अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَلْ: बल्कि, अपितु (यहाँ पर पिछली बात से रुजू करने के लिए है)
- نَحْنُ: हम
- مَحْرُومُونَ: वंचित किए गए, जिन्हें उनका हक़ न दिया गया हो
तफ़सीर:
जब उन बाग़ वालों ने अपने बाग़ को जला हुआ और तबाह हुआ देखा, तो पहले तो वे हैरान रह गए और कहने लगे: "हम शायद रास्ता भूल गए हैं, यह हमारा बाग़ नहीं है।" लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा और पहचान लिया कि यह वही उनका बाग़ है, तो उनके मुँह से निकला: "नहीं, बल्कि हम वंचित कर दिए गए हैं।" यानी हमें इस बाग़ के फलों से महरूम कर दिया गया।
यह उनकी उस बुरी नीयत का नतीजा था जो उन्होंने रात में पक्की की थी कि सुबह ग़रीबों और मिस्कीनों को फल लेने से रोक देंगे। उन्होंने "इंशा अल्लाह" नहीं कहा था, और अपनी इसी कंजूसी और बुरे इरादे की वजह से अल्लाह ने उनके बाग़ को रातों-रात तबाह कर दिया।
यह क़िस्सा हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। अल्लाह तआला रिज़्क़ देने वाला है, और जब वह किसी को महरूम करना चाहता है, तो कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती। इसलिए हमें चाहिए कि:
- अल्लाह की दी हुई नेमतों में से दूसरों का हक़ निकालें, ख़ासकर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का।
- किसी भी काम की शुरुआत "इंशा अल्लाह" कहकर करें, क्योंकि इंसान को अपनी ताक़त पर नाज़ नहीं करना चाहिए।
- याद रखें कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह किसी की बुरी नीयत को बरदाश्त नहीं करता।
यह क़िस्सा हमें यह भी सिखाता है कि जब इंसान अपनी ग़लती का एहसास करके तौबा कर लेता है, तो अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उससे बेहतर इनाम देता है। इसलिए हमें कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा उसी की तरफ रुजू करना चाहिए। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, और वह तौबा करने वालों को प्यार करता है।
📜 आयत 25-29 — अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 27
सूरा अल-क़लम आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये हमारा बाग़ नहीं फिर ये सोचकर बोले) बात ये…सूरा आयत 27/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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