अल-क़लम · 26/52
अनुवाद उच्चारण — अल-क़लम
فَلَمَّا رَأَوْهَا قَالُوا إِنَّا لَضَالُّونَ ۝٢٦
Falammaa ra awhaa qaalooo innaa ladaaalloon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब उसे (जला हुआ सियाह) देखा तो कहने लगे हम लोग भटक गए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَمَّا رَأَوْهَا: जब उन्होंने उसे (अपनी बगीची को) देखा
  • قَالُوا: उन्होंने कहा
  • إِنَّا لَضَالُّونَ: हम निश्चित रूप से रास्ता भूल गए हैं

विस्तृत व्याख्या:

जब वे लोग सुबह-सुबह अपनी बगीची की ओर निकले, तो उनका इरादा था कि गरीबों और ज़रूरतमंदों को कुछ न दें और सारा फल स्वयं ही काट लें। उन्होंने यह भी नहीं कहा "इंशा अल्लाह" (अगर अल्लाह ने चाहा)। लेकिन अल्लाह तआला की क़ुदरत देखिए कि जब वे वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने अपनी बगीची को पूरी तरह जली-भुनी और बर्बाद पाया। यह दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए और वे चकित रह गए।

पहले तो उन्होंने कहा: "हम निश्चित रूप से रास्ता भूल गए हैं।" उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि यह उनकी ही बगीची है। उन्होंने समझा कि शायद वे किसी दूसरी जगह आ गए हैं। लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा और पहचान लिया कि यह उनकी ही बगीची है, तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।

यह घटना हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है कि वह उन्हें उनकी गलतियों से आगाह करता है। जब हम अल्लाह के दिए हुए रिज़्क़ में से दूसरों का हक़ नहीं देते, तो हमें यह समझना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। लेकिन साथ ही, अल्लाह तआला बहुत क्षमाशील भी है। अगर हम अपनी गलती पर पश्चाताप करें और अल्लाह से माफ़ी माँगें, तो वह हमें माफ कर देता है और हमें और भी बेहतर देता है।

इस क़िस्से से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और अपने हर काम में "इंशा अल्लाह" कहना चाहिए। हमें कभी भी अपने आप को अल्लाह की रहमत से बेखबर नहीं समझना चाहिए। अल्लाह तआला हमें तौफ़ीक़ दे कि हम अपने जीवन में इन सबक़ों पर अमल करें। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अल-क़लम

24أَن لَّا يَدْخُلَنَّهَا الْيَوْمَ عَلَيْكُم مِّسْكِينٌ
कि आज यहाँ तुम्हारे पास कोई फ़क़ीर न आने पाए
25وَغَدَوْا عَلَىٰ حَرْدٍ قَادِرِينَ
तो वह लोग रोक थाम के एहतमाम के साथ फल तोड़ने की ठाने हुए सवेरे ही जा पहुँचे
26فَلَمَّا رَأَوْهَا قَالُوا إِنَّا لَضَالُّونَ
फिर जब उसे (जला हुआ सियाह) देखा तो कहने लगे हम लोग भटक गए
27بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ
(ये हमारा बाग़ नहीं फिर ये सोचकर बोले) बात ये है कि हम लोग बड़े बदनसीब हैं
28قَالَ أَوْسَطُهُمْ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ لَوْلَا تُسَبِّحُونَ
जो उनमें से मुनसिफ़ मिजाज़ था कहने लगा क्यों मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम लोग (ख़ुदा की) तसबीह क्यों नहीं करते
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
26आयत

अनुवाद — अल-क़लम 26

सूरा अल-क़लम आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब उसे (जला हुआ सियाह) देखा तो कहने लगे…

सूरा आयत 26/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए