अल-हाक़्का · 12/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَا أُذُنٌ وَاعِيَةٌ ۝١٢
Linaj`alahaa lakum tazki ratanw-wa ta`iyahaa unzununw waa`iyah
📖 हिंदी अर्थ
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए यादगार बनाएं और उसे याद रखने वाले कान सुनकर याद रखें

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📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तज़्किरा (تَذْكِرَةً): नसीहत, सबक़ और याद दिलाने वाली बात।
  • त'ईया (تَعِيَهَا): उसे समझना, याद रखना और अपने दिल में संजोना।
  • वा'ईया (وَاعِيَةٌ): समझदार, याद रखने वाली और हक़ को क़बूल करने वाली कान।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपनी उस महान नेमत का ज़िक्र फ़रमाया है जब उसने हज़रात नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम पर तूफ़ान भेजा और पानी हर चीज़ से ऊपर चढ़ गया। उस वक़्त अल्लाह ने अपने नबी और उन पर ईमान लाने वालों को कश्ती में सवार करके बचा लिया। ये वाक़िया सिर्फ़ एक इतिहास नहीं, बल्कि एक ज़बरदस्त निशानी और सबक़ है।

अल्लाह फ़रमाता है कि हमने ये कश्ती और ये पूरा वाक़िया इसलिए पेश किया ताकि वो तुम्हारे लिए एक याद दिलाने वाली नसीहत बने — यानी तुम इससे सबक़ सीखो कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम क्या होता है और उसकी ताबेदारी कैसे नजात का ज़रिया बनती है। ईमान वालों को बचाया गया और काफ़िरों को ग़रक़ कर दिया गया। ये अल्लाह की क़ुदरत और उसके इंसाफ़ की सबसे बड़ी गवाही है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और उसे याद रखे वो कान जो सुनने के बाद समझता है, और समझने के बाद उस पर अमल करता है।" यानी ये सबक़ सिर्फ़ उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद है जिनके कान हक़ को सुनकर उसे अपने दिल में उतार लेते हैं और उसके मुताबिक़ अपनी ज़िंदगी ढाल लेते हैं। ऐसे लोग ही अल्लाह की निशानियों से इबरत हासिल करते हैं।

प्यारे भाइयो और बहनो! ये आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन और अल्लाह के फ़रमान को सिर्फ़ कानों से नहीं, बल्कि दिल से सुनना चाहिए। हमें चाहिए कि हर नसीहत को समझें, उसे याद रखें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल और समझ दी है, ताकि हम उसकी आयतों पर ग़ौर करें और उनसे रहनुमाई हासिल करें। ये कश्ती का वाक़िया हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की रहमत ईमान वालों के साथ है, और उसका अज़ाब नाफ़रमानों के लिए है। आओ, हम अपने दिलों को हक़ के लिए खोलें और हर नसीहत को "काने वा'ईया" बनकर सुनें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 10-14 — अल-हाक़्का

10فَعَصَوْا رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَّابِيَةً
तो उन लोगों ने अपने परवरदिगार के रसूल की नाफ़रमानी की तो ख़ुदा ने भी उनकी बड़ी सख्ती से ले दे कर डाली
11إِنَّا لَمَّا طَغَى الْمَاءُ حَمَلْنَاكُمْ فِي الْجَارِيَةِ
जब पानी चढ़ने लगा तो हमने तुमको कशती पर सवार किया
12لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَا أُذُنٌ وَاعِيَةٌ
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए यादगार बनाएं और उसे याद रखने वाले कान सुनकर याद रखें
13فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ نَفْخَةٌ وَاحِدَةٌ
फिर जब सूर में एक (बार) फूँक मार दी जाएगी
14وَحُمِلَتِ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةً وَاحِدَةً
और ज़मीन और पहाड़ उठाकर एक बारगी (टकरा कर) रेज़ा रेज़ा कर दिए जाएँगे तो उस रोज़ क़यामत आ ही जाएगी
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
12आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 12

सूरा अल-हाक़्का आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि हम उसे तुम्हारे लिए यादगार बनाएं और उसे याद…

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Tuesday, August 18, 2026

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