अल-हाक़्का · 11/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
إِنَّا لَمَّا طَغَى الْمَاءُ حَمَلْنَاكُمْ فِي الْجَارِيَةِ ۝١١
Innaa lammaa taghal maaa`u hamalnaakum fil jaariyah
📖 हिंदी अर्थ
जब पानी चढ़ने लगा तो हमने तुमको कशती पर सवार किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • طَغَى الْمَاءُ: पानी का अपनी हद से बढ़ जाना, यानी हद से ज़्यादा चढ़ जाना और हर चीज़ को डुबो देना।
  • الْجَارِيَةِ: वह नाव या कश्ती जो पानी पर चलती है, यहाँ मतलब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की वह सफ़ीना (कश्ती) है जो अल्लाह के हुक्म से बनाई गई थी।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी बड़ी रहमत और क़ुदरत का ज़िक्र फ़रमा रहे हैं। जब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने हक़ को झुटलाया और ज़ुल्म व सरकशी पर अड़ी रही, तो अल्लाह का अज़ाब आया। पानी अपनी हद से इतना बढ़ गया कि हर ऊँची चीज़ से भी आगे निकल गया, यहाँ तक कि पहाड़ भी पानी में डूब गए। उस वक़्त अल्लाह ने अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) को हुक्म दिया कि वे हर जानवर का एक जोड़ा और अपनी उम्मत के ईमान वालों को उस कश्ती में सवार कर लें जो अल्लाह की निगरानी और हिफ़ाज़त से चल रही थी।

अल्लाह फ़रमाता है: "हमने उस वक़्त तुम्हें उस चलती हुई कश्ती में सवार किया" — यानी तुम्हारे बाप-दादा को, जो तुम्हारी नस्ल की जड़ें थीं। इसलिए तुम सब उसी कश्ती की बदौलत बचे हुए हो। यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है कि उसने उस तूफ़ान के बाद इंसानों की नस्ल को बाक़ी रखा और उन्हें ज़मीन पर फैलाया।

यह वाक़िया सिर्फ़ एक इतिहास नहीं, बल्कि एक निशानी और सबक़ है। अल्लाह ने इसे इसलिए बयान किया ताकि लोग समझें कि जो अल्लाह के हुक्म की ताबेदारी करता है, वह मुश्किल से मुश्किल हालात में भी बच जाता है, और जो सरकशी करता है, वह तबाह हो जाता है। यह क़िस्सा हर उस कान के लिए सबक़ है जो सुनकर समझे और अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करे।

आज हम ज़मीन पर चलते-फिरते हैं, साँस लेते हैं, और अपनी औलाद को देखते हैं — यह सब उसी रहमत का नतीजा है जो अल्लाह ने उस तूफ़ान के बाद इंसानों पर फ़रमाई। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनें, उसकी नेमतों को पहचानें, और उसके हुक्मों पर चलें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें समझने की तौफ़ीक़ दे।



📜 आयत 9-13 — अल-हाक़्का

9وَجَاءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُ وَالْمُؤْتَفِكَاتُ بِالْخَاطِئَةِ
और फिरऔन और जो लोग उससे पहले थे और वह लोग (क़ौमे लूत) जो उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले थे सब गुनाह के काम करते थे
10فَعَصَوْا رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَّابِيَةً
तो उन लोगों ने अपने परवरदिगार के रसूल की नाफ़रमानी की तो ख़ुदा ने भी उनकी बड़ी सख्ती से ले दे कर डाली
11إِنَّا لَمَّا طَغَى الْمَاءُ حَمَلْنَاكُمْ فِي الْجَارِيَةِ
जब पानी चढ़ने लगा तो हमने तुमको कशती पर सवार किया
12لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَا أُذُنٌ وَاعِيَةٌ
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए यादगार बनाएं और उसे याद रखने वाले कान सुनकर याद रखें
13فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ نَفْخَةٌ وَاحِدَةٌ
फिर जब सूर में एक (बार) फूँक मार दी जाएगी
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
11आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 11

सूरा अल-हाक़्का आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब पानी चढ़ने लगा तो हमने तुमको कशती पर सवार…

सूरा आयत 11/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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