अल-हाक़्का · 31/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
ثُمَّ الْجَحِيمَ صَلُّوهُ ۝٣١
Summal Jaheema sallooh
📖 हिंदी अर्थ
फिर इसे जहन्नुम में झोंक दो,

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْجَحِيمَ: भयंकर आग, जो बहुत गहरी और प्रचंड हो।
  • صَلُّوهُ: उसे (आग में) डालो, प्रवेश कराओ, या उसे आग की तपन का अनुभव कराओ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दृश्य का वर्णन कर रही है जो क़ियामत के दिन पापियों के साथ होगा। जब अल्लाह के आदेश से फ़रिश्ते उस अपराधी, पापी व्यक्ति को पकड़ेंगे, जिसने दुनिया में अल्लाह के हुक्मों को नहीं माना और उसकी निशानियों को झुठलाया, तो उन्हें आदेश दिया जाएगा कि पहले उसके हाथों को गर्दन से ज़ंजीरों से बाँध दो, फिर उसे जहन्नम (नर्क) की भीषण आग में डाल दो, ताकि वह उसकी तपन और जलन का पूरा अनुभव करे। यह उसकी सज़ा का दूसरा चरण है — पहले उसे ज़ंजीरों में जकड़ा जाएगा, फिर आग में झोंका जाएगा। यह आग इतनी भयानक है कि इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, और यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने अल्लाह की इबादत नहीं की, उसके रसूलों पर ईमान नहीं लाए, और दुनिया में ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद से मुँह मोड़ा।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक सख्त चेतावनी है कि हम अपने जीवन को ग़ौर से देखें। अल्लाह ने हमें दुनिया में भेजा है ताकि हम उसकी इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें और लोगों के साथ भलाई करें। जो लोग इन बातों से ग़ाफ़िल रहते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन अल्लाह बड़ा दयालु है — उसने हमें मौका दिया है कि हम तौबा करें, अपने कर्म सुधारें, नमाज़ पढ़ें, रोज़ा रखें, ग़रीबों की मदद करें और अल्लाह के रसूल (ﷺ) की सुन्नत पर चलें। अगर हम ऐसा करेंगे, तो अल्लाह हमें इस आग से बचाएगा और जन्नत की नेमतों से नवाज़ेगा। यह आयत हमें यही सिखाती है कि आज का हर अच्छा काम कल के लिए रोशनी बनेगा, और आज की हर ग़लती से बचना ही हमारी सफलता की कुंजी है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें जहन्नम की आग से बचाए और जन्नत अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 29-33 — अल-हाक़्का

29هَلَكَ عَنِّي سُلْطَانِيَهْ
(हाए) मेरी सल्तनत ख़ाक में मिल गयी (फिर हुक्म होगा)
30خُذُوهُ فَغُلُّوهُ
इसे गिरफ्तार करके तौक़ पहना दो
31ثُمَّ الْجَحِيمَ صَلُّوهُ
फिर इसे जहन्नुम में झोंक दो,
32ثُمَّ فِي سِلْسِلَةٍ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًا فَاسْلُكُوهُ
फिर एक ज़ंजीर में जिसकी नाप सत्तर गज़ की है उसे ख़ूब जकड़ दो
33إِنَّهُ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ
(क्यों कि) ये न तो बुज़ुर्ग ख़ुदा ही पर ईमान लाता था और न मोहताज के खिलाने पर आमादा (लोगों को) करता था
अल-हाक़्काकुरान सूची
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31आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 31

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Tuesday, August 18, 2026

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