अल-हाक़्का · 30/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
خُذُوهُ فَغُلُّوهُ ۝٣٠
Khuzoohu faghullooh
📖 हिंदी अर्थ
इसे गिरफ्तार करके तौक़ पहना दो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • خُذُوهُ: उसे पकड़ लो।
  • فَغُلُّوهُ: उसके हाथों को गर्दन से जोड़कर (हथकड़ी/गले में) तौक़ (طوق) डाल दो, यानी उसे बेड़ियों में जकड़ दो।

तफ़सीर:

जब अल्लाह तआला का फ़ैसला आ जाएगा और यह मुजरिम (अपराधी) अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए खड़ा होगा, तो उसे कोई बहाना या सिफ़ारिश काम नहीं आएगी। उस वक़्त अल्लाह के हुक्म से दोज़ख़ (नरक) के फ़रिश्ते उसे पकड़ लेंगे और उसके हाथों को उसकी गर्दन से जोड़कर लोहे की बेड़ियों (हथकड़ियों) में जकड़ देंगे। यह उसकी सज़ा की शुरुआत होगी — पहले उसे बेड़ियों में जकड़ा जाएगा, फिर उसे जहन्नम की आग में डाला जाएगा, और फिर सत्तर हाथ लंबी एक लोहे की ज़ंजीर में उसे कस दिया जाएगा, ताकि वह उससे निकल न सके और न ही हिल सके।

यह सज़ा उस शख़्स के लिए है जो दुनिया में अल्लाह की वहदानियत (एकता) पर ईमान नहीं लाया, उसके हुक्मों को नहीं माना, और न ही उसने लोगों को ग़रीबों और मिस्कीनों को खाना खिलाने की तरग़ीब दी। उसने अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) से खाली रखा और आख़िरत को भुला दिया, इसलिए आज उसे इस तरह ज़लील होकर पकड़ा जा रहा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में मोहलत (समय) दी है ताकि हम अपने आपको सुधार लें। आज हमारे हाथ खुले हैं, हम जो चाहें कर सकते हैं — लेकिन क़यामत के दिन यही हाथ बेड़ियों में जकड़ दिए जाएँगे, अगर हमने इन्हें अल्लाह की इताअत में नहीं लगाया। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक बनाएँ, उसकी इबादत करें, और उसकी मख़लूक़ (सृष्टि) के साथ भलाई करें — ख़ासकर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करें। याद रखें, आज की एक अच्छी नीयत और एक नेक काम कल हमारे लिए रोशनी बनेगा, और अल्लाह की रहमत उसी पर होती है जो उसके हुक्मों का पालन करता है। आइए, हम अपने रब की तरफ़ लौटें और उसकी रहमत के तलबगार बनें, ताकि उस दिन हमें इस तरह पकड़े जाने से बचाया जा सके।



📜 आयत 28-32 — अल-हाक़्का

28مَا أَغْنَىٰ عَنِّي مَالِيَهْ ۜ
(अफ़सोस) मेरा माल मेरे कुछ भी काम न आया
29هَلَكَ عَنِّي سُلْطَانِيَهْ
(हाए) मेरी सल्तनत ख़ाक में मिल गयी (फिर हुक्म होगा)
30خُذُوهُ فَغُلُّوهُ
इसे गिरफ्तार करके तौक़ पहना दो
31ثُمَّ الْجَحِيمَ صَلُّوهُ
फिर इसे जहन्नुम में झोंक दो,
32ثُمَّ فِي سِلْسِلَةٍ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًا فَاسْلُكُوهُ
फिर एक ज़ंजीर में जिसकी नाप सत्तर गज़ की है उसे ख़ूब जकड़ दो
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30आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 30

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Tuesday, August 18, 2026

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