अल-हाक़्का · 36/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍ ۝٣٦
Wa laa ta`aamun illaa min ghisleen
📖 हिंदी अर्थ
जिसको गुनेहगारों के सिवा कोई नहीं खाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ग़िस्लीन (غسلين): यह जहन्नम के लोगों के शरीर से निकलने वाला पीप, खून और बदबूदार रिसाव है। यह उनके घावों और जलते हुए शरीर से बहता है, और यही उनका भोजन होगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला उन काफ़िरों और गुनाहगारों की भयानक स्थिति का वर्णन कर रहा है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के हुक्मों को ठुकराया और अपनी ज़िद और सरकशी पर अड़े रहे। क़यामत के दिन उनके लिए न तो कोई सच्चा दोस्त या रिश्तेदार होगा जो उन्हें अज़ाब से बचा सके, और न ही उनके लिए कोई अच्छा भोजन होगा। उनका एकमात्र भोजन "ग़िस्लीन" होगा — यानी जहन्नम के लोगों के शरीर से निकलने वाला पीप, खून और बदबूदार तरल पदार्थ। यह वह चीज़ है जो उनके जलते हुए शरीर से बहती है और उन्हें खाने के लिए दी जाएगी।

यह भोजन केवल उन मुजरिमों के लिए है जिन्होंने अल्लाह पर ईमान नहीं लाया और अपनी ज़िंदगी में लगातार गुनाह करते रहे, बिना तौबा किए। वे दुनिया में जो लज़्ज़त और आराम के खाने खाते थे, आज उनका बदला यह है कि उन्हें जहन्नम का यह घिनौना और दर्दनाक भोजन दिया जाएगा।

दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में भरपूर नेमतें दी हैं — साफ़ पानी, अच्छा भोजन, आराम की ज़िंदगी। लेकिन अगर हम अल्लाह के शुक्र को भूल जाएँ और उसकी नाफ़रमानी में जीवन बिताएँ, तो क़यामत के दिन हमारा यही हाल होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हर वक़्त अल्लाह का शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें और गुनाहों से बचें। अल्लाह तआला बड़ा रहम करने वाला है — जो कोई भी सच्चे दिल से तौबा करके उसकी ओर लौटता है, अल्लाह उसके सारे गुनाह माफ़ कर देता है और उसे जहन्नम की इस भयानक सज़ा से बचा लेता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम उस दिन की सख्त सज़ा से बच सकें और जन्नत की नेमतों के हक़दार बन सकें।



📜 आयत 34-38 — सूरा अल-हाक़्का

34وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ
तो आज न उसका कोई ग़मख्वार है
35فَلَيْسَ لَهُ الْيَوْمَ هَاهُنَا حَمِيمٌ
और न पीप के सिवा (उसके लिए) कुछ खाना है
36وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍ
जिसको गुनेहगारों के सिवा कोई नहीं खाएगा
37لَّا يَأْكُلُهُ إِلَّا الْخَاطِئُونَ
तो मुझे उन चीज़ों की क़सम है
38فَلَا أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ
जो तुम्हें दिखाई देती हैं
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अनुवाद — अल-हाक़्का 36

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Thursday, October 1, 2026

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