अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَهْدِ: मार्गदर्शन करे, सीधा रास्ता दिखाए।
- الْمُهْتَدِي: हिदायत पाने वाला, सही रास्ते पर चलने वाला।
- يُضْلِلْ: गुमराह करे, पथभ्रष्ट करे।
- الْخَاسِرُونَ: घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में स्पष्ट कर रहे हैं कि हिदायत और गुमराही पूरी तरह से उसी के हाथ में है। जिसे अल्लाह अपनी ओर से हिदायत दे देता है, उसे सीधा रास्ता दिखा देता है और उसके दिल में ईमान और सत्य की समझ पैदा कर देता है, तो वही वास्तव में हिदायत पाने वाला है। उसकी हिदायत किसी इंसान के कहने या समझाने से नहीं होती, बल्कि अल्लाह की तौफीक से होती है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में सही रास्ते पर चलता है, अल्लाह की इबादत करता है और उसकी राह में अपने कर्तव्यों को निभाता है।
इसके विपरीत, जिसे अल्लाह गुमराही में छोड़ देता है — यानी उसकी ओर से हिदायत का साधन नहीं बनता, उसके दिल को सत्य स्वीकार करने की तौफीक नहीं देता — तो ऐसे लोग ही वास्तव में घाटे में रहने वाले हैं। वे दुनिया में भले ही अपने आप को समझदार या सफल समझें, लेकिन आख़िरत में वे सबसे बड़ा नुकसान उठाएँगे। उन्होंने अपनी ज़िंदगी, अपनी औलाद और अपने आप को खो दिया। यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने हाथों अपना नुकसान किया, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की राह छोड़कर शैतान की राह अपनाई।
यह आयत यह भी बताती है कि हिदायत और गुमराही अल्लाह ही के इख्तियार में है। कोई इंसान चाहे कितना भी चाहे, वह किसी को हिदायत नहीं दे सकता जब तक कि अल्लाह न चाहे। इसलिए हर इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह से हिदायत की दुआ करे और उसकी राह पर चलने की कोशिश करे।
फ़ायदे और सबक:
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा अल्लाह से हिदायत की दुआ करनी चाहिए, क्योंकि असली हिदायत देने वाला वही है। हमें अपनी ताकत और समझ पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह की तौफीक पर भरोसा रखना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अगर कोई इंसान सही रास्ते पर है, तो यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है। इसलिए हमें अपनी हिदायत पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
- गुमराही से बचने के लिए हमें अल्लाह की किताब और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को पकड़ना चाहिए, क्योंकि यही हिदायत का असली ज़रिया है।
- यह आयत हमें आख़िरत के उस नुकसान से डराती है जो गुमराह लोगों को होगा। यह डर हमें सही रास्ते पर चलने की ताकत देता है और हमें बुराई से दूर रखता है।
- सबसे बड़ी बात यह है कि अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो भी उसकी ओर रुजू करेगा, अल्लाह उसे हिदायत देगा। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा अल्लाह की तरफ लौटते रहना चाहिए।
📜 आयत 176-180 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 178
सूरा अल-आराफ आयत 178 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे…सूरा आयत 178/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 176–180. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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