अल-आराफ · 178/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
مَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِي ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ ۝١٧٨
mai yahdil laahu fa huwal muhtadee wa mai yudlil fa ulaaa`ika humul khaasiroon
📖 हिंदी अर्थ
राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَهْدِ: मार्गदर्शन करे, सीधा रास्ता दिखाए।
  • الْمُهْتَدِي: हिदायत पाने वाला, सही रास्ते पर चलने वाला।
  • يُضْلِلْ: गुमराह करे, पथभ्रष्ट करे।
  • الْخَاسِرُونَ: घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले।

विस्तृत व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में स्पष्ट कर रहे हैं कि हिदायत और गुमराही पूरी तरह से उसी के हाथ में है। जिसे अल्लाह अपनी ओर से हिदायत दे देता है, उसे सीधा रास्ता दिखा देता है और उसके दिल में ईमान और सत्य की समझ पैदा कर देता है, तो वही वास्तव में हिदायत पाने वाला है। उसकी हिदायत किसी इंसान के कहने या समझाने से नहीं होती, बल्कि अल्लाह की तौफीक से होती है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में सही रास्ते पर चलता है, अल्लाह की इबादत करता है और उसकी राह में अपने कर्तव्यों को निभाता है।

इसके विपरीत, जिसे अल्लाह गुमराही में छोड़ देता है — यानी उसकी ओर से हिदायत का साधन नहीं बनता, उसके दिल को सत्य स्वीकार करने की तौफीक नहीं देता — तो ऐसे लोग ही वास्तव में घाटे में रहने वाले हैं। वे दुनिया में भले ही अपने आप को समझदार या सफल समझें, लेकिन आख़िरत में वे सबसे बड़ा नुकसान उठाएँगे। उन्होंने अपनी ज़िंदगी, अपनी औलाद और अपने आप को खो दिया। यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने हाथों अपना नुकसान किया, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की राह छोड़कर शैतान की राह अपनाई।

यह आयत यह भी बताती है कि हिदायत और गुमराही अल्लाह ही के इख्तियार में है। कोई इंसान चाहे कितना भी चाहे, वह किसी को हिदायत नहीं दे सकता जब तक कि अल्लाह न चाहे। इसलिए हर इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह से हिदायत की दुआ करे और उसकी राह पर चलने की कोशिश करे।

फ़ायदे और सबक:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा अल्लाह से हिदायत की दुआ करनी चाहिए, क्योंकि असली हिदायत देने वाला वही है। हमें अपनी ताकत और समझ पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह की तौफीक पर भरोसा रखना चाहिए।
  2. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अगर कोई इंसान सही रास्ते पर है, तो यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है। इसलिए हमें अपनी हिदायत पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
  3. गुमराही से बचने के लिए हमें अल्लाह की किताब और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को पकड़ना चाहिए, क्योंकि यही हिदायत का असली ज़रिया है।
  4. यह आयत हमें आख़िरत के उस नुकसान से डराती है जो गुमराह लोगों को होगा। यह डर हमें सही रास्ते पर चलने की ताकत देता है और हमें बुराई से दूर रखता है।
  5. सबसे बड़ी बात यह है कि अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो भी उसकी ओर रुजू करेगा, अल्लाह उसे हिदायत देगा। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा अल्लाह की तरफ लौटते रहना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 176-180 — अल-आराफ

176وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَاهُ بِهَا وَلَٰكِنَّهُ أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ ۚ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الْكَلْبِ إِن تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَث ۚ ذَّٰلِكَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ فَاقْصُصِ الْقَصَصَ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें
177سَاءَ مَثَلًا الْقَوْمُ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَأَنفُسَهُمْ كَانُوا يَظْلِمُونَ
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे
178مَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِي ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं
179وَلَقَدْ ذَرَأْنَا لِجَهَنَّمَ كَثِيرًا مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ لَهُمْ قُلُوبٌ لَّا يَفْقَهُونَ بِهَا وَلَهُمْ أَعْيُنٌ لَّا يُبْصِرُونَ بِهَا وَلَهُمْ آذَانٌ لَّا يَسْمَعُونَ بِهَا ۚ أُولَٰئِكَ كَالْأَنْعَامِ بَلْ هُمْ أَضَلُّ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ
और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं
180وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا ۖ وَذَرُوا الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي أَسْمَائِهِ ۚ سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और अच्छे (अच्छे) नाम ख़ुदा ही के ख़ास हैं तो उसे उन्हीं नामों में पुकारो और जो लोग उसके नामों में कुफ्र करते हैं उन्हें (उनके हाल पर) छोड़ दो और वह बहुत जल्द अपने करतूत की सज़ाएं पाएंगें
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
178आयत

अनुवाद — अल-आराफ 178

सूरा अल-आराफ आयत 178 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे…

सूरा आयत 178/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 176–180. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए