अल-आराफ · 177/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
سَاءَ مَثَلًا الْقَوْمُ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَأَنفُسَهُمْ كَانُوا يَظْلِمُونَ ۝١٧٧
Saaa`a masalanil qawmul lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wa anfusahum kaanoo yazlimoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَاءَ: बहुत बुरा है, कितना बुरा है।
  • مَثَلًا: उदाहरण, मिसाल।
  • كَذَّبُوا: झुठलाया, अस्वीकार किया।
  • بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों, हमारे प्रमाणों और हमारी आयतों को।
  • يَظْلِمُونَ: अत्याचार करते हैं, ज़ुल्म करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की बुरी स्थिति को उजागर करती है जिन्होंने अल्लाह की आयतों और निशानियों को झुठलाया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि कितना बुरा उदाहरण है उन लोगों का जिन्होंने हमारी दलीलों और प्रमाणों को अस्वीकार किया, जबकि ये प्रमाण स्पष्ट और सत्य थे। उन्होंने न केवल अल्लाह की आयतों को झुठलाया, बल्कि इस कृत्य से उन्होंने स्वयं अपनी आत्माओं पर अत्याचार किया। दरअसल, उन्होंने अपने आप को ही नुकसान पहुँचाया, क्योंकि सत्य को अस्वीकार करके उन्होंने अपने लिए विनाश का रास्ता चुना। यह ज़ुल्म अल्लाह पर नहीं था, बल्कि उनके अपने ऊपर था, क्योंकि उन्होंने जानते-बूझते हुए सत्य का इनकार किया और अपनी आत्माओं को हलाकत में डाला। उनका उदाहरण बहुत ही बुरा और निंदनीय है, और यह उनके लिए शर्म और पछतावे का कारण है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की आयतों और निशानियों को झुठलाना सबसे बड़ा ज़ुल्म है, और इसका अंजाम विनाश के सिवा कुछ नहीं।
  2. जो व्यक्ति सत्य को जानने के बाद भी अस्वीकार करता है, वह वास्तव में अपनी ही आत्मा पर अत्याचार करता है, क्योंकि उसका नुकसान अल्लाह को नहीं, बल्कि स्वयं उसे ही होता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह की निशानियों पर गहराई से विचार करना चाहिए और उन्हें स्वीकार करना चाहिए, ताकि हम अपनी आत्माओं को ज़ुल्म और विनाश से बचा सकें।
  4. सत्य को स्वीकार करना और उस पर अमल करना ही कामयाबी का रास्ता है, और यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है।
  5. यह आयत हमें आगाह करती है कि हम उन लोगों के उदाहरण से सबक लें जिन्होंने अल्लाह के प्रमाणों को ठुकराया, ताकि हम उनके जैसे बुरे अंजाम से बच सकें।


📜 आयत 175-179 — सूरा अल-आराफ

175وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ الَّذِي آتَيْنَاهُ آيَاتِنَا فَانسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ فَكَانَ مِنَ الْغَاوِينَ
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया
176وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَاهُ بِهَا وَلَٰكِنَّهُ أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ ۚ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الْكَلْبِ إِن تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَث ۚ ذَّٰلِكَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ فَاقْصُصِ الْقَصَصَ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें
177سَاءَ مَثَلًا الْقَوْمُ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَأَنفُسَهُمْ كَانُوا يَظْلِمُونَ
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे
178مَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِي ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं
179وَلَقَدْ ذَرَأْنَا لِجَهَنَّمَ كَثِيرًا مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ لَهُمْ قُلُوبٌ لَّا يَفْقَهُونَ بِهَا وَلَهُمْ أَعْيُنٌ لَّا يُبْصِرُونَ بِهَا وَلَهُمْ آذَانٌ لَّا يَسْمَعُونَ بِهَا ۚ أُولَٰئِكَ كَالْأَنْعَامِ بَلْ هُمْ أَضَلُّ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ
और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं
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अनुवाद — अल-आराफ 177

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Thursday, October 1, 2026

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