जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
سَاءَ: बहुत बुरा है, कितना बुरा है।
مَثَلًا: उदाहरण, मिसाल।
كَذَّبُوا: झुठलाया, अस्वीकार किया।
بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों, हमारे प्रमाणों और हमारी आयतों को।
يَظْلِمُونَ: अत्याचार करते हैं, ज़ुल्म करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की बुरी स्थिति को उजागर करती है जिन्होंने अल्लाह की आयतों और निशानियों को झुठलाया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि कितना बुरा उदाहरण है उन लोगों का जिन्होंने हमारी दलीलों और प्रमाणों को अस्वीकार किया, जबकि ये प्रमाण स्पष्ट और सत्य थे। उन्होंने न केवल अल्लाह की आयतों को झुठलाया, बल्कि इस कृत्य से उन्होंने स्वयं अपनी आत्माओं पर अत्याचार किया। दरअसल, उन्होंने अपने आप को ही नुकसान पहुँचाया, क्योंकि सत्य को अस्वीकार करके उन्होंने अपने लिए विनाश का रास्ता चुना। यह ज़ुल्म अल्लाह पर नहीं था, बल्कि उनके अपने ऊपर था, क्योंकि उन्होंने जानते-बूझते हुए सत्य का इनकार किया और अपनी आत्माओं को हलाकत में डाला। उनका उदाहरण बहुत ही बुरा और निंदनीय है, और यह उनके लिए शर्म और पछतावे का कारण है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
अल्लाह की आयतों और निशानियों को झुठलाना सबसे बड़ा ज़ुल्म है, और इसका अंजाम विनाश के सिवा कुछ नहीं।
जो व्यक्ति सत्य को जानने के बाद भी अस्वीकार करता है, वह वास्तव में अपनी ही आत्मा पर अत्याचार करता है, क्योंकि उसका नुकसान अल्लाह को नहीं, बल्कि स्वयं उसे ही होता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह की निशानियों पर गहराई से विचार करना चाहिए और उन्हें स्वीकार करना चाहिए, ताकि हम अपनी आत्माओं को ज़ुल्म और विनाश से बचा सकें।
सत्य को स्वीकार करना और उस पर अमल करना ही कामयाबी का रास्ता है, और यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है।
यह आयत हमें आगाह करती है कि हम उन लोगों के उदाहरण से सबक लें जिन्होंने अल्लाह के प्रमाणों को ठुकराया, ताकि हम उनके जैसे बुरे अंजाम से बच सकें।
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें
और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं
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