Fareeqan hadaa wa fareeqan haqqa `alaihimud dalaalah; innahumut takhazush Shayaateena awliyaaa`a min doonil laahi wa yahsaboona annnahum muhtadoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
उसी तरह फिर (दोबारा) ज़िन्दा किये जाओगे उसी ने एक फरीक़ की हिदायत की और एक गिरोह (के सर) पर गुमराही सवार हो गई उन लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर शैतानों को अपना सरपरस्त बना लिया और बावजूद उसके गुमराह करते हैं कि वह राह रास्ते पर है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
ایک فریق کو تو اس نے ہدایت دی اور ایک فریق پر گمراہی ثابت ہوچکی۔ ان لوگوں نے خدا کو چھوڑ کر شیطانوں کو رفیق بنا لیا اور سمجھتے (یہ) ہیں کہ ہدایت یاب ہیں
حَقَّ عَلَيْهِمُ الضَّلَالَةُ: उन पर गुमराही साबित (अनिवार्य) हो गई।
اتَّخَذُوا الشَّيَاطِينَ أَوْلِيَاءَ: उन्होंने शैतानों को अपना संरक्षक/मित्र बना लिया।
مِن دُونِ اللَّهِ: अल्लाह को छोड़कर।
يَحْسَبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَ: वे समझते हैं कि वे सीधे मार्ग पर हैं।
तफसीर:
अल्लाह तआला ने अपने बंदों को दो समूहों में विभाजित किया है:
पहला समूह: वह जिसे अल्लाह ने हिदायत दी — यानी उन्हें ईमान की तौफीक दी, उनके लिए हिदायत के रास्ते आसान किए और गुमराही के रास्तों से उन्हें बचाया। ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की आयतों को माना और उसके रसूलों का अनुसरण किया।
दूसरा समूह: वह जिस पर गुमराही साबित हो गई — यानी अल्लाह की ओर से उन पर पहले से यह फैसला लिख दिया गया कि वे गुमराह रहेंगे, क्योंकि अल्लाह का विधान उनके अपने कर्मों और उनकी पसंद के अनुसार होता है। इस गुमराही का कारण यह है कि उन्होंने अल्लाह को छोड़कर शैतानों को अपना संरक्षक और मित्र बना लिया। उन्होंने शैतानों की आज्ञा का पालन किया, उनके कहने पर चले, और यह सब अज्ञानता और मूर्खता के कारण किया। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वे यह समझते हैं कि वे सीधे मार्ग पर हैं, जबकि वास्तव में वे सबसे अधिक गुमराह हैं। उनका यह भ्रम उनके लिए और भी खतरनाक है, क्योंकि वे अपनी गलती को सुधारने की कोशिश ही नहीं करते।
फायदे और सबक:
यह आयत हमें सिखाती है कि हिदायत और गुमराही पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है, और हमें हर वक्त उससे हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए।
शैतान को संरक्षक बनाना सबसे बड़ी भूल है — जो व्यक्ति अल्लाह को छोड़कर किसी और (चाहे वह इंसान हो या जिन्न) को अपना मार्गदर्शक बनाता है, वह गुमराही की ओर बढ़ता है।
सबसे खतरनाक स्थिति वह है जब इंसान गुमराह हो और उसे अपनी गुमराही का एहसास ही न हो, बल्कि वह खुद को हिदायत पर समझे। इसलिए हमें अपने अकीदे और अमल की लगातार जाँच करते रहना चाहिए।
यह आयत हमें अल्लाह के दीन से जुड़ने की तरगीब देती है, क्योंकि अल्लाह ही वह है जो सच्चा मार्गदर्शक है, और उसकी किताब (कुरआन) और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत ही सच्चे रास्ते की रोशनी हैं।
इंसान को अपने ज्ञान पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि बहुत से लोग ज्ञान का दावा करते हुए भी सच्चाई से दूर रहते हैं — सच्ची हिदायत वही है जो अल्लाह की रहमत और उसके रसूल के अनुसरण से मिलती है।
उसी तरह फिर (दोबारा) ज़िन्दा किये जाओगे उसी ने एक फरीक़ की हिदायत की और एक गिरोह (के सर) पर गुमराही सवार हो गई उन लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर शैतानों को अपना सरपरस्त बना लिया और बावजूद उसके गुमराह करते हैं कि वह राह रास्ते पर है
जो ईमान नही रखते और वह लोग जब कोई बुरा काम करते हैं कि हमने उस तरीके पर अपने बाप दादाओं को पाया और ख़ुदा ने (भी) यही हुक्म दिया है (ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि ख़ुदा ने (भी) यही हुक्म दिया है (ऐ रसूल) तुम (साफ) कह दो कि ख़ुदा हरगिज़ बुरे काम का हुक्म नहीं देता क्या तुम लोग ख़ुदा पर (इफ्तिरा करके) वह बातें कहते हो जो तुम नहीं जानते
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरे परवरदिगार ने तो इन्साफ का हुक्म दिया है और (ये भी क़रार दिया है कि) हर नमाज़ के वक्त अपने अपने मुँह (क़िबले की तरफ़) सीधे कर लिया करो और इसके लिए निरी खरी इबादत करके उससे दुआ मांगो जिस तरह उसने तुम्हें शुरू शुरू पैदा किया था
उसी तरह फिर (दोबारा) ज़िन्दा किये जाओगे उसी ने एक फरीक़ की हिदायत की और एक गिरोह (के सर) पर गुमराही सवार हो गई उन लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर शैतानों को अपना सरपरस्त बना लिया और बावजूद उसके गुमराह करते हैं कि वह राह रास्ते पर है
(ऐ रसूल से) पूछो तो कि जो ज़ीनत (के साज़ों सामान) और खाने की साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने अपने बन्दो के वास्ते पैदा की हैं किसने हराम कर दी तुम ख़ुद कह दो कि सब पाक़ीज़ा चीज़े क़यामत के दिन उन लोगों के लिए ख़ास हैं जो दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में ईमान लाते थे हम यूँ अपनी आयतें समझदार लोगों के वास्ते तफसीलदार बयान करतें हैं
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