Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَرِيقًا هَدَىٰ: एक समूह को उसने मार्गदर्शन दिया।
- حَقَّ عَلَيْهِمُ الضَّلَالَةُ: उन पर गुमराही साबित (अनिवार्य) हो गई।
- اتَّخَذُوا الشَّيَاطِينَ أَوْلِيَاءَ: उन्होंने शैतानों को अपना संरक्षक/मित्र बना लिया।
- مِن دُونِ اللَّهِ: अल्लाह को छोड़कर।
- يَحْسَبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَ: वे समझते हैं कि वे सीधे मार्ग पर हैं।
तफसीर:
अल्लाह तआला ने अपने बंदों को दो समूहों में विभाजित किया है:
पहला समूह: वह जिसे अल्लाह ने हिदायत दी — यानी उन्हें ईमान की तौफीक दी, उनके लिए हिदायत के रास्ते आसान किए और गुमराही के रास्तों से उन्हें बचाया। ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की आयतों को माना और उसके रसूलों का अनुसरण किया।
दूसरा समूह: वह जिस पर गुमराही साबित हो गई — यानी अल्लाह की ओर से उन पर पहले से यह फैसला लिख दिया गया कि वे गुमराह रहेंगे, क्योंकि अल्लाह का विधान उनके अपने कर्मों और उनकी पसंद के अनुसार होता है। इस गुमराही का कारण यह है कि उन्होंने अल्लाह को छोड़कर शैतानों को अपना संरक्षक और मित्र बना लिया। उन्होंने शैतानों की आज्ञा का पालन किया, उनके कहने पर चले, और यह सब अज्ञानता और मूर्खता के कारण किया। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वे यह समझते हैं कि वे सीधे मार्ग पर हैं, जबकि वास्तव में वे सबसे अधिक गुमराह हैं। उनका यह भ्रम उनके लिए और भी खतरनाक है, क्योंकि वे अपनी गलती को सुधारने की कोशिश ही नहीं करते।
फायदे और सबक:
- यह आयत हमें सिखाती है कि हिदायत और गुमराही पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है, और हमें हर वक्त उससे हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए।
- शैतान को संरक्षक बनाना सबसे बड़ी भूल है — जो व्यक्ति अल्लाह को छोड़कर किसी और (चाहे वह इंसान हो या जिन्न) को अपना मार्गदर्शक बनाता है, वह गुमराही की ओर बढ़ता है।
- सबसे खतरनाक स्थिति वह है जब इंसान गुमराह हो और उसे अपनी गुमराही का एहसास ही न हो, बल्कि वह खुद को हिदायत पर समझे। इसलिए हमें अपने अकीदे और अमल की लगातार जाँच करते रहना चाहिए।
- यह आयत हमें अल्लाह के दीन से जुड़ने की तरगीब देती है, क्योंकि अल्लाह ही वह है जो सच्चा मार्गदर्शक है, और उसकी किताब (कुरआन) और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत ही सच्चे रास्ते की रोशनी हैं।
- इंसान को अपने ज्ञान पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि बहुत से लोग ज्ञान का दावा करते हुए भी सच्चाई से दूर रहते हैं — सच्ची हिदायत वही है जो अल्लाह की रहमत और उसके रसूल के अनुसरण से मिलती है।
📜 आयत 28-32 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 30
सूरा अल-आराफ आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसी तरह फिर (दोबारा) ज़िन्दा किये जाओगे उसी ने एक…सूरा आयत 30/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


