अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْقِسْطِ: न्याय, इंसाफ़
- وَأَقِيمُوا وُجُوهَكُمْ: अपने चेहरे को सीधा रखो, यानी इबादत के लिए रुख करो
- عِندَ كُلِّ مَسْجِدٍ: हर मस्जिद के पास, यानी हर नमाज़ के समय
- مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ: अल्लाह के लिए दीन (इबादत) को खालिस करके
- كَمَا بَدَأَكُمْ تَعُودُونَ: जैसे उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, उसी तरह तुम (उसकी ओर) लौटोगे
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मेरे रब ने न्याय और इंसाफ़ का हुक्म दिया है। वह कभी बुराई, अश्लीलता और अन्याय का हुक्म नहीं देता। उसने तो सिर्फ अच्छाई, भलाई और न्याय का आदेश दिया है। फिर आप उन्हें बताइए कि अल्लाह ने यह भी हुक्म दिया है कि जब भी तुम इबादत करो, हर मस्जिद में अपने चेहरे को सीधा रखो, यानी पूरी तन्मयता और एकाग्रता के साथ अल्लाह की ओर रुख करो। अपनी नमाज़ें अदा करो, चाहे तुम कहीं भी हो, काबा की तरफ मुंह करके।
और अल्लाह से दुआ करो, उसे पुकारो, लेकिन इस शर्त के साथ कि तुम अपने दीन और इबादत को सिर्फ उसी के लिए खालिस कर लो। किसी को उसका साझी न बनाओ, किसी बुत या मूर्ति को उसका भागीदार न ठहराओ। तुम्हारी नमाज़, तुम्हारी दुआ, तुम्हारी कुर्बानी — सब कुछ सिर्फ अल्लाह ही के लिए हो।
फिर अल्लाह तआला उन लोगों को याद दिलाता है जो आख़िरत और दोबारा जी उठने का इनकार करते हैं। वह फ़रमाता है: जिस तरह अल्लाह ने तुम्हें पहली बार पैदा किया, उसी तरह वह तुम्हें दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा। जो ताकत तुम्हें पहली बार पैदा कर सकती है, वही ताकत तुम्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। यह कोई मुश्किल काम नहीं है। जिसने कुछ नहीं होने से पैदा किया, वह मरने के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह सक्षम है।
तो ऐ इंसान! जब तुम जानते हो कि तुम्हें अल्लाह के सामने हाज़िर होना है, और वह तुम्हारे हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब लेगा, तो क्यों न तुम अपनी ज़िंदगी को न्याय, ईमान और अच्छाई पर बनाओ? क्यों न तुम अपनी हर इबादत को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस करो? यही तुम्हारी कामयाबी का रास्ता है। यही वह रास्ता है जो तुम्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाएगा। याद रखो, जो लोग अल्लाह के सामने खड़े होने पर ईमान रखते हैं और नेक अमल करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम है, और जो लोग उसका इनकार करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा।
📜 आयत 27-31 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 29
सूरा अल-आराफ आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरे परवरदिगार ने तो…सूरा आयत 29/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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