अल-आराफ · 29/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قُلْ أَمَرَ رَبِّي بِالْقِسْطِ ۖ وَأَقِيمُوا وُجُوهَكُمْ عِندَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَادْعُوهُ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ ۚ كَمَا بَدَأَكُمْ تَعُودُونَ ۝٢٩
Qul amara Rabbee bilqisti wa aqeemoo wujoohakum `inda kulli masjidin wad`oohu mukhliseena lahud deen; kamaa bada akum ta`oodoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरे परवरदिगार ने तो इन्साफ का हुक्म दिया है और (ये भी क़रार दिया है कि) हर नमाज़ के वक्त अपने अपने मुँह (क़िबले की तरफ़) सीधे कर लिया करो और इसके लिए निरी खरी इबादत करके उससे दुआ मांगो जिस तरह उसने तुम्हें शुरू शुरू पैदा किया था
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْقِسْطِ: न्याय, इंसाफ़
  • وَأَقِيمُوا وُجُوهَكُمْ: अपने चेहरे को सीधा रखो, यानी इबादत के लिए रुख करो
  • عِندَ كُلِّ مَسْجِدٍ: हर मस्जिद के पास, यानी हर नमाज़ के समय
  • مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ: अल्लाह के लिए दीन (इबादत) को खालिस करके
  • كَمَا بَدَأَكُمْ تَعُودُونَ: जैसे उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, उसी तरह तुम (उसकी ओर) लौटोगे

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मेरे रब ने न्याय और इंसाफ़ का हुक्म दिया है। वह कभी बुराई, अश्लीलता और अन्याय का हुक्म नहीं देता। उसने तो सिर्फ अच्छाई, भलाई और न्याय का आदेश दिया है। फिर आप उन्हें बताइए कि अल्लाह ने यह भी हुक्म दिया है कि जब भी तुम इबादत करो, हर मस्जिद में अपने चेहरे को सीधा रखो, यानी पूरी तन्मयता और एकाग्रता के साथ अल्लाह की ओर रुख करो। अपनी नमाज़ें अदा करो, चाहे तुम कहीं भी हो, काबा की तरफ मुंह करके।

और अल्लाह से दुआ करो, उसे पुकारो, लेकिन इस शर्त के साथ कि तुम अपने दीन और इबादत को सिर्फ उसी के लिए खालिस कर लो। किसी को उसका साझी न बनाओ, किसी बुत या मूर्ति को उसका भागीदार न ठहराओ। तुम्हारी नमाज़, तुम्हारी दुआ, तुम्हारी कुर्बानी — सब कुछ सिर्फ अल्लाह ही के लिए हो।

फिर अल्लाह तआला उन लोगों को याद दिलाता है जो आख़िरत और दोबारा जी उठने का इनकार करते हैं। वह फ़रमाता है: जिस तरह अल्लाह ने तुम्हें पहली बार पैदा किया, उसी तरह वह तुम्हें दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा। जो ताकत तुम्हें पहली बार पैदा कर सकती है, वही ताकत तुम्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। यह कोई मुश्किल काम नहीं है। जिसने कुछ नहीं होने से पैदा किया, वह मरने के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह सक्षम है।

तो ऐ इंसान! जब तुम जानते हो कि तुम्हें अल्लाह के सामने हाज़िर होना है, और वह तुम्हारे हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब लेगा, तो क्यों न तुम अपनी ज़िंदगी को न्याय, ईमान और अच्छाई पर बनाओ? क्यों न तुम अपनी हर इबादत को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस करो? यही तुम्हारी कामयाबी का रास्ता है। यही वह रास्ता है जो तुम्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाएगा। याद रखो, जो लोग अल्लाह के सामने खड़े होने पर ईमान रखते हैं और नेक अमल करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम है, और जो लोग उसका इनकार करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-आराफ

27يَا بَنِي آدَمَ لَا يَفْتِنَنَّكُمُ الشَّيْطَانُ كَمَا أَخْرَجَ أَبَوَيْكُم مِّنَ الْجَنَّةِ يَنزِعُ عَنْهُمَا لِبَاسَهُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوْآتِهِمَا ۗ إِنَّهُ يَرَاكُمْ هُوَ وَقَبِيلُهُ مِنْ حَيْثُ لَا تَرَوْنَهُمْ ۗ إِنَّا جَعَلْنَا الشَّيَاطِينَ أَوْلِيَاءَ لِلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ
ताकि लोग नसीहत व इबरत हासिल करें ऐ औलादे आदम (होशियार रहो) कहीं तुम्हें शैतान बहका न दे जिस तरह उसने तुम्हारे बाप माँ आदम व हव्वा को बेहश्त से निकलवा छोड़ा उसी ने उन दोनों से (बेहश्ती) पोशाक उतरवाई ताकि उन दोनों को उनकी शर्मगाहें दिखा दे वह और उसका क़ुनबा ज़रूर तुम्हें इस तरह देखता रहता है कि तुम उन्हे नहीं देखने पाते हमने शैतानों को उन्हीं लोगों का रफीक़ क़रार दिया है
28وَإِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً قَالُوا وَجَدْنَا عَلَيْهَا آبَاءَنَا وَاللَّهُ أَمَرَنَا بِهَا ۗ قُلْ إِنَّ اللَّهَ لَا يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ ۖ أَتَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
जो ईमान नही रखते और वह लोग जब कोई बुरा काम करते हैं कि हमने उस तरीके पर अपने बाप दादाओं को पाया और ख़ुदा ने (भी) यही हुक्म दिया है (ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि ख़ुदा ने (भी) यही हुक्म दिया है (ऐ रसूल) तुम (साफ) कह दो कि ख़ुदा हरगिज़ बुरे काम का हुक्म नहीं देता क्या तुम लोग ख़ुदा पर (इफ्तिरा करके) वह बातें कहते हो जो तुम नहीं जानते
29قُلْ أَمَرَ رَبِّي بِالْقِسْطِ ۖ وَأَقِيمُوا وُجُوهَكُمْ عِندَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَادْعُوهُ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ ۚ كَمَا بَدَأَكُمْ تَعُودُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरे परवरदिगार ने तो इन्साफ का हुक्म दिया है और (ये भी क़रार दिया है कि) हर नमाज़ के वक्त अपने अपने मुँह (क़िबले की तरफ़) सीधे कर लिया करो और इसके लिए निरी खरी इबादत करके उससे दुआ मांगो जिस तरह उसने तुम्हें शुरू शुरू पैदा किया था
30فَرِيقًا هَدَىٰ وَفَرِيقًا حَقَّ عَلَيْهِمُ الضَّلَالَةُ ۗ إِنَّهُمُ اتَّخَذُوا الشَّيَاطِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ اللَّهِ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَ
उसी तरह फिर (दोबारा) ज़िन्दा किये जाओगे उसी ने एक फरीक़ की हिदायत की और एक गिरोह (के सर) पर गुमराही सवार हो गई उन लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर शैतानों को अपना सरपरस्त बना लिया और बावजूद उसके गुमराह करते हैं कि वह राह रास्ते पर है
31۞ يَا بَنِي آدَمَ خُذُوا زِينَتَكُمْ عِندَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَكُلُوا وَاشْرَبُوا وَلَا تُسْرِفُوا ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْرِفِينَ
ऐ औलाद आदम हर नमाज़ के वक्त बन सवर के निखर जाया करो और खाओ और पियो और फिज़ूल ख़र्ची मत करो (क्योंकि) ख़ुदा फिज़ूल ख़र्च करने वालों को दोस्त नहीं रखता
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अनुवाद — अल-आराफ 29

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Tuesday, August 18, 2026

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