अल-आराफ · 71/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ رِجْسٌ وَغَضَبٌ ۖ أَتُجَادِلُونَنِي فِي أَسْمَاءٍ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا نَزَّلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ ۝٧١
Qaala qad waqa`a alaikum mir Rabbikum rijsunw wa ghadab, atujaadiloonanee feee asmaaa`in sammaitumoohaaa antum wa aabaaa`ukum maa nazzalal laahu bihaa min sultaan; fantazirooo innee ma`akum minal muntazireen
📖 हिंदी अर्थ
हूद ने जवाब दिया (कि बस समझ लो) कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर अज़ाब और ग़ज़ब नाज़िल हो चुका क्या तुम मुझसे चन्द (बुतो के फर्ज़ी) नामों के बारे में झगड़ते हो जिनको तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने (ख्वाहमख्वाह) गढ़ लिए हैं हालाकि ख़ुदा ने उनके लिए कोई सनद नहीं नाज़िल की पस तुम ( अज़ाबे ख़ुदा का) इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ मुन्तिज़र हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رِجْسٌ: अज़ाब, यातना, या गंदगी और अपवित्रता।
  • غَضَبٌ: क्रोध, प्रकोप।
  • سُلْطَانٌ: प्रमाण, तर्क, या अधिकार।

व्याख्या:

हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को जवाब देते हुए कहा: "तुम पर तुम्हारे रब की ओर से यातना और क्रोध सिद्ध हो चुका है, और यह अवश्य तुम पर आकर रहेगा। क्या तुम मुझसे उन नामों के बारे में झगड़ रहे हो जिन्हें तुमने और तुम्हारे बाप-दादों ने खुद गढ़ लिया है—यानी उन्हें 'पूज्य' और 'देवता' का नाम दे दिया है—जबकि अल्लाह ने उनके लिए कोई प्रमाण या साक्ष्य नाज़िल नहीं किया? वे तो बस नाम हैं, जिनके पीछे कोई हक़ीक़त नहीं। असली पूज्य तो केवल अल्लाह है, जो सृष्टि का रचयिता है। वे मूर्तियाँ न नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न फ़ायदा।"

फिर आपने उन्हें चुनौती देते हुए कहा: "तो अब तुम उस अज़ाब का इंतज़ार करो जिसे तुम जल्दी माँग रहे थे। मैं भी तुम्हारे साथ उसके आने का इंतज़ार कर रहा हूँ।" यह एक सख्त चेतावनी और धमकी थी, जो उनके अविश्वास और हठधर्मिता के जवाब में दी गई।

फ़ायदे और सबक:

  1. अल्लाह के नबी अपनी क़ौम को सच्चाई बताने में कोई समझौता नहीं करते, चाहे सामने कितना भी विरोध क्यों न हो।
  2. बातिल (असत्य) के पास कोई ठोस प्रमाण नहीं होता; वह सिर्फ़ नामों और परंपराओं के सहारे चलता है। सच्चाई की कसौटी अल्लाह की नाज़िल की हुई हिदायत है।
  3. नबियों का अंदाज़-ए-ख़िताब साफ़ और बेबाक होता है—वे लोगों को खुश करने के लिए सच्चाई नहीं छिपाते।
  4. अल्लाह का अज़ाब उस क़ौम पर आकर रहता है जो हक़ को नकारने और नबियों को झुठलाने पर अड़ी रहे। यह हर ज़माने के लिए एक चेतावनी है।
  5. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हम अपने जीवन में सिर्फ़ अल्लाह के दिए हुए प्रमाणों और उसकी शिक्षाओं को ही आधार बनाएँ, न कि अपनी मन-घड़त परंपराओं को।


📜 आयत 69-73 — अल-आराफ

69أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَاءَكُمْ ذِكْرٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْ ۚ وَاذْكُرُوا إِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَاءَ مِن بَعْدِ قَوْمِ نُوحٍ وَزَادَكُمْ فِي الْخَلْقِ بَسْطَةً ۖ فَاذْكُرُوا آلَاءَ اللَّهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
क्या तुम्हें इस पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म तुम्हारे पास तुम्ही में एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से (आया) कि तुम्हें (अजाब से) डराए और (वह वक्त) याद करो जब उसने तुमको क़ौम नूह के बाद ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हारी ख़िलाफ़त में भी बहुत ज्यादती कर दी तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो ताकि तुम दिली मुरादे पाओ
70قَالُوا أَجِئْتَنَا لِنَعْبُدَ اللَّهَ وَحْدَهُ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُنَا ۖ فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ
71قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ رِجْسٌ وَغَضَبٌ ۖ أَتُجَادِلُونَنِي فِي أَسْمَاءٍ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا نَزَّلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ
हूद ने जवाब दिया (कि बस समझ लो) कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर अज़ाब और ग़ज़ब नाज़िल हो चुका क्या तुम मुझसे चन्द (बुतो के फर्ज़ी) नामों के बारे में झगड़ते हो जिनको तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने (ख्वाहमख्वाह) गढ़ लिए हैं हालाकि ख़ुदा ने उनके लिए कोई सनद नहीं नाज़िल की पस तुम ( अज़ाबे ख़ुदा का) इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ मुन्तिज़र हूँ
72فَأَنجَيْنَاهُ وَالَّذِينَ مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَقَطَعْنَا دَابِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۖ وَمَا كَانُوا مُؤْمِنِينَ
आख़िर हमने उनको और जो लोग उनके साथ थे उनको अपनी रहमत से नजात दी और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था हमने उनकी जड़ काट दी और वह लोग ईमान लाने वाले थे भी नहीं
73وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَالِحًا ۗ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ قَدْ جَاءَتْكُم بَيِّنَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ هَٰذِهِ نَاقَةُ اللَّهِ لَكُمْ آيَةً ۖ فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِي أَرْضِ اللَّهِ ۖ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और (हमने क़ौम) समूद की तरफ उनके भाई सालेह को रसूल बनाकर भेजा तो उन्होनें (उन लोगों से कहा) ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की इबादत करो और उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं है तुम्हारे पास तो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाज़ेए और रौशन दलील आ चुकी है ये ख़ुदा की भेजी हुई ऊँटनी तुम्हारे वास्ते एक मौजिज़ा है तो तुम लोग उसको छोड़ दो कि ख़ुदा की ज़मीन में जहाँ चाहे चरती फिरे और उसे कोई तकलीफ़ ना पहुंचाओ वरना तुम दर्दनाक अज़ाब में गिरफ्तार हो जाआगे
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71आयत

अनुवाद — अल-आराफ 71

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Tuesday, August 18, 2026

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