Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَجِئْتَنَا: क्या तू हमारे पास आया है?
- نَذَرَ: हम छोड़ दें।
- آبَاؤُنَا: हमारे बाप-दादा।
- فَأْتِنَا: तो हमारे पास ले आ।
- بِمَا تَعِدُنَا: उस चीज़ को जिसकी तू हमें धमकी देता है (अर्थात अज़ाब)।
- الصَّادِقِينَ: सच बोलने वालों में से।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम 'आद' को अल्लाह की इबादत की दावत दी और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उनकी क़ौम ने अहंकार और उपहास के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "ऐ हूद! क्या तू इसलिए हमारे पास आया है कि हम सिर्फ़ अकेले अल्लाह की इबादत करें और उन माबूदों को छोड़ दें जिनकी हमारे बाप-दादा इबादत करते आए हैं? यह बात हमें कतई मंज़ूर नहीं। और अगर तू सच्चा है, तो जिस अज़ाब की तू हमें धमकी देता है, उसे हमारे ऊपर ले आ।"
यह जवाब उनके हठधर्मी, अंधी परंपरा की पैरवी और नबी के मुक़ाबले में उपहास का स्पष्ट प्रमाण था। उन्होंने न तो दलील सुनी, न सोच-विचार किया, बल्कि सिर्फ़ इसलिए सच को ठुकरा दिया क्योंकि यह उनके पूर्वजों के रास्ते के ख़िलाफ़ था। उन्होंने अज़ाब की जल्दी माँगी, जो उनके अविश्वास और अकड़ की आख़िरी मंज़िल थी।
फ़ायदे (उपदेश):
- अंधी परंपरा की पैरवी इंसान को हक़ से दूर कर देती है — सिर्फ़ इसलिए कि बाप-दादा ने कुछ किया, उसे सही मान लेना और दलील को नज़रअंदाज़ कर देना, हिदायत से महरूम होने का सबसे बड़ा कारण है।
- नबियों के साथ उपहास करना किसी क़ौम के लिए हलाकत का ज़रिया बनता है — जब इंसान सच्चे दावत देने वाले का मज़ाक उड़ाता है, तो वह अपने लिए रहमत के दरवाज़े बंद कर लेता है और अज़ाब का सामान करता है।
- अज़ाब की जल्दी माँगना बुरा अंजाम देता है — क़ौमों ने जब नबियों से अज़ाब की जल्दी माँगी, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर ऐसे आया कि उन्हें मौका-ए-तौबा भी न मिला। मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत की तरफ़ दौड़े, अज़ाब की तरफ़ नहीं।
- तौहीद (अल्लाह की एकता) हर नबी की दावत का केंद्र बिंदु है — हज़रत हूद से लेकर हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक, हर नबी ने सबसे पहले यही पुकारा कि अल्लाह को अकेला मानो और उसके सिवा किसी की इबादत मत करो। यही इंसान की कामयाबी और निजात की कुंजी है।
📜 आयत 68-72 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 70
सूरा अल-आराफ आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए…सूरा आयत 70/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 68–72. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 11, 2026
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