Qaalooo aji`tanaa lina`budal laaha wahdahoo wa nazara maa kaana ya`budu aabaaa`u naa faatinaa bimaa ta`idunaaa in kunta minas saadiqeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
وہ کہنے لگے کہ تم ہمارے پاس اس لیے آئے ہو کہ ہم اکیلے خدا ہی کی عبادت کریں۔ اور جن کو ہمارے باپ دادا پوجتے چلے آئے ہیں ان کو چھوڑ دیں؟ تو اگر سچے ہو تو جس چیز سے ہمیں ڈراتے ہو اسے لے آؤ
بِمَا تَعِدُنَا: उस चीज़ को जिसकी तू हमें धमकी देता है (अर्थात अज़ाब)।
الصَّادِقِينَ: सच बोलने वालों में से।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम 'आद' को अल्लाह की इबादत की दावत दी और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उनकी क़ौम ने अहंकार और उपहास के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "ऐ हूद! क्या तू इसलिए हमारे पास आया है कि हम सिर्फ़ अकेले अल्लाह की इबादत करें और उन माबूदों को छोड़ दें जिनकी हमारे बाप-दादा इबादत करते आए हैं? यह बात हमें कतई मंज़ूर नहीं। और अगर तू सच्चा है, तो जिस अज़ाब की तू हमें धमकी देता है, उसे हमारे ऊपर ले आ।"
यह जवाब उनके हठधर्मी, अंधी परंपरा की पैरवी और नबी के मुक़ाबले में उपहास का स्पष्ट प्रमाण था। उन्होंने न तो दलील सुनी, न सोच-विचार किया, बल्कि सिर्फ़ इसलिए सच को ठुकरा दिया क्योंकि यह उनके पूर्वजों के रास्ते के ख़िलाफ़ था। उन्होंने अज़ाब की जल्दी माँगी, जो उनके अविश्वास और अकड़ की आख़िरी मंज़िल थी।
फ़ायदे (उपदेश):
अंधी परंपरा की पैरवी इंसान को हक़ से दूर कर देती है — सिर्फ़ इसलिए कि बाप-दादा ने कुछ किया, उसे सही मान लेना और दलील को नज़रअंदाज़ कर देना, हिदायत से महरूम होने का सबसे बड़ा कारण है।
नबियों के साथ उपहास करना किसी क़ौम के लिए हलाकत का ज़रिया बनता है — जब इंसान सच्चे दावत देने वाले का मज़ाक उड़ाता है, तो वह अपने लिए रहमत के दरवाज़े बंद कर लेता है और अज़ाब का सामान करता है।
अज़ाब की जल्दी माँगना बुरा अंजाम देता है — क़ौमों ने जब नबियों से अज़ाब की जल्दी माँगी, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर ऐसे आया कि उन्हें मौका-ए-तौबा भी न मिला। मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत की तरफ़ दौड़े, अज़ाब की तरफ़ नहीं।
तौहीद (अल्लाह की एकता) हर नबी की दावत का केंद्र बिंदु है — हज़रत हूद से लेकर हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक, हर नबी ने सबसे पहले यही पुकारा कि अल्लाह को अकेला मानो और उसके सिवा किसी की इबादत मत करो। यही इंसान की कामयाबी और निजात की कुंजी है।
तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ
क्या तुम्हें इस पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म तुम्हारे पास तुम्ही में एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से (आया) कि तुम्हें (अजाब से) डराए और (वह वक्त) याद करो जब उसने तुमको क़ौम नूह के बाद ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हारी ख़िलाफ़त में भी बहुत ज्यादती कर दी तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो ताकि तुम दिली मुरादे पाओ
तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ
हूद ने जवाब दिया (कि बस समझ लो) कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर अज़ाब और ग़ज़ब नाज़िल हो चुका क्या तुम मुझसे चन्द (बुतो के फर्ज़ी) नामों के बारे में झगड़ते हो जिनको तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने (ख्वाहमख्वाह) गढ़ लिए हैं हालाकि ख़ुदा ने उनके लिए कोई सनद नहीं नाज़िल की पस तुम ( अज़ाबे ख़ुदा का) इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ मुन्तिज़र हूँ
आख़िर हमने उनको और जो लोग उनके साथ थे उनको अपनी रहमत से नजात दी और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था हमने उनकी जड़ काट दी और वह लोग ईमान लाने वाले थे भी नहीं
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