अल-आराफ · 72/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
فَأَنجَيْنَاهُ وَالَّذِينَ مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَقَطَعْنَا دَابِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۖ وَمَا كَانُوا مُؤْمِنِينَ ۝٧٢
Fa anjainaahu wallazeena ma`ahoo birahmatim minnaa wa qata`naa daabiral lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wa maa kaanoo mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
आख़िर हमने उनको और जो लोग उनके साथ थे उनको अपनी रहमत से नजात दी और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था हमने उनकी जड़ काट दी और वह लोग ईमान लाने वाले थे भी नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَنجَيْنَاهُ: हमने उसे (हूद अलैहिस्सलाम को) बचा लिया।
  • بِرَحْمَةٍ مِّنَّا: अपनी ओर से विशेष दया और कृपा से।
  • وَقَطَعْنَا دَابِرَ: हमने जड़ काट दी, यानी पूरी तरह सत्यानाश कर दिया।
  • دَابِرَ: पिछला हिस्सा, जड़, अंतिम व्यक्ति तक।

विस्तृत तफसीर:

जब हूद अलैहिस्सलाम की कौम ने हठ और अहंकार पर अड़े रहकर अल्लाह की आयतों को झुठलाया और अपने नबी की नसीहत को ठुकरा दिया, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पहुँचा। एक ऐसी तेज़ और बेरहम हवा चली जिसने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया। उस विनाशकारी आपदा में अल्लाह ने अपने नबी हूद और उनके साथ के ईमानवालों को अपनी विशेष रहमत से बचा लिया। यह बचाव किसी योग्यता या ताकत का नतीजा नहीं था, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक ख़ास एहसान और दया थी, जो उसने सिर्फ़ अपने मोमिन बंदों पर किया।

फिर अल्लाह ने उन झुठलानेवालों की जड़ काट दी — यानी उनमें से कोई भी ज़िंदा नहीं बचा, न बूढ़ा, न जवान, न कोई सरदार, न कोई कमज़ोर। उनका नामोनिशान तक मिट गया। इसका कारण सिर्फ़ यह था कि वे अल्लाह की आयतों को झुठलाते थे और ईमान नहीं लाते थे। उनके दिलों में सच्चाई के लिए कोई जगह नहीं थी, और उनका अंजाम यही था कि वे अल्लाह के अज़ाब का शिकार हो जाएँ।

इस आयत में एक बहुत बड़ी सीख है — नजात (मुक्ति) का सही रास्ता सिर्फ़ अल्लाह पर ईमान और उसकी आयतों को मानना है। जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुसीबत से निकाल लेता है, चाहे वह मुसीबत कितनी ही भयानक क्यों न हो। और जो लोग सच्चाई को ठुकराते हैं और अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम विनाश के सिवा कुछ नहीं होता।

यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह की रहमत उसके नेक बंदों के साथ है, और उसका अज़ाब उन लोगों के लिए है जो हक़ का इनकार करते हैं। आज भी यही क़ानून है — जो अल्लाह की तरफ़ रुजू करेगा, अल्लाह उसे बचाएगा; और जो उससे मुँह मोड़ेगा, उसे कहीं पनाह नहीं मिलेगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में ईमान और अच्छे कर्मों को अपनाएँ, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 70-74 — अल-आराफ

70قَالُوا أَجِئْتَنَا لِنَعْبُدَ اللَّهَ وَحْدَهُ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُنَا ۖ فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ
71قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ رِجْسٌ وَغَضَبٌ ۖ أَتُجَادِلُونَنِي فِي أَسْمَاءٍ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا نَزَّلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ
हूद ने जवाब दिया (कि बस समझ लो) कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर अज़ाब और ग़ज़ब नाज़िल हो चुका क्या तुम मुझसे चन्द (बुतो के फर्ज़ी) नामों के बारे में झगड़ते हो जिनको तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने (ख्वाहमख्वाह) गढ़ लिए हैं हालाकि ख़ुदा ने उनके लिए कोई सनद नहीं नाज़िल की पस तुम ( अज़ाबे ख़ुदा का) इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ मुन्तिज़र हूँ
72فَأَنجَيْنَاهُ وَالَّذِينَ مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَقَطَعْنَا دَابِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۖ وَمَا كَانُوا مُؤْمِنِينَ
आख़िर हमने उनको और जो लोग उनके साथ थे उनको अपनी रहमत से नजात दी और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था हमने उनकी जड़ काट दी और वह लोग ईमान लाने वाले थे भी नहीं
73وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَالِحًا ۗ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ قَدْ جَاءَتْكُم بَيِّنَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ هَٰذِهِ نَاقَةُ اللَّهِ لَكُمْ آيَةً ۖ فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِي أَرْضِ اللَّهِ ۖ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और (हमने क़ौम) समूद की तरफ उनके भाई सालेह को रसूल बनाकर भेजा तो उन्होनें (उन लोगों से कहा) ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की इबादत करो और उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं है तुम्हारे पास तो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाज़ेए और रौशन दलील आ चुकी है ये ख़ुदा की भेजी हुई ऊँटनी तुम्हारे वास्ते एक मौजिज़ा है तो तुम लोग उसको छोड़ दो कि ख़ुदा की ज़मीन में जहाँ चाहे चरती फिरे और उसे कोई तकलीफ़ ना पहुंचाओ वरना तुम दर्दनाक अज़ाब में गिरफ्तार हो जाआगे
74وَاذْكُرُوا إِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَاءَ مِن بَعْدِ عَادٍ وَبَوَّأَكُمْ فِي الْأَرْضِ تَتَّخِذُونَ مِن سُهُولِهَا قُصُورًا وَتَنْحِتُونَ الْجِبَالَ بُيُوتًا ۖ فَاذْكُرُوا آلَاءَ اللَّهِ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और वह वक्त याद करो जब उसने तुमको क़ौम आद के बाद (ज़मीन में) ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हें ज़मीन में इस तरह बसाया कि तुम हमवार व नरम ज़मीन में (बड़े-बड़े) महल उठाते हो और पहाड़ों को तराश के घर बनाते हो तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो और रूए ज़मीन में फसाद न करते फिरो
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
72आयत

अनुवाद — अल-आराफ 72

सूरा अल-आराफ आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : आख़िर हमने उनको और जो लोग उनके साथ थे उनको…

सूरा आयत 72/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए