अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَفَّتْ مَوَازِينُهُ: उसके तराजू (नेकी के पलड़े) हल्के हो गए, यानी उसकी बुराइयाँ उसकी अच्छाइयों पर भारी पड़ गईं।
- خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ: उन्होंने अपने आप को घाटे में डाल दिया, यानी अपनी आत्मा को विनाश और हानि के हवाले कर दिया।
- يَظْلِمُونَ: अत्याचार करना, हद से बढ़ना, यहाँ अर्थ है आयतों को झुठलाना और उनके साथ कुफ्र (इनकार) करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला क़ियामत के दिन के उस हाल का वर्णन कर रहे हैं जब हर इंसान के अच्छे और बुरे कर्म तोले जाएँगे। जिस व्यक्ति के तराजू में उसकी बुराइयाँ और गुनाह भारी होंगे और उसकी नेकियाँ हल्की पड़ जाएँगी, वही व्यक्ति सबसे बड़ा घाटे में रहेगा। यह घाटा दुनिया के किसी व्यापारिक घाटे जैसा नहीं, बल्कि इससे कहीं बड़ा है—वह अपनी आत्मा को ही खो देगा, यानी अपने आप को जहन्नुम की आग और अल्लाह की नाराज़गी का शिकार बना लेगा।
इस घाटे का कारण स्पष्ट किया गया है: वे अल्लाह की आयतों (क़ुरआन, नबियों के संदेश, और ब्रह्मांड के संकेतों) के साथ ज़ुल्म करते थे। उनका ज़ुल्म यह था कि वे इन आयतों को झुठलाते थे, इन पर विश्वास नहीं करते थे, और इनके सामने झुकने से इनकार कर देते थे। उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे नकारा और अपनी ज़िद और अहंकार की वजह से हक़ को कुचला। यही उनकी हार और विनाश का असली कारण बना।
फ़ायदे (सबक):
- कर्मों का तोलना हक़ीक़त है: क़ियामत के दिन हर अच्छे और बुरे काम को तोला जाएगा। यह विश्वास इंसान को अपने आमाल (कर्मों) के प्रति सचेत करता है कि वह दुनिया में जो कुछ भी करता है, उसका हिसाब ज़रूर होगा।
- असली घाटा आत्मा का घाटा है: दुनिया में धन, संपत्ति या पद का नुक़सान बड़ा लगता है, लेकिन असली घाटा वह है जब इंसान अपनी आत्मा को अल्लाह की रहमत से महरूम कर ले। यह सबसे बड़ी हानि है।
- आयतों के साथ ज़ुल्म से बचना: अल्लाह की आयतों के साथ ज़ुल्म यानी उन्हें झुठलाना, उनका मज़ाक उड़ाना, या उन पर अमल न करना—यह सब इंसान को विनाश की ओर ले जाता है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि क़ुरआन और अल्लाह के संदेशों का सम्मान करे, उन पर विश्वास रखे और उन पर अमल करे।
- नेकियों की कमी का अंदेशा: यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अपनी नेकियों को ज़्यादा करें और गुनाहों से बचें, क्योंकि क़ियामत के दिन सिर्फ़ वही काम आएगा जो हमने अल्लाह के लिए किया होगा। यह इंसान को अच्छे कर्मों की तरफ़ राग़िब करती है और बुराइयों से दूर रहने की तरग़ीब देती है।
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: इस आयत के साथ पिछली आयत (जिसमें भारी तराजू वालों का ज़िक्र है) मिलकर यह सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बहुत विस्तृत है, लेकिन उसके लिए ईमान और नेक अमल ज़रूरी है। जो लोग अपने गुनाहों से तौबा कर लें और अल्लाह की ओर लौट आएँ, उनके लिए माफ़ी और कामयाबी का रास्ता खुला है।
📜 आयत 7-11 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 9
सूरा अल-आराफ आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और जिनके नेक अमाल के) पल्ले हलके होगें तो उन्हीं…सूरा आयत 9/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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