अल-आराफ · 8/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَالْوَزْنُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ ۚ فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ۝٨
Walwaznu Yawma`izinil haqq; faman saqulat mawaa zeenuhoo fa-ulaaa`ika humul muflihoon
📖 हिंदी अर्थ
और हम कुछ ग़ायब तो थे नहीं और उस दिन (आमाल का) तौला जाना बिल्कुल ठीक है फिर तो जिनके (नेक अमाल के) पल्ले भारी होगें तो वही लोग फायज़ुलहराम (नजात पाये हुए) होगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْوَزْنُ (अल-वज़्न): तौलना, यहाँ अर्थ है कर्मों का तौला जाना।
  • مَوَازِينُهُ (मवाज़ीनुहु): उसके तराजू (मीज़ान), यानी नेकियों और गुनाहों को तौलने वाला पलड़ा।
  • الْمُفْلِحُونَ (अल-मुफ़्लिहून): कामयाब होने वाले, सफलता पाने वाले, जिन्हें मनचाहा मिले और नापसंद से बचाव हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़ियामत के दिन अल्लाह तआला अपने बंदों के आमाल (कर्मों) को पूरे इंसाफ़ और अदल के साथ तौलेगा। उस दिन कोई ज़ुल्म नहीं होगा, न किसी का हक़ मारा जाएगा। हर इंसान के लिए एक अलग मीज़ान (तराजू) होगा, जिसमें उसके नेक और बुरे आमाल तौले जाएँगे। यह तौलना एक हक़ीक़ी (वास्तविक) क्रिया होगी, जिसे अल्लाह ही बेहतर जानता है कि किस तरह होगी, लेकिन इसका अंजाम यक़ीनी है।

जिस शख्स के नेक आमाल का पलड़ा भारी होगा और उसकी अच्छाइयाँ उसकी बुराइयों पर ग़ालिब आ जाएँगी, वही लोग सच्ची कामयाबी पाने वाले हैं। वे जहन्नुम के अज़ाब से बच जाएँगे और जन्नत की नेमतों से नवाज़े जाएँगे। यही असली फलाह (सफलता) है, जो दुनिया की किसी कामयाबी से बड़ी है।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल कामिल है। दुनिया में चाहे जो भी नाइंसाफ़ी हो, आख़िरत में हर किसी को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा। यह दिल को सुकून देता है कि अल्लाह किसी का हक़ नहीं मारेगा।
  2. हमें अपने आमाल की फ़िक्र करनी चाहिए, क्योंकि असली कामयाबी दुनिया की दौलत या शोहरत में नहीं, बल्कि उस दिन के मीज़ान में है। जो आज अपनी नेकियाँ बढ़ाएगा, वही कल कामयाब होगा।
  3. यह आयत हमें अच्छे कामों की तरफ़ रग़बत देती है और बुरे कामों से डराती है। अगर हम जान लें कि हर छोटा-बड़ा अमल तौला जाएगा, तो हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालने की कोशिश करेंगे।
  4. इस आयत से मुसलमान को उम्मीद मिलती है कि अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ के साथ, उसकी नेकियाँ अगर सच्चे दिल से की गई हों, तो वे उसके काम आएँगी। यह ईमान को मज़बूत करता है और अमल की तरफ़ प्रेरित करता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — अल-आराफ

6فَلَنَسْأَلَنَّ الَّذِينَ أُرْسِلَ إِلَيْهِمْ وَلَنَسْأَلَنَّ الْمُرْسَلِينَ
फिर हमने तो ज़रूर उन लोगों से जिनकी तरफ पैग़म्बर भेजे गये थे (हर चीज़ का) सवाल करेगें और ख़ुद पैग़म्बरों से भी ज़रूर पूछेगें
7فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِم بِعِلْمٍ ۖ وَمَا كُنَّا غَائِبِينَ
फिर हम उनसे हक़ीक़त हाल ख़ूब समझ बूझ के (ज़रा ज़रा) दोहराएगें
8وَالْوَزْنُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ ۚ فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
और हम कुछ ग़ायब तो थे नहीं और उस दिन (आमाल का) तौला जाना बिल्कुल ठीक है फिर तो जिनके (नेक अमाल के) पल्ले भारी होगें तो वही लोग फायज़ुलहराम (नजात पाये हुए) होगें
9وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُم بِمَا كَانُوا بِآيَاتِنَا يَظْلِمُونَ
(और जिनके नेक अमाल के) पल्ले हलके होगें तो उन्हीं लोगों ने हमारी आयत से नाफरमानी करने की वजह से यक़ीनन अपना आप नुक़सान किया
10وَلَقَدْ مَكَّنَّاكُمْ فِي الْأَرْضِ وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَايِشَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
और (ऐ बनीआदम) हमने तो यक़ीनन तुमको ज़मीन में क़ुदरत व इख़तेदार दिया और उसमें तुम्हारे लिए असबाब ज़िन्दगी मुहय्या किए (मगर) तुम बहुत ही कम शुक्र करते हो
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अनुवाद — अल-आराफ 8

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Tuesday, August 18, 2026

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