अल-आराफ · 10/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
وَلَقَدْ مَكَّنَّاكُمْ فِي الْأَرْضِ وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَايِشَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ ۝١٠
Wa laqad makkannaakum fil ardi wa ja`alnaa lakum feehaa ma`aayish; qaleelam maa tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ बनीआदम) हमने तो यक़ीनन तुमको ज़मीन में क़ुदरत व इख़तेदार दिया और उसमें तुम्हारे लिए असबाब ज़िन्दगी मुहय्या किए (मगर) तुम बहुत ही कम शुक्र करते हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَكَّنَّاكُمْ: हमने तुम्हें स्थान दिया, अधिकार दिया, या तुम्हें स्थापित किया।
  • مَعَايِشَ: जीवन-निर्वाह के साधन, जैसे भोजन, पेय, और आजीविका के अन्य स्रोत।
  • قَلِيلًا مَا تَشْكُرُونَ: तुम बहुत कम आभार व्यक्त करते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! हमने तुम्हें धरती में जगह दी और उसे तुम्हारे लिए ठहरने का स्थान बनाया। हमने तुम्हारे लिए उसमें जीवन-यापन के साधन पैदा किए — खाने-पीने की चीज़ें, पानी, खेती, जानवर, और दूसरी नेमतें — ताकि तुम अपनी ज़िंदगी गुज़ार सको। यह अल्लाह की बहुत बड़ी कृपा है कि उसने तुम्हें यह सब कुछ दिया, जबकि तुम इसके हक़दार नहीं थे। इसके बावजूद, तुम अल्लाह का शुक्र बहुत कम अदा करते हो। अधिकतर लोग इन नेमतों को भूल जाते हैं और उन्हें अपनी कमाई या किस्मत का नतीजा समझते हैं, जबकि असल में यह सब अल्लाह की देन है। यह आयत उन लोगों को भी याद दिलाती है जो मक्का और उसके आस-पास रहते थे कि अल्लाह ने उन्हें सुरक्षित और खुशहाल ज़िंदगी दी, और उन्हें चाहिए था कि वे उसका आभार जताएँ, लेकिन उन्होंने कृतघ्नता दिखाई।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की नेमतें गिनने से पता चलता है कि हम पर उसकी कितनी कृपा है — धरती, पानी, हवा, खाना, और जीवन के सभी साधन। यह हमें शुक्रगुज़ार बनाता है।
  2. शुक्र अदा करना सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अल्लाह की नेमतों को उसकी राह में इस्तेमाल करना और उसकी नाराज़गी से बचना है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी ताक़त और साधनों पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सब अल्लाह की देन है, और वही इसे छीन सकता है।
  4. कम शुक्र करना इंसान की कमज़ोरी है, लेकिन अल्लाह अपने बंदों पर मेहरबान है कि वह फिर भी उन्हें नेमतें देता रहता है। यह हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ आकर्षित करता है और उससे मुहब्बत बढ़ाता है।
  5. जब हम अपने आस-पास देखते हैं कि अल्लाह ने हमें कितनी सुविधाएँ दी हैं, तो हमें चाहिए कि हम उसकी इबादत में लगें और उसके दीन को अपनाएँ, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।


📜 आयत 8-12 — सूरा अल-आराफ

8وَالْوَزْنُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ ۚ فَمَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
और हम कुछ ग़ायब तो थे नहीं और उस दिन (आमाल का) तौला जाना बिल्कुल ठीक है फिर तो जिनके (नेक अमाल के) पल्ले भारी होगें तो वही लोग फायज़ुलहराम (नजात पाये हुए) होगें
9وَمَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ فَأُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُم بِمَا كَانُوا بِآيَاتِنَا يَظْلِمُونَ
(और जिनके नेक अमाल के) पल्ले हलके होगें तो उन्हीं लोगों ने हमारी आयत से नाफरमानी करने की वजह से यक़ीनन अपना आप नुक़सान किया
10وَلَقَدْ مَكَّنَّاكُمْ فِي الْأَرْضِ وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَايِشَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
और (ऐ बनीआदम) हमने तो यक़ीनन तुमको ज़मीन में क़ुदरत व इख़तेदार दिया और उसमें तुम्हारे लिए असबाब ज़िन्दगी मुहय्या किए (मगर) तुम बहुत ही कम शुक्र करते हो
11وَلَقَدْ خَلَقْنَاكُمْ ثُمَّ صَوَّرْنَاكُمْ ثُمَّ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ لَمْ يَكُن مِّنَ السَّاجِدِينَ
हालाकि इसमें तो शक ही नहीं कि हमने तुम्हारे बाप आदम को पैदा किया फिर तुम्हारी सूरते बनायीं फिर हमनें फ़रिश्तों से कहा कि तुम सब के सब आदम को सजदा करो तो सब के सब झुक पड़े मगर शैतान कि वह सजदा करने वालों में शामिल न हुआ।
12قَالَ مَا مَنَعَكَ أَلَّا تَسْجُدَ إِذْ أَمَرْتُكَ ۖ قَالَ أَنَا خَيْرٌ مِّنْهُ خَلَقْتَنِي مِن نَّارٍ وَخَلَقْتَهُ مِن طِينٍ
ख़ुदा ने (शैतान से) फरमाया जब मैनें तुझे हुक्म दिया कि तू फिर तुझे सजदा करने से किसी ने रोका कहने लगा मैं उससे अफ़ज़ल हूँ (क्योंकि) तूने मुझे आग (ऐसे लतीफ अनसर) से पैदा किया
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
10आयत

अनुवाद — अल-आराफ 10

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Wednesday, September 30, 2026

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