अल-मआरिज · 35/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
أُولَٰئِكَ فِي جَنَّاتٍ مُّكْرَمُونَ ۝٣٥
Ulaaa`ika fee jannaatim mukramoon
📖 हिंदी अर्थ
यही लोग बेहिश्त के बाग़ों में इज्ज़त से रहेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • जन्नात (جَنَّاتٍ): बाग़, स्वर्ग के उद्यान।
  • मुकरमून (مُكْرَمُونَ): सम्मानित किए गए, इज़्ज़त दिए गए।

तफ़सीर:

यह आयत उन मोमिनिन की ख़ूबसूरत सिफ़तों का नतीजा बयान कर रही है, जिनका ज़िक्र पिछली आयात में किया गया है। ये वे लोग हैं जो अपनी नमाज़ों की हिफ़ाज़त करते हैं, अपनी अमानतों और अहद (वादों) को पूरा करते हैं, अपनी गवाहियों में सच्चाई पर क़ायम रहते हैं, और अपनी निगाहों व शहवतों को हलाल के दायरे में रखते हैं।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग, जो इन उम्दा सिफ़ात से मौसूफ़ हैं, जन्नत के बाग़ों में होंगे और वहाँ उन्हें हर तरह की इज़्ज़त और तकरीम हासिल होगी। यह तकरीम सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ों तक महदूद नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा, उसका क़ुर्ब (पास होना), और उसके जमाल (खूबसूरती) के दीदार तक फैली हुई है।

यह वादा उन लोगों के लिए है जो दुनिया में अल्लाह की इबादत और बंदगी में मशग़ूल रहे, उसकी नाफ़रमानी से बचे, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालने की कोशिश करे। जिसने दुनिया में अल्लाह की इज़्ज़त को क़ायम रखा, अल्लाह उसे आख़िरत में इज़्ज़त से नवाज़ेगा।

यह आयत हमें बताती है कि असली कामयाबी और इज़्ज़त दुनिया के माल-ओ-दौलत या ओहदे में नहीं, बल्कि अल्लाह की नज़र में उसके नेक बंदों के लिए है। जो लोग आज अल्लाह की राह में मुश्किलें उठाते हैं, अपनी नफ़्सियात को क़ाबू में रखते हैं, और सब्र के साथ अल्लाह की इबादत पर जमे रहते हैं, उनके लिए आने वाला कल (आख़िरत) रोशन और खुशियों भरा है।

तो प्यारे मोमिनिन! इस आयत से हिम्मत हासिल करें। अपनी नमाज़ों को पाबंदी से पढ़ें, अमानतों में ख़यानत न करें, वादों को पूरा करें, और हराम से बचें। यक़ीनन अल्लाह का यह वादा सच्चा है, और उसकी तरफ़ से मिलने वाली इज़्ज़त और तकरीम कभी ख़त्म न होने वाली नेमत है। अल्लाह हमें उन नेक बंदों में शामिल करे, आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 33-37 — अल-मआरिज

33وَالَّذِينَ هُم بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ
और जो लोग अपनी यहादतों पर क़ायम रहते हैं
34وَالَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
और जो लोग अपनी नमाज़ो का ख्याल रखते हैं
35أُولَٰئِكَ فِي جَنَّاتٍ مُّكْرَمُونَ
यही लोग बेहिश्त के बाग़ों में इज्ज़त से रहेंगे
36فَمَالِ الَّذِينَ كَفَرُوا قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ
तो (ऐ रसूल) काफिरों को क्या हो गया है
37عَنِ الْيَمِينِ وَعَنِ الشِّمَالِ عِزِينَ
कि तुम्हारे पास गिरोह गिरोह दाहिने से बाएँ से दौड़े चले आ रहे हैं
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अनुवाद — अल-मआरिज 35

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सूरा आयत 35/44 — अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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