अल-मआरिज · 40/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
فَلَا أُقْسِمُ بِرَبِّ الْمَشَارِقِ وَالْمَغَارِبِ إِنَّا لَقَادِرُونَ ۝٤٠
Falaaa uqsimu bi Rabbil mashaariqi wal maghaaribi innaa laqaadiroon
📖 हिंदी अर्थ
तो मैं मशरिकों और मग़रिबों के परवरदिगार की क़सम खाता हूँ कि हम ज़रूर इस बात की कुदरत रखते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَا أُقْسِمُ – नहीं, मैं क़सम खाता हूँ (यहाँ "ला" ज़िद और ताकीद के लिए है, न कि नकार के लिए)।
  • بِرَبِّ الْمَشَارِقِ وَالْمَغَارِبِ – पूर्वों और पश्चिमों के रब की क़सम।
  • إِنَّا لَقَادِرُونَ – बेशक हम निश्चित रूप से सामर्थ्य रखने वाले हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी महान शक्ति और क़ुदरत की क़सम खाता है, और वह क़सम अपने पाक ज़ात की है जो सारे जहान का रब है। वह "मशारिक" (पूर्वों) और "मग़ारिब" (पश्चिमों) का रब है – यानी सूरज, चाँद, सितारों और सभी सृष्टि के उदय और अस्त होने के स्थानों का स्वामी। हर दिन सूरज एक नई जगह से निकलता है और एक नई जगह पर डूबता है, और यह सब अल्लाह के इशारे पर होता है। यह क़सम इस बात की गवाही देती है कि अल्लाह तआला हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।

इस क़सम का जवाब है: "إِنَّا لَقَادِرُونَ" – बेशक हम निश्चित रूप से सामर्थ्य रखने वाले हैं। यानी अल्लाह तआला उन लोगों को जो उसके आदेशों की अवहेलना करते हैं और सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं, उन्हें नष्ट करके उनकी जगह बेहतर और आज्ञाकारी लोगों को लाने पर पूरी तरह सक्षम है। कोई भी उससे आगे नहीं निकल सकता, न कोई उसे विफल कर सकता है, और न ही कोई उसकी पकड़ से बच सकता है। यदि वह चाहे तो मरे हुओं को दोबारा ज़िंदा कर सकता है, और यदि चाहे तो काफ़िरों को ख़त्म करके उनकी जगह नेक लोगों को ला सकता है।

यह आयत मुशरिकों को चेतावनी देती है जो मरने के बाद दोबारा जी उठने को असंभव समझते थे। अल्लाह उन्हें बताता है कि जिस रब ने पूर्वों और पश्चिमों को अपने क़ाबू में रखा है, उसके लिए तुम्हें दोबारा ज़िंदा करना और तुम्हारा हिसाब लेना बिल्कुल आसान है। वह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसकी शक्ति के आगे कोई चीज़ असम्भव नहीं।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है – अल्लाह की क़ुदरत पर विश्वास करना और उसकी ताक़त के सामने अपने आपको विनम्र बनाना। जब हम सूरज को हर सुबह निकलते देखते हैं और हर शाम डूबते देखते हैं, तो यह अल्लाह की महानता की जीती-जागती निशानी है। यह हमें याद दिलाता है कि जो रब इतनी बड़ी कायनात को चला रहा है, वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों से भी बेख़बर नहीं है। वह हमारी दुआएँ सुनता है, हमारी मदद करता है, और हमें राह दिखाता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और जो लोग उसके हुक्मों से ग़ाफ़िल होते हैं, वे उसकी पकड़ से नहीं बच सकते। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, उसकी इबादत करें, और उसके रास्ते पर चलें। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसके आज्ञाकारी हैं और उसकी रहमत के हक़दार हैं। आमीन।



📜 आयत 38-42 — सूरा अल-मआरिज

38أَيَطْمَعُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ
क्या इनमें से हर शख़्श इस का मुतमइनी है कि चैन के बाग़ (बेहिश्त) में दाख़िल होगा
39كَلَّا ۖ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَ
हरगिज़ नहीं हमने उनको जिस (गन्दी) चीज़ से पैदा किया ये लोग जानते हैं
40فَلَا أُقْسِمُ بِرَبِّ الْمَشَارِقِ وَالْمَغَارِبِ إِنَّا لَقَادِرُونَ
तो मैं मशरिकों और मग़रिबों के परवरदिगार की क़सम खाता हूँ कि हम ज़रूर इस बात की कुदरत रखते हैं
41عَلَىٰ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
कि उनके बदले उनसे बेहतर लोग ला (बसाएँ) और हम आजिज़ नहीं हैं
42فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उनको छोड़ दो कि बातिल में पड़े खेलते रहें यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है उनके सामने आ मौजूद हो
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अनुवाद — अल-मआरिज 40

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Thursday, October 1, 2026

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