Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नुबद्दिल – हम बदल दें।
- ख़ैरन मिन्हुम – उनसे बेहतर (लोग)।
- बिमस्बूक़ीन – हम पर काबू पाया जा सकने वाला, हमें मात देने वाला, या हमसे आगे निकल जाने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत और अधिकार की क़सम खाकर फ़रमाता है कि हम उस पर पूरी तरह क़ादिर हैं कि उन लोगों को जो सच्चाई से मुँह मोड़ रहे हैं और हमारी नाफ़रमानी पर अड़े हुए हैं, उन्हें हलाक कर दें और उनके स्थान पर उनसे बेहतर लोगों को ले आएँ — ऐसे लोग जो अल्लाह की इताअत करने वाले हों, उसके हुक्म के आगे सर झुकाने वाले हों और उसकी राह में चलने वाले हों। और हम इस काम से कभी मजबूर या विवश नहीं होंगे, न कोई हमें रोक सकता है और न ही हमसे आगे निकल सकता है। जब अल्लाह किसी क़ौम को बदलना चाहता है, तो कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती, कोई योजना उसे नाकाम नहीं कर सकती।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की नेमतों को भूलकर अपनी सरकशी और ग़ुरूर में डूबे हुए हैं। वे समझते हैं कि वे बहुत ताक़तवर हैं और उन्हें कोई हिला नहीं सकता, लेकिन अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि हमारी क़ुदरत के आगे उनकी सारी ताक़तें बेकार हैं। हम चाहें तो उन्हें मिट्टी में मिला दें और उनकी जगह ऐसे लोगों को ले आएँ जो हमारे सच्चे बंदे हों, हमारी इबादत करने वाले हों और हमारे दीन के मददगार हों।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की क़ुदरत पर पूरा भरोसा रखें और यह यक़ीन रखें कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। जब हम देखते हैं कि बुराई और नाफ़रमानी बढ़ रही है, तो हमें यह उम्मीद नहीं खोनी चाहिए कि अल्लाह सच्चाई और नेकी को बुलंद करेगा। अल्लाह ने हमेशा से अपने नेक बंदों की मदद की है और सरकशों को नीचा दिखाया है। यह आयत मोमिनों के दिलों में यह विश्वास पैदा करती है कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों। और यह भी याद दिलाती है कि हमें हमेशा अल्लाह की इताअत में जुटे रहना चाहिए, ताकि हम उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह अपनी रहमत से नवाज़ता है और उनके ज़रिए दीन को ताक़त देता है।
📜 आयत 39-43 — सूरा अल-मआरिज
अनुवाद — अल-मआरिज 41
सूरा अल-मआरिज आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि उनके बदले उनसे बेहतर लोग ला (बसाएँ) और हम…सूरा आयत 41/44 — सूरा अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मआरिज सुनें, सूरा अल-मआरिज अनुवाद, सूरा अल-मआरिज mp3, सूरा अल-मआरिज pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मआरिज
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


