अल-मआरिज · 42/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ ۝٤٢
Fazarhum yakhoodoo wa yal`aboo hattaa yulaaqoo yaw mahumul lazee yoo`adoon
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम उनको छोड़ दो कि बातिल में पड़े खेलते रहें यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है उनके सामने आ मौजूद हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَذَرْهُمْ: उन्हें छोड़ दीजिए।
  • يَخُوضُوا: वे अपने बातिल (झूठे) कामों में डूबे रहें।
  • وَيَلْعَبُوا: और वे खेल-कूद (दुनियावी मशगूलियों) में लगे रहें।
  • يُوعَدُونَ: जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन काफिरों को उनकी हालत पर छोड़ दीजिए। वे अपनी बातिल बातों, झूठे विश्वासों और मनगढ़ंत कहानियों में डूबे रहें, और अपनी इस फानी दुनिया की खेल-कूद, मौज-मस्ती और लालच में लगे रहें। यह सब कुछ बहुत थोड़े समय के लिए है। उन्हें उस दिन का इंतज़ार करना चाहिए जिस दिन का उनसे वादा किया गया है — यानी क़ियामत का दिन, जब उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला मिलेगा।

यह दिन कोई साधारण दिन नहीं होगा। उस दिन वे अपनी कब्रों से इस तरह निकलेंगे जैसे वे दुनिया में अपने झूठे माबूदों की तरफ दौड़ा करते थे — तेज़ी से, भागते हुए। उनकी आँखें नीची होंगी, उन पर ज़िल्लत और रुसवाई छाई होगी। यही वह दिन है जिसका उन्हें वादा दिया गया था, लेकिन वे उसे मज़ाक़ समझते थे और उसे झुठलाते थे।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली दे रहे हैं कि जो लोग हक़ (सच्चाई) को नहीं मानते, उनकी ज़िद और मुनादी पर दुखी न हों। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो, क्योंकि उनका हिसाब अल्लाह के सुपुर्द है। यह हमारे लिए भी एक सबक़ है कि हमें अपना काम करते रहना चाहिए — नेकी, ईमान और अच्छे आचरण का — और परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।

साथ ही, यह आयत हमें सावधान करती है कि यह दुनिया केवल एक खेल और मशगूली है। जो लोग इसे ही सब कुछ समझ लेते हैं और आख़िरत को भूल जाते हैं, वे उस दिन बहुत पछताएँगे जब पलटने का मौक़ा नहीं होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत, अच्छे कामों और दूसरों की मदद में गुज़ारें, ताकि उस दिन हमारा सामना खुशी और कामयाबी से हो, न कि शर्मिंदगी और अफ़सोस से। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 40-44 — सूरा अल-मआरिज

40فَلَا أُقْسِمُ بِرَبِّ الْمَشَارِقِ وَالْمَغَارِبِ إِنَّا لَقَادِرُونَ
तो मैं मशरिकों और मग़रिबों के परवरदिगार की क़सम खाता हूँ कि हम ज़रूर इस बात की कुदरत रखते हैं
41عَلَىٰ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
कि उनके बदले उनसे बेहतर लोग ला (बसाएँ) और हम आजिज़ नहीं हैं
42فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उनको छोड़ दो कि बातिल में पड़े खेलते रहें यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है उनके सामने आ मौजूद हो
43يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ
उसी दिन ये लोग कब्रों से निकल कर इस तरह दौड़ेंगे गोया वह किसी झन्डे की तरफ दौड़े चले जाते हैं
44خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ
(निदामत से) उनकी ऑंखें झुकी होंगी उन पर रूसवाई छाई हुई होगी ये वही दिन है जिसका उनसे वायदा किया जाता था
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीअवतरण स्थान
42आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 42

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Saturday, October 3, 2026

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