नूह · 23/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा नूह
وَقَالُوا لَا تَذَرُنَّ آلِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلَا سُوَاعًا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًا ۝٢٣
Wa qaaloo laa tazarunna aalihatakum wa laa tazarunna Waddanw wa laa Suwaa`anw wa laa Yaghoosa wa Ya`ooqa wa Nasraa
📖 हिंदी अर्थ
और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا تَذَرُنَّ: हरगिज़ न छोड़ो, बिल्कुल त्याग मत करो।
  • آلِهَتَكُمْ: अपने पूज्यों को, अपने देवताओं को।
  • وَدًّا, سُوَاعًا, يَغُوثَ, يَعُوقَ, نَسْرًا: ये उन पाँच बुतों (मूर्तियों) के नाम थे जिन्हें क़ौमे नूह पूजती थी।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के सरदारों और बुज़ुर्गों ने जब देखा कि आम लोग नूह (अलैहिस्सलाम) की बात मानकर एक अल्लाह की इबादत की ओर रुख़ कर रहे हैं, तो उन्होंने अपने अनुयायियों को भड़काया और कहा: "अपने इन पूज्यों को हरगिज़ मत छोड़ो! और ख़ास तौर पर इन पाँच बुतों को — वद्द, सुवाअ, यग़ूस, यऊक़ और नस्र को — कभी त्याग मत देना।"

ये पाँचों नाम दरअसल उन नेक और सालेह लोगों के थे जो क़ौमे नूह से पहले गुज़रे थे। जब वे मर गए, तो शैतान ने लोगों को उनकी याद में मूर्तियाँ बनाने का सुझाव दिया, ताकि उन्हें देखकर लोगों को इबादत का शौक़ पैदा हो। धीरे-धीरे समय बीतता गया, नई पीढ़ियाँ आईं और शैतान ने उन्हें यह वहम डाला कि उनके बुज़ुर्ग इन मूर्तियों की पूजा करते थे और इन्हीं के ज़रिए अल्लाह तक रास्ता पाते थे। इस तरह ये मूर्तियाँ धीरे-धीरे पूजी जाने लगीं और शिर्क (अल्लाह के साथ साझीदार ठहराने) का बड़ा फितना फैल गया।

यही वजह है कि इस्लाम में मूर्तियों, तस्वीरों और क़ब्रों पर गुंबद बनाने की सख्त मनाही है, क्योंकि इंसानी फितरत कमज़ोर है और समय के साथ ये चीज़ें शिर्क का ज़रिया बन जाती हैं। अल्लाह तआला ने हमें इन सब चीज़ों से बचाया है ताकि हमारा ईमान खालिस और पाक रहे।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि बुरी संगत और गुमराह रहनुमा इंसान को कितना बड़ा नुक़सान पहुँचा सकते हैं। ये सरदार अपनी सत्ता और दुनियावी फ़ायदों के लिए लोगों को अल्लाह की राह से रोकते थे। लेकिन अल्लाह का फ़ैसला आख़िरकार आया — तूफ़ान ने उन सबको डुबो दिया और फिर आख़िरत में उनके लिए आग का अज़ाब है। अल्लाह की पकड़ से बचने वाला कोई नहीं।

आज भी हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को हर उस चीज़ से पाक रखें जो अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ़ झुकाए। सिर्फ़ अल्लाह ही की इबादत करें, उसी से मदद माँगें और उसी की राह पर चलें। यही सच्ची कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 21-25 — सूरा नूह

21قَالَ نُوحٌ رَّبِّ إِنَّهُمْ عَصَوْنِي وَاتَّبَعُوا مَن لَّمْ يَزِدْهُ مَالُهُ وَوَلَدُهُ إِلَّا خَسَارًا
(फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया
22وَمَكَرُوا مَكْرًا كُبَّارًا
और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की
23وَقَالُوا لَا تَذَرُنَّ آلِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلَا سُوَاعًا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًا
और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना
24وَقَدْ أَضَلُّوا كَثِيرًا ۖ وَلَا تَزِدِ الظَّالِمِينَ إِلَّا ضَلَالًا
और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे
25مِّمَّا خَطِيئَاتِهِمْ أُغْرِقُوا فَأُدْخِلُوا نَارًا فَلَمْ يَجِدُوا لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ أَنصَارًا
(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया
नूहकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
23आयत

अनुवाद — नूह 23

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Thursday, October 1, 2026

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