अल-मुज्जम्मिल · 11/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
وَذَرْنِي وَالْمُكَذِّبِينَ أُولِي النَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا ۝١١
Wa zarnee walmukaz zibeena ulin na`mati wa mahhilhum qaleelaa
📖 हिंदी अर्थ
और मुझे उन झुठलाने वालों से जो दौलतमन्द हैं समझ लेने दो और उनको थोड़ी सी मोहलत दे दो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَذَرْنِي: मुझे छोड़ दो (यानी उनसे निपटने का काम मुझ पर छोड़ दो)।
  • الْمُكَذِّبِينَ: झुठलाने वाले (जो आयतों और रसूल को नकारते हैं)।
  • أُولِي النَّعْمَةِ: सुख-समृद्धि वाले (जिन्हें दुनिया में आराम और ऐशो-आराम दिया गया है)।
  • وَمَهِّلْهُمْ: उन्हें मोहलत दो (थोड़ी सी अवधि के लिए उन्हें छोड़ दो)।
  • قَلِيلًا: बहुत थोड़ा समय।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन लोगों की परवाह न करें जो आपकी बातों को झुठलाते हैं और जिन्हें दुनिया में खूब सुख-सुविधाएं और ऐशो-आराम मिला हुआ है। उनके ठुकराने और मज़ाक उड़ाने से आपका दिल दुखी न हो, क्योंकि उनका हिसाब मेरे ज़िम्मे है। आप उन्हें मेरे हवाले कर दें — मैं उनके साथ वही करूँगा जो मेरी क़ुदरत के लायक़ है। उन्हें थोड़ी सी मोहलत दी गई है, यानी उनका अज़ाब टल गया है, लेकिन यह मोहलत बहुत कम है। जल्द ही वह समय आएगा जब उनके किए की सज़ा उन्हें मिलेगी। यह वादा उस वक़्त पूरा हुआ जब बद्र की जंग में उनके सरदार मारे गए और उन्हें रुसवाई का सामना करना पड़ा।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम सच्चाई पर हों और लोग हमारा मज़ाक उड़ाएँ या हमें झुठलाएँ, तो हमें घबराना नहीं चाहिए और न ही उनसे बदला लेने की फ़िक्र में पड़ना चाहिए। अल्लाह न्याय करने वाला है, और वह हर ज़ालिम को उसकी सज़ा देगा। हमारा काम केवल सच्चाई पेश करना है और अल्लाह पर भरोसा रखना है। याद रखें, दुनिया की ये सुख-सुविधाएं और ऐशो-आराम किसी के लिए अल्लाह की पसंदीदगी की निशानी नहीं हैं — बल्कि यह एक इम्तिहान है। जो लोग इन नेअमतों में डूबे हुए हैं और अल्लाह की आयतों को भूल गए हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह की मोहलत उन्हें धोखे में न डाले, क्योंकि उसकी पकड़ बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह पर चलें, उसके रसूल की सुन्नत को अपनाएँ, और यक़ीन रखें कि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद ज़रूर करता है — चाहे देर से ही सही।



📜 आयत 9-13 — अल-मुज्जम्मिल

9رَّبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ فَاتَّخِذْهُ وَكِيلًا
(वही) मशरिक और मग़रिब का मालिक है उसके सिवा कोई माबूद नहीं तो तुम उसी को कारसाज़ बनाओ
10وَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَاهْجُرْهُمْ هَجْرًا جَمِيلًا
और जो कुछ लोग बका करते हैं उस पर सब्र करो और उनसे बा उनवाने शाएस्ता अलग थलग रहो
11وَذَرْنِي وَالْمُكَذِّبِينَ أُولِي النَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا
और मुझे उन झुठलाने वालों से जो दौलतमन्द हैं समझ लेने दो और उनको थोड़ी सी मोहलत दे दो
12إِنَّ لَدَيْنَا أَنكَالًا وَجَحِيمًا
बेशक हमारे पास बेड़ियाँ (भी) हैं और जलाने वाली आग (भी)
13وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا
और गले में फँसने वाला खाना (भी) और दुख देने वाला अज़ाब (भी)
अल-मुज्जम्मिलकुरान सूची
20आयत
मक्कीRevelation
11आयत

अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 11

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Tuesday, August 18, 2026

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