अल-मुज्जम्मिल · 18/20
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुज्जम्मिल
السَّمَاءُ مُنفَطِرٌ بِهِ ۚ كَانَ وَعْدُهُ مَفْعُولًا ۝١٨
Assamaaa`u munfatirum bih; kaana wa`duhoo maf`oola
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन आसमान फट पड़ेगा (ये) उसका वायदा पूरा होकर रहेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुनफ़तिर (منفطر): फटने वाला, टुकड़े-टुकड़े होने वाला, विदीर्ण होने वाला।
  • बिही (به): उसके कारण, अर्थात उस दिन के कारण।
  • काना वा'दुहू मफ़'ऊला (كان وعده مفعولاً): उसका वादा पूरा होकर रहेगा, अवश्य घटित होने वाला है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उस भयानक दिन (क़ियामत) का वर्णन करते हुए फ़रमाते हैं कि जिस दिन यह घटना घटेगी, उस दिन का हौल (भय) इतना सख्त और दहशतनाक होगा कि आसमान — जो इतना मज़बूत और ऊँचा है — उस दिन के हौल और सख्ती से फट जाएगा, टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। यह उस दिन की अज़ीम (महान) हौलनाकी को बयान करता है।

यह अल्लाह तआला का वादा है कि वह दिन ज़रूर आएगा। अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता, और न ही उसमें कोई कमी आ सकती है। जो वादा अल्लाह ने किया है, वह पूरा होकर रहेगा — इसमें कोई शक नहीं। यह अटल सत्य है, जिसे टाला नहीं जा सकता और न ही कोई उसे रोक सकता है।

दावती पहलू (उपदेशात्मक संदेश):

यह आयत हमें उस दिन की याद दिलाती है जब सारा जहान काँप उठेगा, आसमान फट जाएगा और हर इंसान अपने कर्मों का हिसाब देगा। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम इस दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी में उस हमेशा रहने वाले दिन की तैयारी करें। अल्लाह ने अपने वादे को सच कर दिखाने के लिए हमें कुरान और रसूल (ﷺ) की सीख दी है।

आओ, हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के अनुसार ढालें, नेक काम करें, बुराइयों से बचें और उस दिन के लिए ऐसे अमल (कर्म) जमा करें जो हमारे काम आएँ। याद रखें, अल्लाह का वादा सच है और उस दिन का आना तय है — इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, क्योंकि कल का पता नहीं। अल्लाह रहमत करने वाला और माफ़ करने वाला है, वह अपने बंदों की भलाई चाहता है।



📜 आयत 16-20 — सूरा अल-मुज्जम्मिल

16فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ فَأَخَذْنَاهُ أَخْذًا وَبِيلًا
तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा
17فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ الْوِلْدَانَ شِيبًا
तो अगर तुम भी न मानोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से क्यों कर बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा बना देगा
18السَّمَاءُ مُنفَطِرٌ بِهِ ۚ كَانَ وَعْدُهُ مَفْعُولًا
जिस दिन आसमान फट पड़ेगा (ये) उसका वायदा पूरा होकर रहेगा
19إِنَّ هَٰذِهِ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا
बेशक ये नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह एख्तेयार करे
20۞ إِنَّ رَبَّكَ يَعْلَمُ أَنَّكَ تَقُومُ أَدْنَىٰ مِن ثُلُثَيِ اللَّيْلِ وَنِصْفَهُ وَثُلُثَهُ وَطَائِفَةٌ مِّنَ الَّذِينَ مَعَكَ ۚ وَاللَّهُ يُقَدِّرُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ ۚ عَلِمَ أَن لَّن تُحْصُوهُ فَتَابَ عَلَيْكُمْ ۖ فَاقْرَءُوا مَا تَيَسَّرَ مِنَ الْقُرْآنِ ۚ عَلِمَ أَن سَيَكُونُ مِنكُم مَّرْضَىٰ ۙ وَآخَرُونَ يَضْرِبُونَ فِي الْأَرْضِ يَبْتَغُونَ مِن فَضْلِ اللَّهِ ۙ وَآخَرُونَ يُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۖ فَاقْرَءُوا مَا تَيَسَّرَ مِنْهُ ۚ وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَقْرِضُوا اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا ۚ وَمَا تُقَدِّمُوا لِأَنفُسِكُم مِّنْ خَيْرٍ تَجِدُوهُ عِندَ اللَّهِ هُوَ خَيْرًا وَأَعْظَمَ أَجْرًا ۚ وَاسْتَغْفِرُوا اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार चाहता है कि तुम और तुम्हारे चन्द साथ के लोग (कभी) दो तिहाई रात के करीब और (कभी) आधी रात और (कभी) तिहाई रात (नमाज़ में) खड़े रहते हो और ख़ुदा ही रात और दिन का अच्छी तरह अन्दाज़ा कर सकता है उसे मालूम है कि तुम लोग उस पर पूरी तरह से हावी नहीं हो सकते तो उसने तुम पर मेहरबानी की तो जितना आसानी से हो सके उतना (नमाज़ में) क़ुरान पढ़ लिया करो और वह जानता है कि अनक़रीब तुममें से बाज़ बीमार हो जाएँगे और बाज़ ख़ुदा के फ़ज़ल की तलाश में रूए ज़मीन पर सफर एख्तेयार करेंगे और कुछ लोग ख़ुदा की राह में जेहाद करेंगे तो जितना तुम आसानी से हो सके पढ़ लिया करो और नमाज़ पाबन्दी से पढ़ो और ज़कात देते रहो और ख़ुदा को कर्ज़े हसना दो और जो नेक अमल अपने वास्ते (ख़ुदा के सामने) पेश करोगे उसको ख़ुदा के हाँ बेहतर और सिले में बुर्ज़ुग तर पाओगे और ख़ुदा से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अल-मुज्जम्मिलकुरान सूची
20आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 18

सूरा अल-मुज्जम्मिल आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन आसमान फट पड़ेगा (ये) उसका वायदा पूरा होकर…

सूरा आयत 18/20 — सूरा अल-मुज्जम्मिल المزمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुज्जम्मिल सुनें, सूरा अल-मुज्जम्मिल अनुवाद, सूरा अल-मुज्जम्मिल mp3, सूरा अल-मुज्जम्मिल pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए