अल-मुज्जम्मिल · 17/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ الْوِلْدَانَ شِيبًا ۝١٧
Fakaifa tattaqoona in kafartum yawmany yaj`alul wildaana sheeba
📖 हिंदी अर्थ
तो अगर तुम भी न मानोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से क्यों कर बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा बना देगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तत्वक़ून (تتقون): अपनी रक्षा करना, बचाव करना।
  • विल्दान (الولدان): छोटे बच्चे।
  • शीबन (شيبًا): सफेद बालों वाले (बूढ़े)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में क़यामत के दिन के उस भयावह दृश्य की ओर इशारा कर रहे हैं, जब उस दिन की दहशत और सख्ती इतनी ज़्यादा होगी कि छोटे-छोटे बच्चे भी उसके खौफ से बूढ़े हो जाएंगे। उनके सिर के बाल सफेद हो जाएंगे। यह उस दिन की भयावहता का एक उदाहरण है।

अब अल्लाह फ़रमा रहा है: "अगर तुम कुफ्र (इनकार) पर क़ायम रहोगे और अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान नहीं लाओगे, तो तुम उस दिन के अज़ाब से कैसे बचोगे? उस दिन से खुद को कैसे महफूज़ रखोगे?" यानी उस दिन की सख्ती से बचने का कोई रास्ता नहीं होगा, सिवाय इसके कि तुम दुनिया में ईमान लाओ और नेक अमल करो।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह के अज़ाब को भूलकर गुनाहों में मशगूल हैं। क़यामत का दिन इतना भयानक होगा कि उसकी हिचकी (परेशानी) से बच्चे बूढ़े हो जाएंगे। तो फिर उस दिन तुम कैसे बचोगे, अगर आज तुम कुफ्र और गुनाह पर ज़िद्द करते रहे?

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों की पैरवी को कितनी अहमियत देते हैं। अगर हम आज उस दिन के अज़ाब से डरें और अपने गुनाहों से तौबा कर लें, तो अल्लाह अपनी रहमत से हमें बख्श देगा। यह दुनिया इम्तिहान की जगह है, और क़यामत का दिन उस इम्तिहान का नतीजा है। जो लोग आज अल्लाह के सामने झुक जाएंगे और उसकी राह पर चलेंगे, उनके लिए उस दिन खौफ नहीं होगा, बल्कि वे अल्लाह की रहमत से जन्नत में दाखिल होंगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएं, नमाज़ क़ायम करें, गुनाहों से बचें और अल्लाह की रहमत के उम्मीदवार बनें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसी' (व्यापक) है, और वह अपने बंदों की तौबा को कबूल करने वाला है।



📜 आयत 15-19 — अल-मुज्जम्मिल

15إِنَّا أَرْسَلْنَا إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَاهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَا أَرْسَلْنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا
(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था
16فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ فَأَخَذْنَاهُ أَخْذًا وَبِيلًا
तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा
17فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ الْوِلْدَانَ شِيبًا
तो अगर तुम भी न मानोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से क्यों कर बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा बना देगा
18السَّمَاءُ مُنفَطِرٌ بِهِ ۚ كَانَ وَعْدُهُ مَفْعُولًا
जिस दिन आसमान फट पड़ेगा (ये) उसका वायदा पूरा होकर रहेगा
19إِنَّ هَٰذِهِ تَذْكِرَةٌ ۖ فَمَن شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا
बेशक ये नसीहत है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की राह एख्तेयार करे
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अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 17

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Tuesday, August 18, 2026

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