अल-मुद्दस्सिर · 18/56
अनुवाद उच्चारण — अल-मुद्दस्सिर
إِنَّهُ فَكَّرَ وَقَدَّرَ ۝١٨
Innahoo fakkara wa qaddar
📖 हिंदी अर्थ
उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَكَّرَ: उसने सोच-विचार किया, मनन किया।
  • وَقَدَّرَ: उसने (अपने मन में) योजना बनाई, तरतीब दी, और बात को परखा।

तफ़सीर:

यह आयत उस काफ़िर (वलिद बिन मुग़ीरा) के बारे में है, जिस पर अल्लाह तआला ने बड़ी-बड़ी नेअमतें (आशीर्वाद) बरसाई थीं, लेकिन उसने इन नेअमतों का शुक्र अदा करने के बजाय इन्हीं का इस्तेमाल अल्लाह के दीन को बदनाम करने में किया।

जब उसने रसूलुल्लाह ﷺ की ज़बान से पवित्र क़ुरआन की आयतें सुनीं, तो उसके दिल में सच्चाई का एहसास तो हुआ, लेकिन अहंकार और दुनियावी मोह ने उसे सच्चाई क़बूल करने से रोका। उसने अपने मन में सोच-विचार शुरू किया कि किस तरह क़ुरआन के बारे में ऐसी बात कही जाए जिससे लोग उससे दूर हो जाएँ। उसने अपने ज़ेहन में तरह-तरह की बातें गढ़ीं, उन्हें तोला और परखा कि कौन सी बात ज़्यादा असरदार होगी। वह यह नहीं समझ पा रहा था कि क़ुरआन कोई इंसानी कलाम है जिसमें कोई कमी निकाली जा सके, बल्कि यह तो अल्लाह का कलाम है, जो हर तरह की कमी से पाक है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब इंसान का दिल सच्चाई से दूर हो जाता है, तो वह अपनी अक़्ल और सोच को भी गलत रास्ते पर इस्तेमाल करने लगता है। वह सच्चाई को मानने के बजाय उसे झुठलाने के लिए बहाने तलाशता है। लेकिन अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सच्चाई पर कोई परदा नहीं डाल सकता।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें इस आयत से सबक लेना चाहिए कि अपनी सोच और अक़्ल को हमेशा सच्चाई और हिदायत की तरफ़ लगाएँ। जब क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी हमारे पास है, तो हमें उसे अपनाना चाहिए, न कि उससे मुँह मोड़ना चाहिए। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल दी है ताकि हम उसके ज़रिए हक़ (सच्चाई) को पहचानें और उस पर चलें। जो लोग अपनी अक़्ल को गलत रास्ते पर लगाते हैं, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़सान उठाते हैं। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 16-20 — अल-मुद्दस्सिर

16كَلَّا ۖ إِنَّهُ كَانَ لِآيَاتِنَا عَنِيدًا
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था
17سَأُرْهِقُهُ صَعُودًا
तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा
18إِنَّهُ فَكَّرَ وَقَدَّرَ
उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की
19فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
तो ये (कम्बख्त) मार डाला जाए
20ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
उसने क्यों कर तजवीज़ की
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अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 18

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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