अल-क़ियामा · 28/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
وَظَنَّ أَنَّهُ الْفِرَاقُ ۝٢٨
Wa zanna annahul firaaq
📖 हिंदी अर्थ
और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَظَنَّ: यहाँ "ज़न्न" का अर्थ यक़ीन और पूर्ण विश्वास है, संदेह नहीं।
  • أَنَّهُ الْفِرَاقُ: यह निश्चित ज्ञान कि यही वह समय है जब दुनिया से विदाई होनी है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मौत का समय आता है और रूह गले तक पहुँच जाती है, और हाज़िर लोग एक-दूसरे से पूछते हैं कि क्या कोई झाड़-फूँक करने वाला या इलाज करने वाला है जो इस मुसीबत को टाल सके — उस वक़्त मरने वाला व्यक्ति पूरे यक़ीन के साथ समझ लेता है कि यही वह लम्हा है, यही वह अलगाव है, दुनिया से रुख़्सत होने का समय आ गया है। वह फ़रिश्तों को देखता है, और उसे साफ़ अहसास हो जाता है कि अब कोई वापसी नहीं, कोई मोहलत नहीं, कोई दूसरा मौक़ा नहीं। यह वह क्षण है जब दुनिया की आख़िरी तकलीफ़ और आख़िरत की पहली सख़्ती एक साथ मिल जाती हैं।

यह वह घड़ी है जब इंसान को अपने अमल का एहसास होता है, जब उसे समझ आता है कि ज़िंदगी की असली हक़ीक़त क्या थी। लेकिन तब समझ आने का कोई फ़ायदा नहीं होता। इसलिए अल्लाह तआला हमें आज ही सोचने की दावत देते हैं — कि हम उस पल का इंतज़ार न करें जब मौत सामने आ खड़ी हो, बल्कि आज ही अपनी ज़िंदगी को सही राह पर लगाएँ, आज ही तौबा कर लें, आज ही अच्छे आमाल कर लें।

याद रखिए, यह फ़िराक़ (विदाई) सिर्फ़ दुनिया से नहीं है, बल्कि यह उस सफ़र की शुरुआत है जो अल्लाह की तरफ़ है — या तो जन्नत की तरफ़, या जहन्नम की तरफ़। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इताअत करते रहे, उनके लिए यह विदाई राहत और ख़ुशी का पैग़ाम है, और जो ग़ाफ़िल रहे, उनके लिए यह अफ़सोस और पछतावे का लम्हा है। अल्लाह हम सबको मौत से पहले सही राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अल-क़ियामा

26كَلَّا إِذَا بَلَغَتِ التَّرَاقِيَ
सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी
27وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍ
और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है
28وَظَنَّ أَنَّهُ الْفِرَاقُ
और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है
29وَالْتَفَّتِ السَّاقُ بِالسَّاقِ
और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी
30إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمَسَاقُ
उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है
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अनुवाद — अल-क़ियामा 28

सूरा अल-क़ियामा आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है

सूरा आयत 28/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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