अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَحَشَرَ: इकट्ठा किया, एकत्रित किया।
- فَنَادَىٰ: पुकारा, ऊँची आवाज़ से बुलाया।
तफ़सीर:
जब फ़िरऔन ने देखा कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का दावा सच्चा है और उनके पास अल्लाह के स्पष्ट चमत्कार हैं, तो उसने अपनी पूरी क़ौम और अपने साम्राज्य के लोगों को इकट्ठा किया। उसका उद्देश्य यह था कि वह अपनी ताक़त और भीड़ दिखाकर मूसा (अलैहिस्सलाम) को डराए और अपने लोगों को यह विश्वास दिलाए कि वही सबसे बड़ा शासक है। उसने अपनी प्रजा को एक मैदान में जमा किया और ऊँची आवाज़ में पुकारते हुए कहा: "मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूँ!" — यानी उसने खुद को खुदा बताने की जुर्रत की, जो उसकी सरकशी और अहंकार की आख़िरी मंज़िल थी।
यह घटना हमें बताती है कि इंसान जब अपनी ताक़त और ऐशो-आराम पर घमंड करता है, तो वह हद से गुज़र जाता है और अल्लाह की निशानियों को झुठलाने लगता है। लेकिन अल्लाह ने फ़िरऔन को उसी वक़्त सज़ा नहीं दी, बल्कि उसे मौका दिया ताकि वह अपनी गलती समझे। जब उसने तौबा नहीं की और अपनी सरकशी पर अड़ा रहा, तो अल्लाह ने उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में ज़लील किया। उसे डुबोकर उसकी लाश को एक निशानी बना दिया, ताकि आने वाली नस्लें उससे सबक़ लें।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सत्ता, धन और ताक़त किसी को भी अल्लाह के मुक़ाबले में नहीं बचा सकते। फ़िरऔन के पास अपनी क़ौम की भीड़ थी, लेकिन वह अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ न कर सका। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को मानें और उसकी नाफ़रमानी से बचें। अल्लाह रहम करने वाला है, लेकिन उसकी पकड़ बहुत सख्त है। जो लोग उसके आगे झुकते हैं, उन्हें वह इज़्ज़त देता है, और जो सरकशी करते हैं, उन्हें वह ज़लील करता है। यह क़ुरआन की तालीम है कि हम हर हाल में अल्लाह की तरफ़ रुजू करें और उसकी रहमत के तलबगार रहें।
📜 आयत 21-25 — अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 23
सूरा अन-नाज़ियात आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (लोगों को) जमा किया और बुलन्द आवाज़ से चिल्लायासूरा आयत 23/46 — अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नाज़ियात सुनें, अन-नाज़ियात अनुवाद, अन-नाज़ियात mp3, अन-नाज़ियात pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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