अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَرْجُفُ: काँपना, हिलना-डुलना, भूकंप की तरह ज़मीन का हिल जाना।
- الرَّاجِفَةُ: वह (नफ़्ख़ा/सूर) जो सब कुछ काँपा दे, अर्थात् पहला सूर (नफ़्ख़ा-ए-इमाता) जिससे सारी सृष्टि में हलचल और कंपन पैदा हो जाए और सब कुछ तबाह हो जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में क़यामत के उस भयानक दिन का ज़िक्र किया है जब पहला सूर (नफ़्ख़ा-ए-इमाता) फूँका जाएगा। उस दिन ज़मीन और आसमान में ऐसा ज़बरदस्त कंपन और भूकंप आएगा कि हर चीज़ काँप उठेगी, पहाड़ रेत के टीले बन जाएँगे, और सारी मख़लूक़ात — इंसान, जिन्न, फ़रिश्ते, जानवर — सब मर जाएँगे। यह कंपन इतना सख़्त होगा कि कोई चीज़ उससे बच नहीं पाएगी।
इस आयत में अल्लाह ने उस दिन की हौलनाकी को बयान किया है ताकि इंसान समझे कि यह दुनिया हमेशा के लिए नहीं है, और एक दिन यह सब कुछ ख़त्म हो जाएगा। यही वह दिन है जब अल्लाह की क़ुदरत का पूरा ज़ोहूर होगा और हर इंसान को अपने आमाल का हिसाब देना होगा।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें ग़ाफ़िल होने से रोकती है। जो इंसान आज इस दुनिया की चमक-दमक में मग़रूर है और अल्लाह के हुक्मों से बेपरवाह है, उसे याद रखना चाहिए कि वह दिन ज़रूर आने वाला है जब ज़मीन काँपेगी और हर शख़्स अपने किए पर पछताएगा। लेकिन अल्लाह रहमान है — उसने हमें मौक़ा दिया है कि हम तौबा करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ, और अच्छे आमाल करें। जो लोग उस दिन के लिए तैयारी करेंगे, उनके लिए जन्नत की नेअमतें हैं, और जो ग़ाफ़िल रहेगा, उसका अंजाम बहुत बुरा होगा।
आओ, हम इस दुनिया में रहते हुए उस दिन की फ़िक्र करें, नमाज़ पढ़ें, अल्लाह की इबादत करें, और अपने आख़िरत को संवारें। यही कामयाबी की राह है।
📜 आयत 4-8 — अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 6
सूरा अन-नाज़ियात आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत…सूरा आयत 6/46 — अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नाज़ियात सुनें, अन-नाज़ियात अनुवाद, अन-नाज़ियात mp3, अन-नाज़ियात pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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