अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَصْلَىٰ: वह प्रवेश करेगा और उसकी आग की तपिश को महसूस करेगा।
- سَعِيرًا: भड़कती हुई आग (जहन्नम की आग)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस व्यक्ति के भयानक अंजाम का वर्णन करती है जिसे उसका आमाल-नामा (कर्मों की पुस्तक) उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा। यह वह काफ़िर है जिसने अपने रब का इनकार किया और उसकी आयतों को झुठलाया। ऐसा व्यक्ति उस दिन हैरान और परेशान होकर अपनी तबाही और मौत को पुकारेगा, कहेगा: "हाय मेरी तबाही! काश मैं मिट्टी हो जाता।" लेकिन यह पुकार उसे आग के अज़ाब से नहीं बचा सकेगी।
फिर वह जहन्नम की भड़कती हुई आग में प्रवेश करेगा और उसकी तपिश और जलन को अपने पूरे बदन पर महसूस करेगा। यह आग उसे हर तरफ से घेर लेगी, और वह इससे निकलने का कोई रास्ता नहीं पाएगा। यह उसका स्थायी ठिकाना होगा, जहाँ वह हमेशा रहेगा।
इसका कारण यह है कि वह दुनिया में अपने अहल-ओ-अयाल (परिवार) के बीच खुश और मगरूर रहता था, अपनी दुनियावी चीज़ों पर इतराता था और आख़िरत के बारे में सोचता ही नहीं था। उसने यह गुमान किया कि वह कभी मरने के बाद दोबारा जीवित नहीं होगा और अपने रब के सामने हिसाब के लिए पेश नहीं होगा। उसका यह ख़याल बिल्कुल ग़लत था, क्योंकि अल्लाह उसे ज़रूर दोबारा ज़िंदा करेगा, जैसे उसने पहली बार पैदा किया था, और उसके हर अच्छे-बुरे कर्म का पूरा हिसाब लेगा। उसका रब उसे हमेशा से देख रहा था, उसकी हर छिपी और खुली बात उसे मालूम थी, और वह उसके हाल से पूरी तरह बाख़बर है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और बताती है कि दुनिया की खुशी और मगरूरियत आख़िरत के सामने कुछ भी नहीं है। इंसान को चाहिए कि वह अपने रब की इबादत करे, उसके हुक्मों पर अमल करे और उस दिन के लिए तैयारी करे जब उसके कर्मों की पुस्तक उसके सामने रखी जाएगी। जो आज अपने अहल-ओ-अयाल के साथ खुश रहना चाहता है, उसे चाहिए कि वह अल्लाह की राह में खर्च करे, नेक काम करे और अपने परिवार को भी अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाए, ताकि वह उस दिन की शर्मिंदगी और आग के अज़ाब से बच सके। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उस पर है जो अपनी ग़लतियों से तौबा करता है और अपने रब की तरफ लौटता है, क्योंकि अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और दयावान है।
📜 आयत 10-14 — अल-इनशिक़ाक
अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 12
सूरा अल-इनशिक़ाक आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जहन्नुम वासिल होगासूरा आयत 12/25 — अल-इनशिक़ाक الإنشقاق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इनशिक़ाक सुनें, अल-इनशिक़ाक अनुवाद, अल-इनशिक़ाक mp3, अल-इनशिक़ाक pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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