अल-इनशिक़ाक · 12/25
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इनशिक़ाक
وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا ۝١٢
Wa yaslaa sa`eeraa
📖 हिंदी अर्थ
और जहन्नुम वासिल होगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَصْلَىٰ: वह प्रवेश करेगा और उसकी आग की तपिश को महसूस करेगा।
  • سَعِيرًا: भड़कती हुई आग (जहन्नम की आग)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति के भयानक अंजाम का वर्णन करती है जिसे उसका आमाल-नामा (कर्मों की पुस्तक) उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा। यह वह काफ़िर है जिसने अपने रब का इनकार किया और उसकी आयतों को झुठलाया। ऐसा व्यक्ति उस दिन हैरान और परेशान होकर अपनी तबाही और मौत को पुकारेगा, कहेगा: "हाय मेरी तबाही! काश मैं मिट्टी हो जाता।" लेकिन यह पुकार उसे आग के अज़ाब से नहीं बचा सकेगी।

फिर वह जहन्नम की भड़कती हुई आग में प्रवेश करेगा और उसकी तपिश और जलन को अपने पूरे बदन पर महसूस करेगा। यह आग उसे हर तरफ से घेर लेगी, और वह इससे निकलने का कोई रास्ता नहीं पाएगा। यह उसका स्थायी ठिकाना होगा, जहाँ वह हमेशा रहेगा।

इसका कारण यह है कि वह दुनिया में अपने अहल-ओ-अयाल (परिवार) के बीच खुश और मगरूर रहता था, अपनी दुनियावी चीज़ों पर इतराता था और आख़िरत के बारे में सोचता ही नहीं था। उसने यह गुमान किया कि वह कभी मरने के बाद दोबारा जीवित नहीं होगा और अपने रब के सामने हिसाब के लिए पेश नहीं होगा। उसका यह ख़याल बिल्कुल ग़लत था, क्योंकि अल्लाह उसे ज़रूर दोबारा ज़िंदा करेगा, जैसे उसने पहली बार पैदा किया था, और उसके हर अच्छे-बुरे कर्म का पूरा हिसाब लेगा। उसका रब उसे हमेशा से देख रहा था, उसकी हर छिपी और खुली बात उसे मालूम थी, और वह उसके हाल से पूरी तरह बाख़बर है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और बताती है कि दुनिया की खुशी और मगरूरियत आख़िरत के सामने कुछ भी नहीं है। इंसान को चाहिए कि वह अपने रब की इबादत करे, उसके हुक्मों पर अमल करे और उस दिन के लिए तैयारी करे जब उसके कर्मों की पुस्तक उसके सामने रखी जाएगी। जो आज अपने अहल-ओ-अयाल के साथ खुश रहना चाहता है, उसे चाहिए कि वह अल्लाह की राह में खर्च करे, नेक काम करे और अपने परिवार को भी अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाए, ताकि वह उस दिन की शर्मिंदगी और आग के अज़ाब से बच सके। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उस पर है जो अपनी ग़लतियों से तौबा करता है और अपने रब की तरफ लौटता है, क्योंकि अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और दयावान है।



📜 आयत 10-14 — सूरा अल-इनशिक़ाक

10وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ وَرَاءَ ظَهْرِهِ
लेकिन जिस शख़्श को उसका नामए आमल उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा
11فَسَوْفَ يَدْعُو ثُبُورًا
वह तो मौत की दुआ करेगा
12وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا
और जहन्नुम वासिल होगा
13إِنَّهُ كَانَ فِي أَهْلِهِ مَسْرُورًا
ये शख़्श तो अपने लड़के बालों में मस्त रहता था
14إِنَّهُ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ
और समझता था कि कभी (ख़ुदा की तरफ) फिर कर जाएगा ही नहीं
अल-इनशिक़ाककुरान सूची
25आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 12

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Friday, October 2, 2026

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