अल-इनशिक़ाक · 14/25
अनुवाद उच्चारण — अल-इनशिक़ाक
إِنَّهُ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ ۝١٤
Innahoo zanna al lai yahoor
📖 हिंदी अर्थ
और समझता था कि कभी (ख़ुदा की तरफ) फिर कर जाएगा ही नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَنَّ (ज़न्ना): उसने समझा, विश्वास किया।
  • أَن لَّن يَحُورَ (अन लन यहूर): कि वह कभी लौटकर नहीं आएगा (अर्थात मृत्यु के बाद पुनर्जीवित नहीं होगा)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति की हालत बयान कर रही है जो अपने आपको दुनिया में खोया हुआ और अपनी चाहतों में मगन था। उसने अपने दिल में यह धारणा बना ली थी कि उसे मरने के बाद दोबारा जीवित नहीं होना है, और न ही उसे अपने अमल का हिसाब देना है। यह उसकी बड़ी भूल थी, क्योंकि उसने अपने रब की क़ुदरत को कम समझा और यह भूल गया कि जिसने उसे पहली बार पैदा किया, वह उसे दोबारा ज़िंदा करने पर पूरी तरह क़ादिर है।

यह सिर्फ़ एक अकेले इनकार करने वाले की बात नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक सबक़ है जो अपनी ज़िंदगी में इस ग़लतफ़हमी में जीता है कि मौत के बाद कुछ नहीं। वह सोचता है कि उसके कर्मों का कोई हिसाब नहीं होगा, इसलिए वह जो चाहे करता है, जैसे चाहे जीता है। लेकिन यह आयत उसे चेतावनी देती है कि यह धारणा बिल्कुल ग़लत है। अल्लाह तआला ने इंसान को बेकार नहीं बनाया, और न ही उसे यूँ ही छोड़ दिया है। हर इंसान को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटना है, और उसके सामने अपने सारे अमल पेश करने हैं।

इस आयत में एक प्यारा सबक़ छिपा है: जो लोग यह समझते हैं कि मौत के बाद कोई ज़िंदगी नहीं, वे दुनिया में अपनी ख्वाहिशों के ग़ुलाम बन जाते हैं और आख़िरत को भूल जाते हैं। लेकिन जो मोमिन है, वह जानता है कि यह दुनिया एक इम्तिहान की जगह है, और असली कामयाबी उसी दिन मिलेगी जब वह अपने रब के सामने खड़ा होगा। यही ईमान उसे नेक कामों की तरफ़ ले जाता है और बुराइयों से बचाता है।

तो ऐ इंसान! इस ग़लतफ़हमी को अपने दिल से निकाल दे। यक़ीन रख कि तू मरने के बाद ज़रूर उठाया जाएगा, और तेरा रब तेरी हर छोटी-बड़ी चीज़ से वाक़िफ़ है। वह तुझ पर बड़ा मेहरबान है, और उसकी रहमत की कोई हद नहीं। अगर तूने गुनाह किए हैं, तो तौबा कर ले, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों से बहुत प्यार करता है। और अगर तूने नेकियाँ की हैं, तो उस पर जमा रह, क्योंकि तेरा रब किसी की मेहनत को ज़ाइए नहीं करता। यही वह रास्ता है जो तुझे सच्ची कामयाबी और हमेशा की खुशियों तक पहुँचाएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अल-इनशिक़ाक

12وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا
और जहन्नुम वासिल होगा
13إِنَّهُ كَانَ فِي أَهْلِهِ مَسْرُورًا
ये शख़्श तो अपने लड़के बालों में मस्त रहता था
14إِنَّهُ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ
और समझता था कि कभी (ख़ुदा की तरफ) फिर कर जाएगा ही नहीं
15بَلَىٰ إِنَّ رَبَّهُ كَانَ بِهِ بَصِيرًا
हाँ उसका परवरदिगार यक़ीनी उसको देख भाल कर रहा है
16فَلَا أُقْسِمُ بِالشَّفَقِ
तो मुझे शाम की मुर्ख़ी की क़सम
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अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 14

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Tuesday, August 18, 2026

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