अल-ग़ाशिया · 2/26
अनुवाद उच्चारण — अल-ग़ाशिया
وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ خَاشِعَةٌ ۝٢
Wujoohuny yawma `izin khaashi`ah
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन बहुत से चेहरे ज़लील रूसवा होंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • वुजूहुन – चेहरे
  • यौमइज़िन – उस दिन
  • ख़ाशि'अह – झुके हुए, अपमानित, दबे हुए

तफ़सीर:

क़ियामत का दिन वह दिन होगा जब सारे लोग अपने कर्मों के अनुसार दो भागों में बँट जाएँगे – एक समूह सुखी और दूसरा दुखी। अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों के चेहरों का हाल बयान कर रहे हैं जो उस दिन अपने कर्मों की सज़ा पाने वाले होंगे। उनके चेहरे उस दिन ख़ाशि'अ होंगे, यानी झुके हुए, अपमानित और दबे हुए। यह अपमान और ज़िल्लत उनके चेहरों पर साफ़ दिखाई देगी।

यह ख़ुशी और ग़म दोनों का दिन होगा। जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह के आगे सिर नहीं झुकाया, जिन्होंने उसके हुक्मों को नहीं माना, उनके चेहरे उस दिन शर्मिंदगी और रुसवाई से झुके हुए होंगे। उनकी आँखें नीची होंगी, उनके चेहरे पर डर और घबराहट होगी, और उनकी यह हालत उनके अंजाम की तरफ़ इशारा कर रही होगी।

यह वही लोग हैं जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की नेमतों को भुला दिया, उसके रसूलों को झुठलाया और अपनी ज़िंदगी को ग़लत रास्ते पर बिताया। आज उन्हें अपनी उस हरकतों का नतीजा भुगतना पड़ेगा। उनके चेहरे की यह ज़िल्लत उनके दिलों के अंधेरे का आईना है।

नसीहत और दावत का पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने चेहरे को उस दिन कैसा देखना चाहते हैं – क्या हम चाहते हैं कि हमारे चेहरे उस दिन चमकते हुए, खुश और नूरानी हों, या फिर झुके हुए और अपमानित? यह हमारे आज के कर्मों पर निर्भर करता है। अगर हम आज अल्लाह के आगे झुकेंगे, उसकी इबादत करेंगे, उसके हुक्मों को मानेंगे, तो उस दिन हमारे चेहरे रौशन होंगे। लेकिन अगर हम आज उसकी नाफ़रमानी करेंगे, तो उस दिन हमारा चेहरा भी इन्हीं लोगों की तरह झुका हुआ और ज़लील होगा।

यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ बुलाती है कि अभी वक़्त है, आज हम तौबा कर लें, अपने रब की तरफ़ लौट आएँ, और उस दिन की रुसवाई से बचने की कोशिश करें। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और क्षमा करने वाला है, वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ आएँ और उस दिन की ज़िल्लत से बच जाएँ।



📜 आयत 1-4 — अल-ग़ाशिया

1هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ الْغَاشِيَةِ
भला तुमको ढाँप लेने वाली मुसीबत (क़यामत) का हाल मालुम हुआ है
2وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ خَاشِعَةٌ
उस दिन बहुत से चेहरे ज़लील रूसवा होंगे
3عَامِلَةٌ نَّاصِبَةٌ
(तौक़ व जंज़ीर से) मयक्क़त करने वाले
4تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةً
थके माँदे दहकती हुई आग में दाखिल होंगे
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26आयत
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अनुवाद — अल-ग़ाशिया 2

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Tuesday, August 18, 2026

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