Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- عَامِلَةٌ – काम करने वाली, मेहनत करने वाली
- نَّاصِبَةٌ – थकी हुई, परिश्रम से चूर-चूर
तफ़सीर:
क़ियामत के दिन कुछ चेहरे ऐसे होंगे जो ज़िल्लत और रुसवाई से झुके हुए होंगे, और उन पर ग़ुबार और अंधेरा छाया होगा। ये वे लोग होंगे जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ा और उसके हुक्मों को मानने से इनकार किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये चेहरे उस दिन "عَامِلَةٌ نَّاصِبَةٌ" होंगे यानी काम करने वाले और थके-हारे होंगे।
इसका मतलब यह है कि ये लोग दुनिया में जो आराम और सुख-चैन की ज़िंदगी बिताते थे और अल्लाह की इबादत को बोझ समझते थे, आज उन्हें जहन्नुम में ऐसे कामों में लगाया जाएगा जिनसे वे बुरी तरह थक जाएँगे। वे ज़ंजीरों और बेड़ियों में जकड़े हुए घसीटे जाएँगे, और उन्हें ऐसी मेहनत और मशक़्कत उठानी पड़ेगी जिसका कोई अंत नहीं होगा। यह उनके उस घमंड और अकड़ का बदला होगा जो उन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत से किया था।
फिर अल्लाह तआला बताता है कि इन काफ़िरों के लिए दहकती हुई आग है, जिसकी लपटें बहुत तेज़ होंगी। उन्हें एक बहुत गर्म चश्मे से पिलाया जाएगा, और उनका खाना सिर्फ "ज़री'" होगा — यानी काँटेदार पौधा जो ज़मीन पर बिछा होता है, जो न तो उन्हें भरपेट खाना देगा और न ही उनकी भूख मिटाएगा। यह सबसे बुरा और घिनौना खाना है जो न तो शरीर को ताक़त देता है और न ही भूख को शांत करता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और बताती है कि जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत से किनारा करते हैं और अपनी ज़िंदगी को आराम और मौज-मस्ती में गुज़ारते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहीम है — उसने हमें दुनिया में मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को सही रास्ते पर लाएँ। अगर हम आज अल्लाह की इबादत में हल्की सी मेहनत कर लें — नमाज़ पढ़ें, रोज़ा रखें, अच्छे काम करें — तो क़ियामत के दिन हमें उस मुश्किल और थकान भरे अज़ाब से बचाया जा सकता है। अल्लाह की रहमत बहुत वसी' है, और वह चाहता है कि हम जहन्नुम की आग से बचकर जन्नत की नेमतों तक पहुँचें। आइए हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित करें, ताकि उस दिन हमारे चेहरे रौशन और खुश हों, न कि ज़िल्लत और थकान से भरे हुए।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-ग़ाशिया
अनुवाद — अल-ग़ाशिया 3
सूरा अल-ग़ाशिया आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तौक़ व जंज़ीर से) मयक्क़त करने वालेसूरा आयत 3/26 — सूरा अल-ग़ाशिया الغاشية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-ग़ाशिया सुनें, सूरा अल-ग़ाशिया अनुवाद, सूरा अल-ग़ाशिया mp3, सूरा अल-ग़ाशिया pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-ग़ाशिया
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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