Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- طَغَوْا (तग़ौ) — सीमा से आगे बढ़ना, अत्याचार करना, सरकशी और ज़ुल्म में हद से गुज़र जाना।
- فِي الْبِلَادِ (फ़िल-बिलाद) — धरती में, विभिन्न शहरों और इलाकों में।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन गिरोहों का ज़िक्र करती है जिन्होंने अल्लाह की ज़मीन में सरकशी और ज़ुल्म की इंतिहा कर दी। ये वे लोग थे — जैसे आद, समूद और फ़िरऔन — जिन्होंने अपने-अपने इलाकों में हद से तजावुज़ किया, अल्लाह की नाफ़रमानी में गुनाहों पर गुनाह किए और अपनी ताक़त और सल्तनत के घमंड में इंसाफ़ को तिलांजलि दे दी। उन्होंने कमज़ोरों पर ज़ुल्म किए, अल्लाह के बंदों को अपना ग़ुलाम बनाया और ज़मीन में फ़साद फैलाया। उनका तग़ौ (सरकशी) सिर्फ़ ज़बान तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने अमल से इसे साबित किया — हर वो काम किया जो अल्लाह की नाराज़गी का सबब बना।
यह आयत हमें सबक़ सिखाती है कि ताक़त और सल्तनत का घमंड इंसान को अंधा बना देता है, और वह भूल जाता है कि उसका मालिक और हाकिम सबसे बड़ा अल्लाह है। जो लोग ज़मीन में ज़ुल्म और फ़साद फैलाते हैं, वे समझते हैं कि वे बच निकलेंगे, लेकिन अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। वह उन्हें मोहलत देता है, लेकिन जब पकड़ता है, तो ऐसी पकड़ से पकड़ता है जिससे कोई नहीं बच सकता।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपनी ज़िंदगी में हर हाल में अल्लाह के हुक्मों के सामने सर झुकाना चाहिए, चाहे हमारे पास कितनी भी दौलत, इज़्ज़त या ताक़त क्यों न हो। जो लोग अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ते हैं और ज़ुल्म पर उतर आते हैं, वही असल नुक़सान में हैं। अल्लाह हर अमल का हिसाब लेने वाला है, और उसकी नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है।
याद रखिए, यह दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है, और आख़िरत में हर इंसान को अपने किए का सामना करना है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह में नेकी करें, ज़ुल्म से बचें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं — ताकि हम उन लोगों में से न हों जिन पर अल्लाह का अज़ाब नाज़िल हुआ, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और जन्नत की ख़ुशख़बरी मिले। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 9-13 — सूरा अल-फज्र
अनुवाद — अल-फज्र 11
सूरा अल-फज्र आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग मुख़तलिफ़ शहरों में सरकश हो रहे थेसूरा आयत 11/30 — सूरा अल-फज्र الفجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फज्र सुनें, सूरा अल-फज्र अनुवाद, सूरा अल-फज्र mp3, सूरा अल-फज्र pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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