अल-फज्र · 10/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फज्र
وَفِرْعَوْنَ ذِي الْأَوْتَادِ ۝١٠
Wa fir`awna zil awtaad
📖 हिंदी अर्थ
और फिरऔन के साथ (क्या किया) जो (सज़ा के लिए) मेख़े रखता था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • फ़िरऔन: मिस्र का शासक, जो अत्याचार और घमंड में चरम सीमा पर था।
  • ज़िल-औताद: "औताद" का अर्थ है खूँटे (मेख़ें)। इसका मतलब यह है कि उसके पास शक्तिशाली सेना और साधन थे, जो उसके राज्य को मज़बूती से थामे हुए थे, या फिर वह लोगों को यातना देने के लिए खूँटों से बाँधता था।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में फ़िरऔन का ज़िक्र करते हुए बताते हैं कि उसका अंजाम क्या हुआ। फ़िरऔन मिस्र का ऐसा शासक था जो अत्यधिक घमंडी, ज़ालिम और सरकश था। उसके पास विशाल सेना, धन-दौलत और ताकत थी, जिसे "औताद" (खूँटे) से समझाया गया है—यानी उसकी सारी ताकत और साम्राज्य ऐसे थे जैसे खूँटों से ज़मीन में गड़े हों, बहुत मज़बूत और स्थिर। कुछ मुफ़स्सिरीन कहते हैं कि वह लोगों को यातना देने के लिए खूँटों से बाँधता था, और उन पर अत्याचार की इंतिहा करता था।

इस ज़िक्र का मक़सद यह है कि जिस फ़िरऔन ने खुद को भगवान होने का दावा किया, जिसके पास इतनी ताकत और साज़ो-सामान था, अल्लाह ने उसे किस तरह पकड़ा और उसका नामो-निशान मिटा दिया। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी सबक़ है जो अपनी ताकत, धन, या पद पर घमंड करते हैं और अल्लाह के हुक्म को मानने से इनकार करते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की कोई भी ताकत, चाहे वह कितनी ही बड़ी क्यों न हो, अल्लाह के सामने बेबस है। फ़िरऔन के पास सेना, खूँटे, और साम्राज्य था, लेकिन जब अल्लाह का फ़ैसला आया, तो उसकी सारी ताकत धूल में मिल गई। यह हमारे लिए नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) को सबसे ऊपर रखें, और कभी भी अपनी दुनियावी ताकत या साधनों पर घमंड न करें। अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाने वालों के लिए यह एक बड़ी दलील है कि सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह के करीब होने में है, न कि दुनिया की चमक-दमक में। जो लोग अल्लाह के रसूलों का विरोध करते हैं, वे चाहे कितने भी ताकतवर हों, उनका अंजाम हमेशा बुरा होता है। यही अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है जो कभी नहीं बदलती।



📜 आयत 8-12 — सूरा अल-फज्र

8الَّتِي لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِي الْبِلَادِ
जिनका मिसल तमाम (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा ही नहीं किया गया
9وَثَمُودَ الَّذِينَ جَابُوا الصَّخْرَ بِالْوَادِ
और समूद के साथ (क्या किया) जो वादी (क़रा) में पत्थर तराश कर घर बनाते थे
10وَفِرْعَوْنَ ذِي الْأَوْتَادِ
और फिरऔन के साथ (क्या किया) जो (सज़ा के लिए) मेख़े रखता था
11الَّذِينَ طَغَوْا فِي الْبِلَادِ
ये लोग मुख़तलिफ़ शहरों में सरकश हो रहे थे
12فَأَكْثَرُوا فِيهَا الْفَسَادَ
और उनमें बहुत से फ़साद फैला रखे थे
अल-फज्रकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
10आयत

अनुवाद — अल-फज्र 10

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Monday, September 28, 2026

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