अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ابْتَلَاهُ: उसे आज़माया, परीक्षण किया।
- فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُ: उसकी रोज़ी में तंगी कर दी, उसे सीमित कर दिया।
- رَبِّي أَهَانَنِ: मेरे रब ने मुझे अपमानित किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह किसी इंसान को आज़माइश में डालता है और उसकी रोज़ी में तंगी कर देता है, यानी उसे ग़रीबी और मुश्किलों में डाल देता है, तो वह इंसान यह समझ बैठता है कि अल्लाह ने उसे अपमानित करने के लिए ऐसा किया है। वह कहता है: "मेरे रब ने मुझे ज़लील कर दिया।"
हालाँकि यह सोचना बिल्कुल ग़लत है। अल्लाह तआला जिसे चाहता है रोज़ी में कुशादगी (खुलापन) देता है और जिसे चाहता है तंगी देता है, लेकिन यह उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित होता है। कभी-कभी अल्लाह किसी बंदे को ग़रीबी देकर उसका इम्तिहान लेता है कि वह सब्र करता है या नहीं, शुक्र करता है या नहीं। यह ज़रूरी नहीं कि तंगी हमेशा अपमान का कारण हो, और न ही कुशादगी हमेशा इज़्ज़त का सबब होती है।
अल्लाह तआला ने इस आयत में इंसान की इस ग़लतफ़हमी को बयान किया है कि वह दौलत को इज़्ज़त और ग़रीबी को ज़िल्लत समझ लेता है। हक़ीक़त यह है कि अल्लाह जिसे चाहता है आज़माता है — कभी नेमत से और कभी मुसीबत से — ताकि देखे कि बंदा कैसा अमल करता है।
प्यारे भाइयो और बहनो! हमें यह समझना चाहिए कि अल्लाह की तरफ़ से आने वाली हर चीज़ — चाहे वह खुशहाली हो या तंगी — हमारे लिए इम्तिहान है। जब हमें माल मिले तो हमें शुक्र करना चाहिए और अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ खर्च करना चाहिए, और जब तंगी हो तो सब्र करना चाहिए और यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह की हर बात में भलाई है। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रज़ा और उसकी जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें सच्ची समझ और सब्र अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 14-18 — अल-फज्र
अनुवाद — अल-फज्र 16
सूरा अल-फज्र आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जब उसको (इस तरह) आज़माता है कि उस पर…सूरा आयत 16/30 — अल-फज्र الفجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फज्र सुनें, अल-फज्र अनुवाद, अल-फज्र mp3, अल-फज्र pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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