अल-फज्र · 4/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फज्र
وَاللَّيْلِ إِذَا يَسْرِ ۝٤
Wallaili izaa yasr
📖 हिंदी अर्थ
और रात की जब आने लगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَاللَّيْلِ: रात की क़सम।
  • إِذَا يَسْرِ: जब वह चलने लगे, यानी आगे बढ़े और अपने अंधेरे के साथ सफ़र करे। 'सुरा' का अर्थ है रात में चलना, और रात का चलना यानी उसका आगे बढ़ते रहना—मग़रिब से शुरू होकर सुबह सादिक़ तक वह लगातार गतिशील रहती है, कभी रुकती नहीं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में रात की क़सम खाई है जब वह चलने लगे—यानी जब वह आगे बढ़ती है, अपने अंधेरे को फैलाती है, और अपने सफ़र में लगातार बनी रहती है। यह क़सम उस वक़्त की है जब रात अपने पूरे ज़ोर पर होती है, और फिर वह धीरे-धीरे आगे बढ़कर सुबह की तरफ रुख़ करती है। यानी रात का आना भी एक निशानी है और उसका जाना भी एक निशानी है—यह सब अल्लाह की क़ुदरत के शाहिद हैं।

इन क़समों का जवाब यानी इनका मक़सद यह है कि अल्लाह तआला क़यामत के दिन तुम सबको ज़रूर जवाबदेह ठहराएगा और तुम्हारे अमलों का हिसाब लेगा—नेकी का बदला नेकी से और बुराई का बदला बुराई से। यह क़समें इसलिए खाई गईं ताकि इंसान यक़ीन कर ले कि यह ज़िंदगी आख़िरी चीज़ नहीं, बल्कि एक बड़ा दिन आने वाला है जब सब कुछ सामने रख दिया जाएगा।

दावती पहलू:

इन क़समों में अल्लाह तआला ने वक़्त की अहमियत बताई है—रात और दिन का बदलना, अंधेरे का आना और जाना, यह सब हमारे लिए सबक़ है। जिस तरह रात चलती है और सुबह आती है, उसी तरह यह दुनिया भी चलने वाली है और आख़िरत आने वाली है। अल्लाह ने रात की क़सम खाकर हमें याद दिलाया कि वक़्त गुज़र रहा है, हर गुज़रता हुआ लम्हा हमें क़यामत के करीब ला रहा है। तो ऐ इंसान! इस रात की गहराई में सोच—तेरा रब कितना क़ादिर है, और तू उसके सामने कितना ज़रूर खड़ा होगा। यह रात जो आज गुज़र रही है, कल तेरे अमल की गवाह होगी। इसलिए अपनी ज़िंदगी को नेकियों से भर ले, क्योंकि रातें गुज़र जाएंगी, दिन बदल जाएंगे, मगर तेरे अमल तेरे साथ रहेंगे। अल्लाह की रहमत और उसका इंसाफ़ दोनों ही हक़ीक़त हैं—जो नेकी करेगा वह कामयाब होगा, और जो ग़ाफ़िल रहेगा वह पछताएगा। यही वक़्त है, इससे पहले कि वक़्त ख़त्म हो जाए।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-फज्र

2وَلَيَالٍ عَشْرٍ
और दस रातों की
3وَالشَّفْعِ وَالْوَتْرِ
और ज़ुफ्त व ताक़ की
4وَاللَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
और रात की जब आने लगे
5هَلْ فِي ذَٰلِكَ قَسَمٌ لِّذِي حِجْرٍ
अक्लमन्द के वास्ते तो ज़रूर बड़ी क़सम है (कि कुफ्फ़ार पर ज़रूर अज़ाब होगा)
6أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे आद के साथ क्या किया
अल-फज्रकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-फज्र 4

सूरा अल-फज्र आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और रात की जब आने लगे

सूरा आयत 4/30 — सूरा अल-फज्र الفجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फज्र सुनें, सूरा अल-फज्र अनुवाद, सूरा अल-फज्र mp3, सूरा अल-फज्र pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.





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Tuesday, September 29, 2026

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