अल-फज्र · 5/30
अनुवाद उच्चारण — अल-फज्र
هَلْ فِي ذَٰلِكَ قَسَمٌ لِّذِي حِجْرٍ ۝٥
Hal fee zaalika qasamul lizee hijr
📖 हिंदी अर्थ
अक्लमन्द के वास्ते तो ज़रूर बड़ी क़सम है (कि कुफ्फ़ार पर ज़रूर अज़ाब होगा)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَسَمٌ (क़सम): शपथ, सौगंध।
  • لِذِي حِجْرٍ (लिज़ी हिज्र): उस व्यक्ति के लिए जिसके पास अक़्ल और समझ हो। 'हिज्र' का अर्थ अक़्ल, समझ और विवेक है, क्योंकि अक़्ल इंसान को गलत कामों से रोकती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस सूरह की शुरुआत में कई महान चीज़ों की क़सम खाई है — फ़ज्र (सुबह) के वक़्त की, दस रातों (ज़ुल-हिज्जा के पहले दस दिन) की, शफ़ (जोड़) और वतर (तन्हा/विषम) की, और रात की जब वह चलने लगे। इन क़समों के बाद अल्लाह फ़रमाता है: "क्या इन क़समों में अक़्लमंद इंसान के लिए कोई सबक़ और संतुष्टि नहीं है?"

यानी, जिस व्यक्ति के पास सही अक़्ल और समझ है, उसके लिए इन क़समों में बड़ी निशानियाँ और सबक़ हैं। ये क़समें अल्लाह की अज़मत, उसकी क़ुदरत और उसके इल्म की गवाही देती हैं। जो इंसान इन चीज़ों पर ग़ौर करेगा, वह समझ जाएगा कि अल्लाह ने जो कुछ भी बनाया है, वह बेकार नहीं है, और उसका हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने जो क़समें खाई हैं, वे सिर्फ़ ज़ोर देने के लिए नहीं हैं, बल्कि उनमें गहरी हिकमतें छिपी हैं। जो शख्स इन पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की नाराज़गी से डरता है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने की दावत देती है। अल्लाह ने अपनी क़समों में जिन चीज़ों का ज़िक्र किया है — सुबह का वक़्त, दस रातें, जोड़ और तन्हा चीज़ें, और रात का गुज़रना — ये सब हमारे चारों ओर मौजूद हैं। अगर हम इन पर ग़ौर करें, तो हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी तौहीद (एकता) के नज़ारे दिखाई देंगे। यही अक़्ल का तक़ाज़ा है कि इंसान इन निशानियों से सबक़ ले और अपने रब की इबादत की तरफ़ रुजू करे। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है ताकि हम उसकी निशानियों को समझें और उसके हुक्मों पर अमल करें। जो शख्स इन निशानियों से आँखें बंद कर लेता है, वह अपनी अक़्ल का सही इस्तेमाल नहीं करता। आइए, हम इन क़समों पर ग़ौर करें और अपने ईमान को ताज़ा करें, क्योंकि यही कामयाबी की राह है।



📜 आयत 3-7 — अल-फज्र

3وَالشَّفْعِ وَالْوَتْرِ
और ज़ुफ्त व ताक़ की
4وَاللَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
और रात की जब आने लगे
5هَلْ فِي ذَٰلِكَ قَسَمٌ لِّذِي حِجْرٍ
अक्लमन्द के वास्ते तो ज़रूर बड़ी क़सम है (कि कुफ्फ़ार पर ज़रूर अज़ाब होगा)
6أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे आद के साथ क्या किया
7إِرَمَ ذَاتِ الْعِمَادِ
यानि इरम वाले दराज़ क़द
अल-फज्रकुरान सूची
30आयत
मक्कीRevelation
5आयत

अनुवाद — अल-फज्र 5

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Tuesday, August 18, 2026

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