अल-फज्र · 3/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फज्र
وَالشَّفْعِ وَالْوَتْرِ ۝٣
Wash shaf`i wal watr
📖 हिंदी अर्थ
और ज़ुफ्त व ताक़ की

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الشَّفْعِ (अश-शफ़'): जोड़ा, युग्म, दो चीज़ें जो मिलकर एक जोड़ा बनाएं।
  • الْوَتْرِ (अल-वित्र): तन्हा, अकेला, विषम (जो जोड़े में न हो)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में "शफ़' (जोड़े) और वित्र (तन्हा/अकेले)" की क़सम खाई है। यह क़सम उसकी महानता और इन चीज़ों की अहमियत को दर्शाती है।

"शफ़' (जोड़े)" से मुराद उसकी मख़लूक़ात (सृष्टि) में मौजूद जोड़े हैं — जैसे नर और मादा, आसमान और ज़मीन, सूरज और चाँद, दिन और रात, जन्नत और जहन्नम, ये सब जोड़ों की शक्ल में पैदा किए गए हैं। यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है कि उसने हर चीज़ को जोड़ों में बनाया, जैसा कि कुरआन में है: "और हमने हर चीज़ के जोड़े पैदा किए ताकि तुम नसीहत हासिल करो" (ज़ारियात: 49)।

"वित्र (तन्हा/अकेला)" से मुराद अल्लाह तआला की ज़ात है, क्योंकि वह एक है, अकेला है, उसका कोई जोड़ा नहीं, न कोई साथी है। वह अपनी ज़ात, सिफ़ात और क़ुदरत में यकता और बेमिसाल है। कुछ मुफ़स्सिरीन ने कहा है कि इससे मुराद सारी मख़लूक़ात हैं, क्योंकि हर मख़लूक़ या तो जोड़े में है या तन्हा है।

इस क़सम का मक़सद इंसान को ग़ौर-ओ-फ़िक्र की दावत देना है — कि जो ज़ात इन जोड़ों और तन्हा चीज़ों की ख़ालिक़ है, वही क़यामत के दिन हिसाब लेने पर क़ादिर है। जिस तरह उसने यह निज़ाम बनाया, उसी तरह वह दोबारा ज़िंदगी देकर हर इंसान से उसके अमल का हिसाब लेगा।

दावती पहलू:

यह क़सम हमें अपने रब की याद दिलाती है — वह जो जोड़ों में पैदा करता है और तन्हा भी रखता है। हमारी ज़िंदगी भी इन्हीं निशानियों से भरी है: हमारे दिन-रात, हमारी ख़ुशी-ग़म, हमारी ताक़त-कमज़ोरी — सब उसी के इशारे पर हैं। जब हम इन निशानियों पर ग़ौर करेंगे, तो हमारा ईमान मज़बूत होगा और हम अपने रब की तरफ़ रुजू' करेंगे। याद रखिए, जो रब इतनी बारीकी से हर चीज़ को जोड़ों और तन्हा में बनाता है, वह हमारी हर छोटी-बड़ी बात से बाख़बर है और उसी की तरफ़ हमें लौटना है।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-फज्र

1وَالْفَجْرِ
सुबह की क़सम
2وَلَيَالٍ عَشْرٍ
और दस रातों की
3وَالشَّفْعِ وَالْوَتْرِ
और ज़ुफ्त व ताक़ की
4وَاللَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
और रात की जब आने लगे
5هَلْ فِي ذَٰلِكَ قَسَمٌ لِّذِي حِجْرٍ
अक्लमन्द के वास्ते तो ज़रूर बड़ी क़सम है (कि कुफ्फ़ार पर ज़रूर अज़ाब होगा)
अल-फज्रकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-फज्र 3

सूरा अल-फज्र आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ज़ुफ्त व ताक़ की

सूरा आयत 3/30 — सूरा अल-फज्र الفجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फज्र सुनें, सूरा अल-फज्र अनुवाद, सूरा अल-फज्र mp3, सूरा अल-फज्र pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए