अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُذُنٌ: वह व्यक्ति जो हर बात सुन लेता है और हर कहने वाले की बात पर विश्वास कर लेता है।
- يُؤْذُونَ: दुःख पहुँचाना, तकलीफ़ देना।
- أَلِيمٌ: बहुत दर्दनाक, पीड़ादायक।
विस्तृत व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) के एक और बुरे कृत्य का ज़िक्र कर रहा है। ये मुनाफ़िक़ नबी करीम ﷺ को अपनी बातों से तकलीफ़ पहुँचाते थे। जब नबी ﷺ किसी की बात सुन लेते थे और उस पर अमल करते थे, तो ये लोग कहते थे कि "यह तो बस कान हैं" यानी ये हर एक की सुन लेते हैं और हर बात को सच मान लेते हैं। उनका उद्देश्य यह था कि नबी ﷺ की समझदारी और दूरदर्शिता पर कीचड़ उछालें और लोगों को उनकी नबुव्वत पर शक में डालें।
अल्लाह तआला ने नबी ﷺ को सिखाया कि आप इन्हें जवाब दें: "अगर वह कान हैं, तो वह कान तुम्हारे लिए भलाई का कान है।" यानी नबी ﷺ हर बात सुनते हैं, लेकिन वह बुराई के लिए नहीं, बल्कि भलाई के लिए सुनते हैं। वह अल्लाह पर ईमान रखते हैं और सच्चे मोमिनों की बात को सच मानते हैं, क्योंकि मोमिन सच बोलते हैं। यह सुनना उनके लिए रहमत है, क्योंकि वह लोगों की परेशानियाँ सुनकर उनका हल निकालते हैं, उनकी मदद करते हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाते हैं। यह रहमत ख़ास उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए हैं।
फिर अल्लाह तआला सख़्त चेतावनी देता है कि जो लोग अल्लाह के रसूल को किसी भी तरह की तकलीफ़ पहुँचाते हैं — चाहे बातों से, चाहे किसी और तरीक़े से — उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है। यह अज़ाब आख़िरत में उन्हें ज़रूर मिलेगा।
फ़ायदे और सबक़:
- नबी ﷺ की शान में कोई बुरा कहना या उन्हें तकलीफ़ पहुँचाना बहुत बड़ा गुनाह है, जिसकी सज़ा बहुत सख़्त है।
- नबी ﷺ की सुनने की आदत कोई कमज़ोरी नहीं थी, बल्कि यह उनकी रहमत और हिकमत थी कि वह हर किसी की बात सुनते थे ताकि सच और झूठ में फ़र्क़ कर सकें।
- एक मुसलमान को चाहिए कि वह नबी ﷺ की सीख को अपने जीवन में अपनाए — अच्छी बात सुने, सच पर ईमान रखे, और दूसरों के लिए रहमत का ज़रिया बने।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दूसरों की बात सुनना और उनकी परेशानी समझना एक अच्छी आदत है, बशर्ते वह भलाई के लिए हो।
- अल्लाह और उसके रसूल की मुहब्बत का तक़ाज़ा है कि हम नबी ﷺ के साथ अदब और इज़्ज़त का बर्ताव करें और उनके बताए रास्ते पर चलें।
📜 आयत 59-63 — अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 61
सूरा अत-तौबा आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसमें से बाज़ ऐसे भी हैं जो (हमारे) रसूल…सूरा आयत 61/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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