अल-क़द्र · 3/5
अनुवाद उच्चारण — अल-क़द्र
لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ ۝٣
Lailatul qadri khairum min alfee shahr
📖 हिंदी अर्थ
शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَيْلَةُ الْقَدْرِ: वह रात जिसमें क़ुरआन उतारा गया, यह रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आती है।
  • خَيْرٌ: बेहतर, अधिक फ़ज़ीलत वाली।
  • مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ: एक हज़ार महीनों से (जिसमें लैलतुल क़द्र न हो)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में लैलतुल क़द्र की अज़ीम फ़ज़ीलत बयान की है। यह रात इबादत, क़ियाम और नेक अमल के लिए इतनी बरकत वाली है कि इसकी इबादत उन एक हज़ार महीनों की इबादत से बेहतर है जिनमें लैलतुल क़द्र न हो। एक हज़ार महीने लगभग तिरासी (83) साल और चार महीने के बराबर होते हैं — यानी पूरी उम्र भर की इबादत से भी बढ़कर है इस एक रात का अमल।

यह वही रात है जिसमें क़ुरआन मजीद नाज़िल हुआ, और यह रमज़ान के आखिरी अशरे (दस दिनों) की ताक रातों में आती है। जो व्यक्ति इस रात को ईमान की हालत में और अल्लाह से सवाब की उम्मीद रखते हुए इबादत में गुज़ारे, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत मुसलमानों के लिए एक ज़बरदस्त ख़ुशख़बरी है! अल्लाह ने अपनी रहमत से उम्मत-ए-मुहम्मदिया को एक ऐसा अनमोल तोहफ़ा दिया है जो पहले की उम्मतों को नहीं मिला। सोचिए — अगर कोई इंसान 83 साल जिए और पूरी उम्र इबादत में बिता दे, तो उसे जितना सवाब मिलता है, उतना सवाब एक रात की इबादत से मिल सकता है! यह अल्लाह की असीम रहमत और करम का दरवाज़ा है। इसलिए हमें चाहिए कि रमज़ान के आखिरी दस दिनों में इस रात को तलाश करें, नमाज़, तिलावत, ज़िक्र और दुआ में मशगूल रहें, और इस अज़ीम नेमत से भरपूर फ़ायदा उठाएँ। यह रात उन लोगों के लिए सुनहरा मौक़ा है जो अपनी ज़िंदगी का हिसाब बेहतर बनाना चाहते हैं और अल्लाह की रज़ा और मग़फ़िरत के तलबगार हैं।



📜 आयत 1-5 — अल-क़द्र

1إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ
हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया
2وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ
और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है
3لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ
शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है
4تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ
इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं
5سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ
ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है
अल-क़द्रकुरान सूची
5आयत
मक्कीRevelation
3आयत

अनुवाद — अल-क़द्र 3

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Tuesday, August 18, 2026

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