अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَقَالَ – और कहा
- الْإِنسَانُ – इंसान (यहाँ अर्थ है काफ़िर या हैरान-परेशान इंसान)
- مَا لَهَا – उसे (ज़मीन को) क्या हो गया?
तफ़सीर:
जब क़यामत का दिन आएगा, तो ज़मीन को ऐसी सख़्त हिचकोले दिए जाएँगे जैसे उसे कभी न दिए गए हों। वह अपने अंदर छिपे हुए मुर्दों और खज़ानों को बाहर निकाल देगी। उस वक़्त इंसान घबराहट और हैरानी की हालत में पूछेगा: "इस ज़मीन को क्या हो गया है? यह ऐसा क्यों हिल-डुल रही है?" यह सवाल उस इंसान की बेबसी और क़ुदरत-ए-इलाही के सामने उसकी मजबूरी को ज़ाहिर करता है।
यह वह दिन होगा जब इंसान अपनी आँखों से देख लेगा कि यह दुनिया और यह ज़मीन जिस पर वह इतराता था, अल्लाह के हुक्म से कैसे काँप उठेगी। यह मंज़र उसे याद दिलाएगा कि वह इस कायनात का मालिक नहीं, बल्कि एक कमज़ोर बंदा है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर नहीं करते, उस दिन उनकी आँखें खुल जाएँगी, मगर वह वक़्त तौबा और नेक अमल का नहीं होगा।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम उस दिन के लिए क्या तैयारी कर रहे हैं? जब ज़मीन अपने अंदर की हर चीज़ उगल देगी, तो हमारे आमाल भी सामने आ जाएँगे। आज हमें मौक़ा है कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें और उस दिन के ख़ौफ़ से अपने दिलों को पाक रखें। यह दुनिया की ज़िंदगी इम्तिहान की जगह है, और क़यामत का दिन उस इम्तिहान का नतीजा है। अल्लाह तआला हम सबको उस दिन की घबराहट से बचाए और अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।
📜 आयत 1-5 — अज़-ज़लज़ला
अनुवाद — अज़-ज़लज़ला 3
सूरा अज़-ज़लज़ला आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और एक इन्सान कहेगा कि उसको क्या हो गया हैसूरा आयत 3/8 — अज़-ज़लज़ला الزلزلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़लज़ला सुनें, अज़-ज़लज़ला अनुवाद, अज़-ज़लज़ला mp3, अज़-ज़लज़ला pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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