Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِسْمِ: "के नाम से" – अर्थात आरंभ करना।
- اللَّهِ: "अल्लाह" – यह अल्लाह तआला का सबसे खास नाम है, जो सिर्फ उसी के लिए है। इसका अर्थ है "सच्चा माबूद (इबादत के लायक)"।
- الرَّحْمَنِ: "बेहद रहम करने वाला" – जिसकी रहमत (दया) हर मख़लूक़ (सृष्टि) को शामिल है, चाहे वो मोमिन हो या काफिर। यह अल्लाह की ज़ाती सिफ़त (गुण) है।
- الرَّحِيمِ: "बहुत रहम करने वाला" – जो खास तौर पर मोमिनों (ईमान वालों) पर अपनी रहमत और करम फरमाता है। यह अल्लाह के फ़ेल (क्रिया) से जुड़ा हुआ है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत पवित्र क़ुरआन की पहली आयत है, जिसे "बिस्मिल्लाह" कहा जाता है। इसका मतलब है: "मैं अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं।" यानी जब भी हम क़ुरआन पढ़ें, कोई अच्छा काम करें, या अपनी ज़िंदगी का कोई काम शुरू करें, तो हमें अल्लाह का नाम लेकर शुरू करना चाहिए। ऐसा करने से हम अल्लाह से मदद मांगते हैं और उसके नाम से बरकत (अच्छाई) की उम्मीद करते हैं।
इस छोटी सी आयत में अल्लाह तआला के तीन बहुत ही प्यारे नाम आए हैं:
- अल्लाह: यह अल्लाह का सबसे खास नाम है, जो सिर्फ उसी के लिए है। इसका मतलब है कि वही सच्चा माबूद है, जिसकी इबादत करना हर इंसान पर फर्ज़ है। उसके अलावा कोई भी इबादत के लायक नहीं।
- अर-रहमान: यानी वह जिसकी रहमत (दया) बहुत वसी (व्यापक) है। उसकी रहमत पूरी दुनिया और हर मख़लूक़ को शामिल है। वह हर किसी को रिज़्क़ (रोज़ी) देता है, हर किसी की मदद करता है, चाहे वो नेक हो या बदकार। यह उसकी ज़ाती सिफ़त है।
- अर-रहीम: यानी वह जो खास तौर पर अपने मोमिन बंदों पर रहम फरमाता है। यानी जो लोग उस पर ईमान लाते हैं और उसकी इबादत करते हैं, उन पर वह अपनी खास रहमत और करम नाज़िल करता है। यह उसके फ़ेल (काम) से जुड़ा है।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! देखिए, अल्लाह तआला ने अपनी किताब की शुरुआत ही "बिस्मिल्लाह" से की है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपनी हर अच्छी चीज़ की शुरुआत अल्लाह के नाम से करनी चाहिए। जब हम अल्लाह के नाम से शुरू करते हैं, तो हमारे काम में बरकत होती है, शैतान दूर भागता है, और अल्लाह की मदद हमारे साथ होती है।
अल्लाह तआला कितना मेहरबान है! वह "रहमान" है, यानी उसकी रहमत हर चीज़ पर है। वह "रहीम" है, यानी वह अपने ईमान वाले बंदों से बेहद प्यार करता है। तो हमें चाहिए कि हम अल्लाह के इन प्यारे नामों को याद रखें, उससे मुहब्बत करें, और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। जब हम "बिस्मिल्लाह" पढ़ते हैं, तो हम अल्लाह से वादा करते हैं कि हम सिर्फ उसी पर भरोसा करेंगे और उसी से मदद मांगेंगे। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-फातिहा
अनुवाद — अल-फातिहा 1
सूरा अल-फातिहा आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।सूरा आयत 1/7 — सूरा अल-फातिहा الفاتحة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फातिहा सुनें, सूरा अल-फातिहा अनुवाद, सूरा अल-फातिहा mp3, सूरा अल-फातिहा pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फातिहा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

