अल-फातिहा · 2/7
अनुवाद उच्चारण — अल-फातिहा
الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ۝٢
Alhamdu lillaahi Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
तारीफ़ अल्लाह ही के लिये है जो तमाम क़ायनात का रब है।
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْحَمْدُ: सम्पूर्ण प्रशंसा और स्तुति, जो प्रेम और सम्मान के साथ हो।
  • لِلَّهِ: केवल अल्लाह के लिए।
  • رَبِّ: पालनहार, स्वामी, मालिक, जो पालन-पोषण करने वाला और सुधारने वाला हो।
  • الْعَالَمِينَ: 'आलम' का बहुवचन, जिसका अर्थ है अल्लाह के सिवा सारी मौजूदा चीज़ें, यानी समस्त सृष्टि।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत हमें सिखाती है कि सम्पूर्ण प्रशंसा, स्तुति और सभी प्रकार की तारीफ़ें — चाहे वह उसकी खूबसूरत सिफ़ात (गुणों) के लिए हो या उसकी ज़ाहिरी और बातिनी, दीनी और दुनियावी नेमतों (अनुग्रहों) के लिए — केवल अल्लाह ही के लिए हैं। वही इन सबका सच्चा और अकेला हक़दार है। यह एक ख़बर (सूचना) भी है कि अल्लाह ही प्रशंसा का पात्र है, और साथ ही यह एक आदेश भी है कि लोग उसी की प्रशंसा करें।

अल्लाह को 'रब्ब' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वही सारे जहानों का पालनहार, मालिक और प्रबंधक है। वही हर चीज़ को पैदा करने वाला है, उसकी देखभाल करने वाला है और उसे उसकी मंज़िल तक पहुँचाने वाला है। 'आलमीन' (सारे जहान) से मुराद अल्लाह के सिवा हर मौजूदा चीज़ है — इंसान, जिन्नात, फ़रिश्ते, जानवर, पेड़-पौधे, आसमान, ज़मीन, और हर वो चीज़ जो हम देखते हैं या नहीं देखते। अल्लाह अपनी रहमत से सबका पालन-पोषण करता है, और अपने ख़ास बंदों (औलिया) को ईमान और नेक अमल की तौफ़ीक़ देकर उनकी आत्मिक तरबियत (परवरिश) करता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल शुक्र और हम्द (प्रशंसा) से भरा होना चाहिए। जब हम अल्लाह की तारीफ़ करते हैं, तो हमारा दिल उसकी मुहब्बत से भर जाता है और हमें अपनी कमज़ोरी और उसकी बड़ाई का एहसास होता है।
  2. यह आयत हमें अल्लाह की रबूबियत (पालनहार होने) का यक़ीन दिलाती है — कि वह हमें अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि हर वक़्त हमारी देखभाल करता है। यह एहसास इंसान को सुकून और भरोसा देता है।
  3. 'रब्बुल आलमीन' कहने से हमें यह पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और तरबियत सिर्फ़ इंसानों तक महदूद नहीं, बल्कि पूरी कायनात को शामिल है। इससे हमारे दिल में सारी मख़लूक़ात के लिए मुहब्बत और हमदर्दी पैदा होती है।
  4. जब हम हर नमाज़ में इस आयत को पढ़ते हैं, तो यह हमें याद दिलाती है कि हमारी ज़िंदगी का मक़सद सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा (खुशी) हासिल करना है। यही वो रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — अल-फातिहा

1بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।
2الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
तारीफ़ अल्लाह ही के लिये है जो तमाम क़ायनात का रब है।
3الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
रहमान और रहीम है।
4مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ
रोज़े जज़ा का मालिक है।
अल-फातिहाकुरान सूची
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मक्कीRevelation
2आयत

अनुवाद — अल-फातिहा 2

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Tuesday, August 18, 2026

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