यूनुस · 102/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
فَهَلْ يَنتَظِرُونَ إِلَّا مِثْلَ أَيَّامِ الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلِهِمْ ۚ قُلْ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ ۝١٠٢
Fahal yantaziroona illaa misla ayyaamil lazeena khalaw min qablihim; qul fantazirooo innee ma`akum minal muntazireen
📖 हिंदी अर्थ
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَيَّامِ: यहाँ "दिनों" से मतलब उन ऐतिहासिक घटनाओं और वारदातों से है जो अल्लाह ने पिछली उम्मतों पर नाज़िल कीं, यानी अज़ाब और सज़ा के दिन।
  • خَلَوْا: गुज़र चुके, बीत चुके, पहले जा चुके।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने पैगंबर मुहम्मद ﷺ को हिदायत दी है कि वे मक्का के मुशरिकीन से कहें: क्या ये लोग जो तुम्हारे पैगंबर को झुठला रहे हैं और सच्चाई के आगे सर झुकाने से इनकार कर रहे हैं, क्या ये केवल उसी अंजाम का इंतज़ार कर रहे हैं जो उनसे पहले गुज़र चुकी झुठलाने वाली उम्मतों का हुआ था? यानी जब नूह, हूद, सालिह, लूत और शुऐब (अलैहिमुस्सलाम) की क़ौमों ने अपने रसूलों को झुठलाया, तो अल्लाह ने उन पर तूफान, चीख़, भूकंप, पत्थरों की बारिश और दूसरे अज़ाब नाज़िल किए। ये मुशरिकीन भी उसी तरह के अज़ाब के मुंतज़िर हैं।

अल्लाह तआला पैगंबर ﷺ से फ़रमाता है: आप उनसे कह दीजिए कि अगर तुम अपनी ज़िद और सरकशी पर अड़े रहोगे, तो अच्छा, इंतज़ार करो। मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करने वालों में से हूँ। मैं उस वादे का इंतज़ार कर रहा हूँ जो मेरे रब ने मुझसे किया है कि वह तुम्हें सज़ा देगा और मुझे और मेरे साथियों को नजात देगा। यह एक धमकी भरा अंदाज़ है, जिसमें पैगंबर ﷺ का पूरा भरोसा अल्लाह के वादे पर ज़ाहिर होता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह का क़ानून बदलता नहीं: अल्लाह का यह क़ानून सदियों से चला आ रहा है कि जो सच्चाई को झुठलाता है और ज़िद पर अड़ा रहता है, उसका अंजाम बुरा होता है। यह क़ानून किसी खास ज़माने या मुल्क के लिए नहीं, बल्कि हर ज़माने और हर जगह के लिए है।
  2. सब्र और भरोसा: पैगंबर ﷺ का यह अंदाज़ हमें सिखाता है कि जब हम हक़ पर हों और लोग हमारा मुक़ाबला करें, तो हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखते हुए सब्र करना चाहिए और उसके फैसले का इंतज़ार करना चाहिए।
  3. चेतावनी का महत्व: यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो नबियों की दावत को ठुकराते हैं और अपनी मनमानी पर अड़े रहते हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसे लोगों का अंजाम हमेशा बुरा ही रहा है।
  4. इंतज़ार का सही मतलब: मोमिन का इंतज़ार अल्लाह की मदद और फ़तह का होता है, जबकि काफिर का इंतज़ार अज़ाब और सज़ा का। यह फर्क हमें अपने रवैये को सुधारने की तरफ रहनुमाई करता है।


📜 आयत 100-104 — यूनुस

100وَمَا كَانَ لِنَفْسٍ أَن تُؤْمِنَ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَيَجْعَلُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذِينَ لَا يَعْقِلُونَ
कि बगैर ख़ुदा की इजाज़त ईमान ले आए और जो लोग (उसूले दीन में) अक़ल से काम नहीं लेते उन्हीं लोगें पर ख़ुदा (कुफ़्र) की गन्दगी डाल देता है
101قُلِ انظُرُوا مَاذَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَمَا تُغْنِي الْآيَاتُ وَالنُّذُرُ عَن قَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं
102فَهَلْ يَنتَظِرُونَ إِلَّا مِثْلَ أَيَّامِ الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلِهِمْ ۚ قُلْ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ
103ثُمَّ نُنَجِّي رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيْنَا نُنجِ الْمُؤْمِنِينَ
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाज़िम है कि हम ईमान लाने वालों को भी बचा लें
104قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي شَكٍّ مِّن دِينِي فَلَا أَعْبُدُ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ وَلَٰكِنْ أَعْبُدُ اللَّهَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُمْ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक़ में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़ुदा के सिवा तुम भी जिन लोगों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ
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अनुवाद — यूनुस 102

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Tuesday, August 18, 2026

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