यूनुस · 103/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
ثُمَّ نُنَجِّي رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيْنَا نُنجِ الْمُؤْمِنِينَ ۝١٠٣
Summma nunajjee Ruslanaa wallazeena aamanoo; kazaalika haqqan `alainaa nunjil mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाज़िम है कि हम ईमान लाने वालों को भी बचा लें

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُنَجِّي: हम बचा लेते हैं।
  • حَقًّا عَلَيْنَا: हमारे ऊपर अनिवार्य और सत्य है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला अपने नबियों की क़ौमों पर अज़ाब (यातना) भेजता है, तो वह अपने रसूलों और उनके साथ ईमान लाने वालों को उस अज़ाब से पहले निकाल लेता है और उन्हें सुरक्षित रखता है। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है जो पहले भी जारी रही है। जिस प्रकार अल्लाह ने पहले के रसूलों और उनके साथियों को बचाया, उसी प्रकार वह अपने आख़िरी नबी मुहम्मद ﷺ और उन पर ईमान लाने वालों को भी बचाएगा। यह बचाना अल्लाह पर एक सत्य और अनिवार्य वादा है, जिसे वह अवश्य पूरा करेगा। यह अल्लाह की ओर से अपने बंदों पर दया और कृपा है कि वह मोमिनों को मुसीबतों और अज़ाब से निजात देता है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से मालूम होता है कि अल्लाह अपने नबियों और ईमान वालों की हिफ़ाज़त (रक्षा) का वादा करता है, और उसका वादा कभी टूटता नहीं।
  2. यह आयत मोमिनों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, अल्लाह उन्हें हर बुराई से बचाएगा।
  3. ईमान और नेक अमल ही वह ज़रिया है जिससे इंसान अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त का हक़दार बनता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत के वक़्त अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से निराश न हों, क्योंकि अल्लाह अपने मोमिन बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
  5. अल्लाह की सुन्नत (रीति) में कोई बदलाव नहीं होता, इसलिए जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनका अंजाम हमेशा बेहतर होता है।


📜 आयत 101-105 — यूनुस

101قُلِ انظُرُوا مَاذَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَمَا تُغْنِي الْآيَاتُ وَالنُّذُرُ عَن قَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं
102فَهَلْ يَنتَظِرُونَ إِلَّا مِثْلَ أَيَّامِ الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلِهِمْ ۚ قُلْ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ
103ثُمَّ نُنَجِّي رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيْنَا نُنجِ الْمُؤْمِنِينَ
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाज़िम है कि हम ईमान लाने वालों को भी बचा लें
104قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي شَكٍّ مِّن دِينِي فَلَا أَعْبُدُ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ وَلَٰكِنْ أَعْبُدُ اللَّهَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُمْ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक़ में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़ुदा के सिवा तुम भी जिन लोगों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ
105وَأَنْ أَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीRevelation
103आयत

अनुवाद — यूनुस 103

सूरा यूनुस आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक्त) हम अपने रसूलों को और…

सूरा आयत 103/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए