यूनुस · 30/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
هُنَالِكَ تَبْلُو كُلُّ نَفْسٍ مَّا أَسْلَفَتْ ۚ وَرُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ ۝٣٠
Hunaalika tabloo kullu nafsim maaa aslafat; wa ruddoo ilal laahi mawlaahu mul haqqi wa dalla `anhum maa kaanoo yaftaroon
📖 हिंदी अर्थ
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्श जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़िया (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • هُنَالِكَ — उस समय, उस स्थान पर (यानी क़ियामत के दिन)।
  • تَبْلُو — परखेगी, जाँचेगी, उसे सामने लाएगी।
  • مَا أَسْلَفَتْ — जो कुछ उसने आगे भेजा (यानी दुनिया में किए गए अच्छे या बुरे कर्म)।
  • مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ — उनका सच्चा स्वामी और मालिक, जो सत्य है।
  • ضَلَّ عَنْهُمْ — उनसे ग़ायब हो जाएगा, खो जाएगा।
  • يَفْتَرُونَ — जो वे झूठ घड़ते थे (यानी झूठे देवता और झूठी शिफ़ारिश का दावा)।

तफ़सीर (व्याख्या):

उस दिन, जब हर आत्मा को उसके कर्मों का सामना करना होगा, हर व्यक्ति अपने उन कर्मों को सामने पाएगा जो उसने दुनिया में किए थे। यह परीक्षा का क्षण होगा—हर नफ़्स यह देख लेगी कि उसने आगे क्या भेजा है। अगर उसने नेकी की होगी तो नेकी का फल सामने होगा, और अगर बुराई की होगी तो बुराई का अंजाम सामने होगा। यह कोई छिपी हुई चीज़ नहीं होगी, बल्कि हर कर्म वैसे ही उजागर होगा जैसे आईने में चेहरा उजागर होता है।

फिर सबको उस सच्चे मालिक—अल्लाह—की ओर लौटाया जाएगा, जो सच्चाई में ही उनका स्वामी है। वही उनका हिसाब लेगा, वही फ़ैसला करेगा। उस दिन कोई दूसरा मालिक या मददगार नहीं होगा। जो लोग दुनिया में मूर्तियों, देवताओं या किसी और को अल्लाह का साझी मानते थे, और यह दावा करते थे कि ये हमारे सिफ़ारिशी हैं, वे सब उनसे ग़ायब हो जाएँगे। उनके वे झूठे देवता, उनकी झूठी कल्पनाएँ और उनके बनाए हुए सहारे—सब कुछ मिट जाएगा। उस दिन कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा, कोई मदद करने वाला नहीं होगा, सिवाय अल्लाह के।


फ़ायदे (सबक):

  1. कर्मों की हक़ीक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में हम जो भी करते हैं, वह आगे भेजा जाता है। हमारे कर्म हमारे साथ उस दिन मौजूद होंगे। इसलिए हर पल यह सोचकर अमल करें कि यह कर्म क़ियामत के दिन मेरे सामने आएगा।
  2. सच्चा मालिक सिर्फ़ अल्लाह: दुनिया में हम कई चीज़ों को अपना सहारा और मालिक बना लेते हैं—धन, पद, रिश्ते, या अपनी कल्पनाएँ। लेकिन उस दिन सबसे सच्चा और एकमात्र मालिक अल्लाह ही होगा। इसलिए आज ही अपने दिल को सिर्फ़ उसी से जोड़ें।
  3. झूठे सहारों का अंत: जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें लगाते हैं, वे उस दिन निराश होंगे। यह हमें सिखाता है कि अपनी उम्मीदें, अपनी आशाएँ और अपनी मदद सिर्फ़ उसी से माँगें जो सच्चा है—अल्लाह।
  4. जीवन की तैयारी: यह आयत हमें जागरूक करती है कि ज़िंदगी एक इम्तिहान है। जो आज अच्छे कर्म करता है, वह उस दिन खुश होगा; और जो आज बुराई में लगा है, उसे उस दिन पछताना पड़ेगा। इसलिए आज ही तौबा करें और अपने कर्मों को सुधारें।


📜 आयत 28-32 — यूनुस

28وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا مَكَانَكُمْ أَنتُمْ وَشُرَكَاؤُكُمْ ۚ فَزَيَّلْنَا بَيْنَهُمْ ۖ وَقَالَ شُرَكَاؤُهُم مَّا كُنتُمْ إِيَّانَا تَعْبُدُونَ
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेंगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शरीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे
29فَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ إِن كُنَّا عَنْ عِبَادَتِكُمْ لَغَافِلِينَ
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी
30هُنَالِكَ تَبْلُو كُلُّ نَفْسٍ مَّا أَسْلَفَتْ ۚ وَرُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्श जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़िया (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें
31قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أَمَّن يَمْلِكُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَمَن يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ الْأَمْرَ ۚ فَسَيَقُولُونَ اللَّهُ ۚ فَقُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ
ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान व ज़मीन से कौन रोज़ी देता है या (तुम्हारे) कान और (तुम्हारी) ऑंखों का कौन मालिक है और कौन शख़्श मुर्दे से ज़िन्दा को निकालता है और ज़िन्दा से मुर्दे को निकालता है और हर अम्र (काम) का बन्दोबस्त कौन करता है तो फौरन बोल उठेंगे कि ख़ुदा (ऐ रसूल) तुम कहो तो क्या तुम इस पर भी (उससे) नहीं डरते हो
32فَذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمُ الْحَقُّ ۖ فَمَاذَا بَعْدَ الْحَقِّ إِلَّا الضَّلَالُ ۖ فَأَنَّىٰ تُصْرَفُونَ
फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो
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अनुवाद — यूनुस 30

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Wednesday, August 19, 2026

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