Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- هُنَالِكَ — उस समय, उस स्थान पर (यानी क़ियामत के दिन)।
- تَبْلُو — परखेगी, जाँचेगी, उसे सामने लाएगी।
- مَا أَسْلَفَتْ — जो कुछ उसने आगे भेजा (यानी दुनिया में किए गए अच्छे या बुरे कर्म)।
- مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ — उनका सच्चा स्वामी और मालिक, जो सत्य है।
- ضَلَّ عَنْهُمْ — उनसे ग़ायब हो जाएगा, खो जाएगा।
- يَفْتَرُونَ — जो वे झूठ घड़ते थे (यानी झूठे देवता और झूठी शिफ़ारिश का दावा)।
तफ़सीर (व्याख्या):
उस दिन, जब हर आत्मा को उसके कर्मों का सामना करना होगा, हर व्यक्ति अपने उन कर्मों को सामने पाएगा जो उसने दुनिया में किए थे। यह परीक्षा का क्षण होगा—हर नफ़्स यह देख लेगी कि उसने आगे क्या भेजा है। अगर उसने नेकी की होगी तो नेकी का फल सामने होगा, और अगर बुराई की होगी तो बुराई का अंजाम सामने होगा। यह कोई छिपी हुई चीज़ नहीं होगी, बल्कि हर कर्म वैसे ही उजागर होगा जैसे आईने में चेहरा उजागर होता है।
फिर सबको उस सच्चे मालिक—अल्लाह—की ओर लौटाया जाएगा, जो सच्चाई में ही उनका स्वामी है। वही उनका हिसाब लेगा, वही फ़ैसला करेगा। उस दिन कोई दूसरा मालिक या मददगार नहीं होगा। जो लोग दुनिया में मूर्तियों, देवताओं या किसी और को अल्लाह का साझी मानते थे, और यह दावा करते थे कि ये हमारे सिफ़ारिशी हैं, वे सब उनसे ग़ायब हो जाएँगे। उनके वे झूठे देवता, उनकी झूठी कल्पनाएँ और उनके बनाए हुए सहारे—सब कुछ मिट जाएगा। उस दिन कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा, कोई मदद करने वाला नहीं होगा, सिवाय अल्लाह के।
फ़ायदे (सबक):
- कर्मों की हक़ीक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में हम जो भी करते हैं, वह आगे भेजा जाता है। हमारे कर्म हमारे साथ उस दिन मौजूद होंगे। इसलिए हर पल यह सोचकर अमल करें कि यह कर्म क़ियामत के दिन मेरे सामने आएगा।
- सच्चा मालिक सिर्फ़ अल्लाह: दुनिया में हम कई चीज़ों को अपना सहारा और मालिक बना लेते हैं—धन, पद, रिश्ते, या अपनी कल्पनाएँ। लेकिन उस दिन सबसे सच्चा और एकमात्र मालिक अल्लाह ही होगा। इसलिए आज ही अपने दिल को सिर्फ़ उसी से जोड़ें।
- झूठे सहारों का अंत: जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें लगाते हैं, वे उस दिन निराश होंगे। यह हमें सिखाता है कि अपनी उम्मीदें, अपनी आशाएँ और अपनी मदद सिर्फ़ उसी से माँगें जो सच्चा है—अल्लाह।
- जीवन की तैयारी: यह आयत हमें जागरूक करती है कि ज़िंदगी एक इम्तिहान है। जो आज अच्छे कर्म करता है, वह उस दिन खुश होगा; और जो आज बुराई में लगा है, उसे उस दिन पछताना पड़ेगा। इसलिए आज ही तौबा करें और अपने कर्मों को सुधारें।
📜 आयत 28-32 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 30
सूरा यूनुस आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़) वहाँ हर शख़्श जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में)…सूरा आयत 30/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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