यूनुस · 29/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
فَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ إِن كُنَّا عَنْ عِبَادَتِكُمْ لَغَافِلِينَ ۝٢٩
Fakafaa billaahi shaheedam bainanaa wa bainakum in kunnaa `an `ibaadatikum laghaafileen
📖 हिंदी अर्थ
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَهِيدًا: गवाह, साक्षी।
  • عِبَادَتِكُمْ: तुम्हारी पूजा (जो तुम हमें करते थे)।
  • لَغَافِلِينَ: बिल्कुल बेखबर, अनजान।

व्याख्या:

यह आयत उस स्थिति का वर्णन कर रही है जब मुशरिकों (बहुदेववादियों) को उनके द्वारा पूजे जाने वाले देवताओं के सामने लाया जाएगा, और वे देवता उनसे बात करेंगे। वे देवता (जो वास्तव में पत्थर, मूर्तियाँ, या जिन्न आदि थे) उन मुशरिकों से कहेंगे: "हमारे और तुम्हारे बीच गवाही के लिए अल्लाह ही काफी है। हम तुम्हारी पूजा से बिल्कुल बेखबर थे।"

इसका अर्थ यह है कि ये पूजे जाने वाले (चाहे वे मूर्तियाँ हों या अन्य प्राणी) न तो सुनते थे, न देखते थे, न समझते थे, और न ही उन्हें इस बात का कोई ज्ञान था कि कोई उनकी पूजा कर रहा है। वे न तो इस पूजा से प्रसन्न होते थे और न ही उन्होंने कभी इसका आदेश दिया था। यह उन मुशरिकों के लिए एक बड़ी निराशा और खुली हुई सच्चाई होगी कि जिन्हें वे पूजते थे, वे स्वयं उनकी पूजा से अनजान और बेखबर हैं। अल्लाह ही इस बात का सबसे बड़ा गवाह है कि ये देवता उनकी पूजा से पूरी तरह बेखबर थे।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की सच्चाई को स्पष्ट करती है कि केवल अल्लाह ही पूजा के योग्य है, क्योंकि वही सब कुछ सुनता, देखता और जानता है। जो चीज़ें या प्राणी इस गुण से खाली हैं, वे पूजा के पात्र नहीं हो सकते।
  2. यह मुशरिकों के लिए एक चेतावनी है कि उनके पूज्य उनके किसी काम न आएंगे, और अंततः उन्हें अपनी गलती का पछतावा होगा।
  3. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची इबादत वही है जो खालिस अल्लाह के लिए हो, और हमें हर उस चीज़ से बचना चाहिए जो अल्लाह के साथ साझी ठहराई जाए।
  4. यह मोमिनों के लिए एक तसल्ली है कि उनकी इबादत अल्लाह तक पहुँचती है, और अल्लाह उनके अच्छे कर्मों को देखता और जानता है, जबकि मूर्तियाँ और झूठे देवता किसी की इबादत से वाकिफ नहीं होते।
🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — यूनुस

27وَالَّذِينَ كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ جَزَاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثْلِهَا وَتَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ مَّا لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۖ كَأَنَّمَا أُغْشِيَتْ وُجُوهُهُمْ قِطَعًا مِّنَ اللَّيْلِ مُظْلِمًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेशा रहेंगे
28وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا مَكَانَكُمْ أَنتُمْ وَشُرَكَاؤُكُمْ ۚ فَزَيَّلْنَا بَيْنَهُمْ ۖ وَقَالَ شُرَكَاؤُهُم مَّا كُنتُمْ إِيَّانَا تَعْبُدُونَ
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेंगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शरीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे
29فَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ إِن كُنَّا عَنْ عِبَادَتِكُمْ لَغَافِلِينَ
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी
30هُنَالِكَ تَبْلُو كُلُّ نَفْسٍ مَّا أَسْلَفَتْ ۚ وَرُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्श जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़िया (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें
31قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أَمَّن يَمْلِكُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَمَن يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ الْأَمْرَ ۚ فَسَيَقُولُونَ اللَّهُ ۚ فَقُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ
ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान व ज़मीन से कौन रोज़ी देता है या (तुम्हारे) कान और (तुम्हारी) ऑंखों का कौन मालिक है और कौन शख़्श मुर्दे से ज़िन्दा को निकालता है और ज़िन्दा से मुर्दे को निकालता है और हर अम्र (काम) का बन्दोबस्त कौन करता है तो फौरन बोल उठेंगे कि ख़ुदा (ऐ रसूल) तुम कहो तो क्या तुम इस पर भी (उससे) नहीं डरते हो
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अनुवाद — यूनुस 29

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Tuesday, August 18, 2026

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