Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَحْشُرُهُمْ: उन्हें इकट्ठा करेगा (क़ियामत के दिन उठाकर लाएगा)।
- يَلْبَثُوا: वे ठहरे हों (दुनिया या क़ब्र में)।
- يَتَعَارَفُونَ: वे एक-दूसरे को पहचानेंगे।
- خَسِرَ: घाटे में पड़ा, नुक़सान उठाया।
- بِلِقَاءِ اللهِ: अल्लाह से मिलने (यानी क़ियामत, हश्र और हिसाब) का झुठलाना।
- مُهْتَدِينَ: सीधे मार्ग पर चलने वाले, हिदायत पाए हुए।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस दिन को याद करो जब वह इन मुशरिकों को क़ियामत के मैदान में हश्र (इकट्ठा) करेगा। उस वक़्त उन्हें ऐसा महसूस होगा कि वे दुनिया में (और क़ब्र में) बहुत थोड़ा समय रहे हों — बस दिन का एक घंटा भर। वे एक-दूसरे को पहचानेंगे जैसे दुनिया में एक-दूसरे को पहचानते थे, लेकिन यह पहचान भी उनके किसी काम न आएगी, क्योंकि उस वक़्त हर शख़्स अपनी ही फ़िक्र में डूबा होगा। फिर अल्लाह फ़रमाता है कि सचमुच उन लोगों ने बड़ा नुक़सान उठाया जिन्होंने अल्लाह से मिलने (यानी हश्र, हिसाब और जज़ा-सज़ा) को झुठलाया। वे दुनिया में हिदायत पर नहीं थे, न ही उन्होंने ईमान और नेक अमल का रास्ता अपनाया, इसलिए आज वे सख़्त घाटे में हैं। यह आयत उन्हें चेतावनी देती है कि दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है और अगर इसे ग़लत तरीक़े से गुज़ार दिया, तो अंजाम बहुत बुरा होगा।
फ़ायदे (सबक़):
- दुनिया की ज़िंदगी बहुत थोड़ी है — जब क़ियामत के दिन पूरी उम्र एक घंटे जैसी महसूस होगी, तो हमें चाहिए कि इस छोटी सी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और नेक कामों में गुज़ारें, ताकि आख़िरत में हमें शर्मिंदगी न उठानी पड़े।
- क़ियामत पर ईमान ही कामयाबी की कुंजी है — जो लोग अल्लाह से मिलने (हिसाब-किताब) पर ईमान रखते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को संभालते हैं और गुनाहों से बचते हैं। यही ईमान उन्हें घाटे से बचाता है।
- पहचान और रिश्ते उस दिन काम न आएंगे — दुनिया में हम अपने रिश्तेदारों और दोस्तों पर भरोसा करते हैं, लेकिन क़ियामत के दिन सिर्फ़ अमल ही काम आएंगे। इसलिए हमें अपने रिश्तों को भी अल्लाह की रज़ा के लिए निभाना चाहिए, न कि सिर्फ़ दुनियावी मतलब के लिए।
- झुठलाने वालों का अंजाम बुरा है — जो लोग आख़िरत को झुठलाते हैं, वे दुनिया में आज़ाद होकर गुनाह करते हैं, लेकिन उनका अंजाम सिर्फ़ नुक़सान और पछतावा है। मोमिन को चाहिए कि वह उनके रास्ते से बचे और हमेशा अल्लाह की तरफ़ रुजू करे।
- हिदायत अल्लाह की तरफ़ से है — जो लोग हिदायत पाना चाहते हैं, अल्लाह उन्हें रास्ता दिखाता है। इसलिए हमें दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलाए और आख़िरत के ख़ौफ़ को हमारे दिलों में बनाए रखे।
📜 आयत 43-47 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 45
सूरा यूनुस आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन ख़ुदा इन लोगों को (अपनी बारगाह में)…सूरा आयत 45/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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